IAF की ताकत बढ़ी, पठानकोट Airbase में तैनात हो गए 8 Apache हेलीकॉप्टर

भारतीय वायुसेना अमेरिका से मिल रहे 22 अपाचे हेलीकॉप्टरों को पठानकोट और चीन बार्डर की सुरक्षा के लिए असम के जोरहट में तैनात करेगी।

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पिछले कुछ समय से भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जारी है। इसी बीच अब से कुछ देर बाद पाकिस्तानी सीमा के करीब पठानकोट एयरबेस (Pathankot Airbase) पर अमेरिका से मिले अधुनिक तकनीक वाले आठ अपाचे हेलिकॉप्टर तैनात हो गए हैं। तैनाती से पहले अपाचे हेलिकॉप्टर्स को वॉटर कैनन से सलामी दी गई।

पठानकोट एयर बेस (Pathankot Airbase) में शामिल होने से पहले एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ (BS Dhanoa) और वेस्टर्न एयर कमांडर एयर मार्शल आर नांबियार (R Nambiar) ने अपाचे हेलिकॉप्टरों (Apache Helicopter) की पूजा की। इस एयरबेस पर अपाचे की तैनाती से भारतीय एयरफोर्स की ताकत और बढ़ जाएगी।

अपाचे की खूबियां
– अपाचे एक मल्टी रोल कॉम्बैट हेलिकॉप्टर है।
– दुनिया भर में कंपनी ने अब तक 2,100 अपाचे हेलिकॉप्टर्स की सप्लाई की है।
– वायुसेना में अपाचे पहला ऐसा हेलिकॉप्‍टर है जो विशुद्ध रूप से हमले करने का काम करेगा।
– वायुसेना रूस निर्मित एमआई-35 का इस्‍तेमाल वर्षों से कर रही है,जो रिटायरमेंट के कगार पर है।
– अपाचे दुश्‍मन की किलेबंदी को भेदकर और उसकी सीमा में घुसकर हमला करने में सक्षम है।
– यह हेलिकॉप्टर 293 किमी प्रति घंटा उड़ सकता है तथा एजीएम-114 हेलिफायर मिसाइल से लैस है।
– ये हेलीकॉप्टर्स दिन रात और किसी भी मौसम में ऑपरेशन कर सकते हैं।
– ऊंचे पहाड़ों में बने आतंकी कैंपों और दुश्मन सेना के ठिकानों पर ये हमला करने में सक्षम हैं।

भारतीय वायुसेना अमेरिका से मिल रहे 22 अपाचे हेलीकॉप्टरों को पठानकोट और चीन बार्डर की सुरक्षा के लिए असम के जोरहट में तैनात करेगी। AH-64E अपाचे दुनिया के सबसे उन्नत बहु-भूमिका लड़ाकू हेलिकॉप्टरों में से एक है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी सेना भी करती है। इससे वायुसेना के लड़ाकू क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी।

सितंबर 2015 में अमेरिकी सरकार और बोइंग लिमिटेड के साथ वायुसेना ने 22 अपाचे हेलिकॉप्टरों की अनुबंध हुई थी। बोईंग ने 27 जुलाई को 22 हेलिकॉप्टरों में से पहले चार को वायुसेना को सौंप दिया गया था। इस सौदे के लगभग चार साल बाद हिंडन एयर बेस पर भारतीय वायुसेना के अपाचे हेलिकॉप्टरों के पहले बैच की डिलीवरी हुई थी। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय ने साल 2017 में सेना के लिए 4,168 करोड़ रुपये की लागत से बोइंग से छह अपाचे हेलिकॉप्टरों की खरीद को मंजूरी दी थी।

यह हेलिकॉप्टरों का पहला बेड़ा है। हेलिकॉप्टर पहली डिलीवरी तय समय से पहले हुई है। भारतीय वायुसेना साल 2020 तक 22 अपाचे हेलिकॉप्टर के बेड़े को संचालित करेगी। वायुसेना के लिए AH-64E अपाचे ने जुलाई 2018 में पहली सफल उड़ान पूरी की थी। वायुसेना के पहले बैच ने साल 2018 में अमेरिका में अपाचे (Apache Helicopter) को उड़ाने के लिए अपना प्रशिक्षण शुरू किया था।

अपाचे हेलिकॉप्टरों (Apache Helicopter) को भारतीय वायुसेना की भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया गया है।बोइंग ने दुनिया भर में 2,200 से अधिक अपाचे हेलिकॉप्टर का सौदा किया है। भारत इसे इस्तेमाल करने वाला 14वां देश होगा।

पठानकोट एयरबेस (Pathankot Airbase) रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। यह एयरबेस पाकिस्तानी सीमा से लगभग 150 किलोमिटर की दूरी पर है। वहीं दिल्ली से इसकी दूरी लगभग 450 किलोमिटर है। यही नहीं 2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस में घुसकर पाकिस्तान के 5 आतंकियों ने हमला किया था। उन्हें खत्म करने के लिए दिल्ली से NSG कमांडो बुलाने पड़े थे। ऐसे में इन हेलिकॉप्टर्स की तैनाती से इस स्थिति में तुरंत बड़ा एक्शन लिया जा सकेगा।

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