तीन तलाक पर अध्यादेश को कैबिनेट की मंजूरी

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बार में तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को यह जानकारी दी। ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’ को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है लेकिन यह राज्यसभा में लंबित है। वहां पर सरकार के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है।

उच्चतम न्यायालय ने पिछले वर्ष इस प्रथा पर रोक लगा दी थी। यह प्रथा अब भी जारी है इसलिए इसे दंडनीय अपराध बनाने की खातिर विधेयक लाया गया।

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि मोदी सरकार मुस्लिम महिलाओं के लिए तीन तलाक को न्याय का मुद्दा नहीं बना रही है, बल्कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश में लगी हुई है।

वहीं, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीन तलाक बिल को पास करवाने की बार-बार कोशिश की, लेकिन कांग्रेस ने वोटबैंक के चक्कर में इसे पास नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर वोटबैंक की राजनीति कर रही है।

उन्होंने सोनिया गांधी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और बसपा सुप्रीमो मायावती से अपील की कि उन्हें इस मुद्दे पर सरकार का साथ देना चाहिए।

बता दें कि संशोधित बिल में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को गैर जमानती अपराध माना गया है। संशोधन के मुताबिक, अब आरोपी को जमानत देने का अधिकार मजिस्ट्रेट के पास होगा। मामले के ट्रायल से पहले मजिस्ट्रेट पीड़िता का पक्ष सुनकर आरोपी को जमानत दे सकता है।

साथ ही मजिस्ट्रेट के पास ये भी अधिकार होगा कि वो पति-पत्नी के बीच समझौता कराकर शादी को बरकरार रख सके। इसके अलावा नए बिल के मुताबिक, पीड़िता और उसके परिजन एफआईआर दर्ज करा सकते हैं।

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