विकास डर पर ADB की खास रिपोर्ट, कहा 10 साल में दुगनी हो सकती है भारत की अर्थव्यवस्था

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भारत की चालू वित्त वर्ष 2018-19 के लिए अनुमानित सात फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ रेट आश्चर्यजनक रूप से तेज है। अगर विकास दर की यह गति बनी रहती है तो अर्थव्यवस्था का आकार एक दशक के भीतर ही दोगुना हो जाएगा। एशियाई विकास बैंक (ए.डी.बी.) के मुख्य अर्थशास्त्री यासुयूकी सवादा ने कहा है कि देश को 8 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर हासिल नहीं करने को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए लेकिन आय विषमता दूर कर घरेलू मांग बढ़ाने पर गौर करना चाहिए। सवादा ने कहा कि वृद्धि को निर्यात की तुलना में घरेलू खपत से अधिक गति मिल रही है।

सवादा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि को निर्यात की तुलना में घरेलू खपत से अधिक गति मिल रही है। यह पूछे जाने पर कि क्या निर्यात में तेजी आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये जरूरी है? उन्होंने कहा कि भारत की आधी आर्थिक वृद्धि दर निजी खपत पर आधारित है। उसके बाद निवेश का स्थान है और इसीलिए ऐसा जान पड़ता है कि घरेलू बाजार वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभाएगा।

भारतीय अर्थव्यवस्था का आकर 2500 अरब डालर है और इस लिहाज से यह दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने हाल में कहा था कि देश की अर्थव्यवस्था दोगुनी होने के रास्ते पर है और 2025 तक 5,000 अरब डालर की हो जाएगी। एडीबी के चीफ इकोनॉमिस्‍ट यासुयुकी सावादा ने कहा कि भारत के लिए अभी 8 फीसदी ग्रोथ हासिल करना अभी बड़ी चुनौती है। 7 फीसदी की ग्रोथ एक बहुत अच्‍छा नंबर है और भारत को 8 फीसदी की ग्रोथ हासिल करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए।

सवादा ने कहा कि उच्च वृद्धि दर हासिल करने में असमानता तथा गरीबी में कमी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी क्योंकि खपत से उत्पादन में तेजी आएगी और रोजगार बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों की आजीविका यदि बेहतर होती है , तो वे अच्छे ग्राहक हो सकते हैं। मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि उच्च वृद्धि के लिये बाजार का विस्तार महत्वपूर्ण है। इसके अलावा आर्थिक वृद्धि को गति देने में सेवा क्षेत्र की भी अहम भूमिका होगी।

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