सुप्रीम कोर्ट में दोबारा खुलेगा आरुषी-हेमराज मर्डर केस

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राजेश तलवार और नूपूर तलवार को बरी करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले की छानबीन सुप्रीम कोर्ट करेगा. सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला सही है या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने हेमराज की पत्नी खुमकला बेंजाडे की याचिका मंजूर की. बेंचाडे ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को दी है चुनौती. सीबीआई ने भी दाखिल की है याचिका लेकिन उसमें कुछ खामियां हैं. इसका मतलब है कि इस केस की सुनवाई में वक्त लगेगा.

पिछले साल दिसंबर में तलवार दंपति को बरी करने के फैसले के खिलाफ हेमराज की पत्नी ने  भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. हेमराज की पत्नी खुमकला बेंजाडे ने याचिका में कहा है कि इस बारे में हाईकोर्ट का फैसला गलत है क्योंकि हाईकोर्ट ने इसे हत्या तो माना है लेकिन किसी को दोषी नहीं ठहराया.

इसका मतलब ये है कि दोनों को किसी ने नहीं मारा। जबकि ऐसे में ये जांच एजेंसी की ड्यूटी  है कि वो हत्यारों का पता लगाए. इस याचिका में ये भी कहा गया है कि हाईकोर्ट आखिरी बार देखे जाने की थ्योरी पर विचार करने में नाकाम रहा है जबकि इस बात के ठोस सबूत थे कि L-32 जलवायु विहार में नूपुर  तलवार और राजेश तलवार मरने वालों के साथ ही मौजूद थे.

गौरतलब है कि विशेष सीबीआई जज एस लाल की कोर्ट  ने नवंबर 2013 में डॉ. राजेश तलवार और डॉ. नूपुर तलवार को उम्रकैद की सजा सुनाई. इस मामले में सबूतों को मिटाने के लिए तलवार दंपति को पांच वर्ष की अतिरिक्त सजा व गलत सूचना देने के लिए राजेश तलवार को एक साल की अतिरिक्त सजा सुनाई थी.

इसी मामले में सजा के खिलाफ दंपत्ति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की. नोएडा के आरुषि- हेमराज हत्याकांड मामले में सीबीआई ने तलवार दंपति को बरी करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी है. सीबीआई ने कहा है कि हाईकोर्ट का फैसले में गलतियां की गई हैं. सीबीआई ने कहा है कि जिन परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर निचली अदालत ने फैसला दिया था उन्हें अनदेखा नही किया जा सकता. सीबीआई ने कहा कि इस तरह के केस में वो अहम सबूत होते है.

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