जिम्नास्ट दीपा करमाकर से भी सोने की उम्मीद

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इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबैंग में 18 अगस्त से 18वें एशियाई खेल शुरू होने हैं। भारत ने एशियाई खेलों में अब तक करीब 600 पदक जीते हैं। इनमें 140 स्वर्ण हैं, लेकिन कुछ खेल ऐसे हैं, जिनमें भारत आज तक गोल्ड मेडल नहीं जीत सका। इनमें बैडमिंटन, जिम्नास्टिक्स और वेटलिफ्टिंग भी शामिल हैं। लेकिन इस बार भारतीय शटलर्स साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और किदांबी श्रीकांत की जबर्दस्त फॉर्म को देखते हुए स्वर्ण पदक की काफी उम्मीद है।

दीपा करमाकर से जिम्नास्टिक्स में भी भारत को गोल्ड मेडल की उम्मीद है। वेटलिफ्टिंग में गोल्डकोस्ट की स्वर्ण पदक विजेता मीराबाई चानू और संजीता चानू इस बार भाग नहीं ले रही हैं। लेकिन अगर सतीश कुमार शिवलिंगम कॉमनवेल्थ गेम्स जैसा प्रदर्शन दोहरा पाए तो इस खेल में भी 67 साल से चला आ रहा सोने का सूखा खत्म हो सकता है। भारत एशियाई खेलों में वेटलिफ्टिंग, बैडमिंटन और जिम्नास्टिक्स के अलावा वुशू, साइक्लिंग, वॉलीबाॅल, जूडो, कनोइंग और ताइक्वांडो में भी गोल्ड मेडल नहीं जीत सका है।

तीन खेलों में भारत के नाम सिर्फ 1-1 पदक : भारत ने सबसे ज्यादा 233 पदक एथलेटिक्स में जीते। जिम्नास्टिक्स, ताइक्वांडो और कनोइंग में उसे सिर्फ 1-1 मेडल मिला। 1974 में तेहरान में हुए एशियाड में जिम्नास्टिक्स को पहली बार शामिल किया गया, लेकिन 44 साल में भारत इस खेल में सिर्फ एक ही पदक जीत सका। हालांकि, 2016 रियो ओलिंपिक में वाल्ट स्पर्धा में चौथे नंबर पर रहीं दीपा करमाकर उम्मीद बनकर उभरी हैं। त्रिपुरा की रहने वाली इस जिम्नास्ट ने पिछले महीने ही तुर्की में हुई वर्ल्ड चैलेंज कप की वाल्ट स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता था।

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