बैडमिंटन में पहला गोल्ड दिला सकती हैं साइना-सिंधु

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इंडोनेशिया के जकार्ता और पालेमबैंग में 18 अगस्त से 18वें एशियाई खेल शुरू होने हैं। भारत ने एशियाई खेलों में अब तक करीब 600 पदक जीते हैं। इनमें 140 स्वर्ण हैं, लेकिन कुछ खेल ऐसे हैं, जिनमें भारत आज तक गोल्ड मेडल नहीं जीत सका। इनमें बैडमिंटन, जिम्नास्टिक्स और वेटलिफ्टिंग भी शामिल हैं। लेकिन इस बार भारतीय शटलर्स साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और किदांबी श्रीकांत की जबर्दस्त फॉर्म को देखते हुए स्वर्ण पदक की काफी उम्मीद है।

जकार्ता में हुए 1962 एशियाई खेलों में पहली बार बैडमिंटन को शामिल किया गया था। तब से अब तक भारत एशियाड में इस खेल में आठ ब्रॉन्ज ही जीत सका। इनमें से पहला पदक 1974 तेहरान एशियाड में मेन्स टीम को मिला था। भारत ने दिल्ली में हुए 1982 एशियाड में बैडमिंटन में सबसे ज्यादा पांच पदक जीते थे। इसके बाद 1986 में मेन्स टीम और 2014 इंचियोन एशियन गेम्स में महिला टीम ने एक-एक ब्रॉन्ज दिलाया।

 साइना-सिंधु को कामयाबी का पूरा भरोसा : हाल ही में वर्ल्ड बैडमिंटन चैम्पियनशिप का फाइनल खेलने वाली पीवी सिंधु ने कहा, “चीन, जापान और दक्षिण कोरिया हमेशा से बैडमिंटन पॉवर के रूप में जाने जाते रहे हैं। भारतीय खिलाड़ियों को इस बार भी इन्हीं देशों से चुनौती मिलेगी। हालांकि, हम तैयार हैं। निजी तौर पर मैं अच्छी लय में हूं। पूरे आत्मविश्वास के साथ कोर्ट में उतरूंगी।” उधर, गोल्डकोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वालीं साइना नेहवाल का कहना है, “हमारे पास अच्छा कॉम्बिनेशन है। हम दुनिया की श्रेष्ठ टीमों को हराने में सक्षम हैं। मैं 100 फीसदी फिट हूं और पोडियम पर पहुंचने का पूरा विश्वास है।” साइना नेहवाल वर्ल्ड बैडमिंटन रैंकिंग में नंबर वन भी रह चुकी हैं।

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