अलीगढ़ पुलिस ने मुठभेड़ में दो हत्यारोपियों को मार गिराया, पत्रकारों से करवाई Video Recording

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अलीगढ़ (UP) में गुरुवार सुबह पुलिस ने हत्या के आरोपी दो लोगों को मुठभेड़ में मार गिराया है. स्थानीय पत्रकारों ने पुलिस की इजाज़त से मुठभेड़ की Video Recording की.

अलीगढ़: उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिले अलीगढ़ में गुरुवार सुबह पुलिस ने एक मुठभेड़ में हत्या के आरोपी दो लोगों को मार गिराया है, और इस मुठभेड़ का सबसे अनूठा पहलू यह था कि पुलिस द्वारा ‘न्योता’ देकर बुलाए गए स्थानीय पत्रकारों ने पुलिस की इजाज़त से मुठभेड़ की वीडियोग्राफी की.वीडियो फुटेज में दिखाई दे रहा है कि मुठभेड़ स्थल पर हथियारबंद पुलिस वाले कैसे बंदूकों और पिस्तौलों से निशाना साधकर गोलियां दाग रहे हैं.पुलिस का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से वे दो लोगों – मुस्तकीम और नौशाद – की तलाश में थे. पुलिस के मुताबिक ये दोनों पिछले माह जिले में हुई कम से कम छह हत्याओं के लिए वांछित थे, जिनमें से दो हिन्दू पुजारियों की हत्याएं थीं.

अलीगढ़ पुलिस प्रमुख अजय साहनी ने बताया, “मुठभेड़ सुबह लगभग 6:30 बजे हुई… मोटरबाइक पर सवार दो लोग एक पुलिस टीम के पास से गुज़रे, और जब उन्हें रोकने की कोशिश की गई, तो उन्होंने हम पर गोली चला दी… हम लोगों ने पीछा किया, और वे लगभग चार किलोमीटर दूर जाकर खाली पड़े एक सरकारी दफ्तर की इमारत में छिप गए… वे वहां से भी हम पर गोलियां चला रहे थे… तब तक हमारे पास बैकअप पहुंच चुका था… जब हमने गोलियां चलाईं, दोनों को लगीं, और अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया… हमारा एक अधिकारी भी घायल हुआ है…”

पिछले एक माह के दौरान हुई छह हत्याओं के सिलसिले में बुधवार को ही पांच अन्य लोगों – पांचों मुस्लिम – को भी गिरफ्तार किया गया था.जिनकी हत्याएं हुई हैं, उनमें दो हिन्दू पुजारी, एक युगल तथा दो किसान हैं. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने इन लोगों को किसी दुश्मनी की वजह से शिकार नहीं बनाया था, बल्कि वे एक खास शख्स को फंसाना चाहते थे, जो 2016 में हुई एक हत्या का गवाह था, और उस हत्या में भी इन सातों आरोपियों (बुधवार को पकड़े गए पांच तथा गुरुवार को मार गिराए गए दो) में से एक आरोपी था.

उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद मार्च, 2017 से अब तक कुल 66 लोग पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं. पुलिस के मुताबिक, हालांकि मुठभेड़ों की संख्या 1,000 से भी ज़्यादा रही है, और उनमें सैकड़ों अपराधियों को गिरफ्तार किया गया.हाल ही में, उत्तर प्रदेश पुलिस के प्रमुख ओपी सिंह ने कहा था कि पुलिस मुठभेड़ सोची-समझी ‘रणनीति’ का हिस्सा हैं, ताकि अपराधियों को पकड़ा जा सके. शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया था कि इन ऑपरेशनों में चार पुलिसवालों की मौत हुई, और 500 से ज़्यादा लोग ज़ख्मी भी हुए हैं.

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