22 साल बाद इमरान को मिली सफलता का स्वाद

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इमरान खान को जिंदगी में सफलता का स्वाद चखने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। चाहे खेल का मैदान हो या राजनीति, दोनों में ही उन्हें शीर्ष तक पहुंचने के लिए 20 साल से ज्यादा लंबा संघर्ष करना पड़ा। सफलता से पहले कई बार असफलताओं ने उनका रास्ता रोकने की कोशिश की, लेकिन वह आगे बढ़ते रहे।

क्रिकेट के मैदान में 19 साल की उम्र में पहला कदम रखने के बावजूद वह 40 साल की उम्र में जाकर विश्व कप जीत पाए। 1971 में इमरान ने इंग्लैंड के खिलाफ बर्मिंघम में टेस्ट पदार्पण किया। मगर दो पारियों में 28 ओवर करने के बावजूद उन्हें एक भी सफलता हाथ नहीं लगी। तीन साल 1974 में इंग्लैंड के खिलाफ ही उन्हें अपना पहला टेस्ट विकेट मिला। मैच में 10 से ज्यादा विकेट लेने के लिए उन्हें 6 साल का इंतजार करना पड़ा। 1992 में 40 साल की उम्र में वह विश्व कप जीतने वाले पहले पाकिस्तानी कप्तान बने।

1992 में अपने देश का पहला विश्व कप जिताने के बाद इमरान खान ने राजनीति की ओर रुख किया। पाकिस्तान के सबसे बड़े स्टार होने के बावजूद उनका सियासी सफर मुश्किलों भरा रहा। 1996 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का गठन करने के अगले साल वह चुनाव मैदान में उतरे और बुरी तरह से विफल रहे। नेशनल अंसेबली के दो सीटों से चुनाव लड़ने के बावजूद वह एक से भी नहीं जीत सके। 2002 में जाकर उन्हें मियांवाली सीट से जीत हासिल हुई। इसके बाद इमरान ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

निरंजन कुमार

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