गिरीश कर्नाड ने गले में टांगी ‘मी टू अर्बन नक्सल’ लिखी तख़्ती, तो शिकायत हुई दर्ज

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नाटककार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गिरीश कर्नाड के द्वारा ‘मी टू अर्बन नक्सल (मैं भी नक्सली)’ लिखी एक तख्ती गले में लटकाने के मामले में शिकायत दर्ज की गई है.

बेंगलुरु: पत्रकार-कार्यकर्ता गौरी लंकेश की पहली बरसी पर बेंगलुरु में पांच सितंबर को आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जाने-माने नाटककार एवं ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित गिरीश कर्नाड के द्वारा ‘मी टू अर्बन नक्सल (मैं भी नक्सली)’ लिखी एक तख्ती गले में लटकाने के विरोध में एक वकील ने शुक्रवार को शिकायत दर्ज करायी. अपनी शिकायत में वकील अमृतेश एन. पी. ने कहा कि कर्नाड को गले में एक तख्ती लटकाये देखा गया, जिसके जरिये वह खुद को शहरी नक्सल घोषित कर रहे थे. अपनी शिकायत में उन्होंने कहा, ‘‘शहरी नक्सल वे हैं जो राष्ट्र के खिलाफ विद्रोह फैला रहे हैं’’. उन्होंने कर्नाड को तुरंत गिरफ्तार किये जाने की मांग की. वकील ने कहा कि इस तरह की तख्ती गले में लटका कर ‘‘कर्नाड ने नक्सलवाद की हिंसक एवं आपराधिक गतिविधियों को प्रचारित/उकसाने और प्रसारित करने का प्रयास किया है.’’.

अमृतेश ने कहा कि कोई कैसे एक प्रतिबंधित संगठन का बैनर रख सकता है और उसका समर्थन कर सकता है. विधान सौध (राज्य सचिवालय) की पुलिस ने कहा कि उन्होंने शिकायत हलासुरू गेट पुलिस थाना को भेज दी है. घटना उसी थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई थी. बुधवार को लंकेश के घर के बाहर आयोजित एक कार्यक्रम में कर्नाड ने कई अन्य कार्यकर्ताओं के साथ हिस्सा लिया था. इसमें हिस्सा लेने वाले लोगों ने माओवादियों से के साथ संबंध होने के आरोप में देशभर से पांच कार्यकर्ताओं को उनके घरों पर नजरबंद किए जाने के विरोध में भी प्रदर्शन किया.

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