ममता बनर्जी की ‘संयुक्त विपक्षी रैली’ में अखिलेश यादव, एमके स्टालिन, अरुण शौरी, शरद यादव, अरविंद केजरीवाल हो सकते हैं शामिल

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की महारैली में आज विपक्षी एकता के साथ साथ केंद्र की मोदी सरकार को संदेश देने की भी कोशिश होगी

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कोलकाता (Kolkata) का ब्रिगेड परेड ग्राउंड (Brigade Parade Ground) लोकसभा चुनाव के लिए सियासी पिच का गवाह बनने को तैयार है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की महारैली में शनिवार यानी 19 जनवरी को न सिर्फ विपक्षी एकता की झलक दिखेगी, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार को एक संदेश देने की भी कोशिश होगी. करीब 20 विपक्षी दलों के एक मंच पर जुटान से लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) से ठीक पहले ऐसा लगने लगा है कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बार फिर से विपक्षी एकता की झलक देखने को मिल सकती है. इतना ही नहीं, लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों की क्या रणनीति होगी इसका भी खाका तैयार करने पर जोर होगी. ममता बनर्जी की कोलकाता में होने वाली ‘संयुक्त विपक्षी रैली’ में विपक्षी दलों से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, डीएमके चीफ एमके स्टालिन, पूर्व बीजेपी नेता अरुण शौरी, शरद यादव, अरविंद केजरीवाल आदि शामिल हो सकते हैं. 

ममता बनर्जी को अब राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का भी साथ मिल गया है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को पत्र लिख कर समर्थन की बात कही है. माना जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी की यह रैली निर्णायक भूमिका निभाएगी. दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ममता बनर्जी की रैली से एक दिन पहले समर्थन में चिट्ठी लिखी है. पत्र में कहा गया है कि पूरा विपक्ष एकजुट है.

तृणमूल कांग्रेस की विपक्ष की रैली से एक दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विपक्षी एकजुटता के ममता बनर्जी के प्रयास का समर्थन करते हुए शुक्रवार को उम्मीद जताई कि इस रैली से एकजुट भारत का शक्तिशाली सन्देश जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि पूरा विपक्ष इस विश्वास के प्रति एकजुट है कि सच्चे राष्ट्रवाद और विकास की रक्षा लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता जैसे उन मूल्यों के आधार पर करनी है जिनको नरेंद्र मोदी सरकार नष्ट कर रही है.
उन्होंने ममता को भेजे सन्देश में कहा, ” हम बंगाल के लोगों की सराहना करते हैं जो ऐतिहासिक रूप से हमारे इन मूल्यों की रक्षा करने में आगे रहे हैं.” उन्होंने कहा, ”मैं यह एकजुटता दिखाने पर ममता दी का समर्थन करता हूं और आशा करता हूं कि हम एकजुट भारत का शक्तिशाली सन्देश देंगे. गौरतलब है कि शनिवार को कोलकाता में ममता ने विपक्ष की रैली का आयोजन किया है जिसमें कांग्रेस की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे भाग लेंगे.
बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी की ‘संयुक्त भारत रैली’ में करीब 25 शीर्ष नेता शामिल हो सकते हैं. इस रैली का उद्देश्य है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र की बीजेपी सरकार के खिलाफ आगामी लोकसभा चुनाव में विपक्ष को एकजुट किया जाए. इस रैली को सफल बनाने के लिए ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भी कई घंटों तक नेताओं से बातचीत की.
उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ बने समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गठबंधन के बाद कोलकाता में शनिवार को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की विपक्षी दलों की रैली और महत्वपूर्ण हो गई है. सपा और बसपा के वरिष्ठ नेताओं के तृणमूल कांग्रेस की ‘संयुक्त विपक्षी रैली’ में मंच साझा करने की उम्मीद है. यह रैली यहां ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड मैदान में होगी.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के इस रैली में आने के, जबकि बसपा की ओर से पार्टी के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा के शिरकत करने की संभावना है. रालोद के अजीत सिंह और जयंत चौधरी भी मौजूद रहेंगे. यह पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत है. वह भी सपा – बसपा गठबंधन में शामिल होने के लिए बातचीत कर रही है. वहीं, रैली में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे करेंगे. उप्र में नया चुनावी समीकरण बनाने वाली सपा और बसपा सहित सभी बड़ी विपक्षी पार्टियों की इस रैली में मौजूदगी काफी मायने रखती है.
हालांकि, सपा उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कहा, ‘यह भाजपा विरोधी रैली है. इसलिए कई विपक्षी दल इसमें भाग ले रहे हैं और हम भी इसका हिस्सा हैं. इसका उत्तर प्रदेश की राजनीति से कोई लेना – देना नहीं है क्योंकि वह बिल्कुल ही एक अलग मोर्चा है.’ वहीं, कांग्रेस को भी यह लगता है कि विपक्ष की महारैली से उप्र में राजनीतिक समीकरण के बारे में गलतफहमी नहीं होनी चाहिए. रैली का आयोजन कर रही तृणमूल कांग्रेस ने कहा, ‘क्षेत्रीय राजनीतिक मजबूरियों को इस प्रस्तावित रैली से जुड़े बड़े राजनीतिक उद्देश्यों में नहीं मिलाना चाहिए.’
इस रैली में जिन अन्य नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है, उनमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एवं जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं तेदेपा प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू शामिल हैं. इनके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला के भी शामिल होने की उम्मीद है. कांग्रेस से खड़गे और पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी रैली में भाग लेंगे. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ – साथ राकांपा प्रमुख शरद पवार, पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा और अरूण शौरी, पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और झारखंड विकास मोर्चा के बाबूलाल मरांडी भी मंच पर नजर आएंगे. मंगलवार को भाजपा छोड़ने वाले अरूणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री गेगोंग अपांग भी रैली में शामिल होंगे.
तृणमूल प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह रैली लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिये ‘मृत्यु-नाद’ की मुनादी होगी. भगवा पार्टी के ‘कुशासन’ के खिलाफ संयुक्त लड़ाई का संकल्प जताने के लिये कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड मैदान में शनिवार को होने वाली इस रैली में 20 से अधिक विपक्षी दलों के शिरकत करने की संभावना है.
तृणमूल को उम्मीद है कि इस रैली से ममता ऐसे नेता के तौर कर उभरकर सामने आयेंगी जो ‘अन्य दलों को साथ लेकर’चल सकती हैं और आम चुनावों के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनौती दे सकती हैं. विशाल विपक्षी रैली का आयोजन बनर्जी की सोच का नतीजा है. उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा था कि लोकसभा चुनावों में क्षेत्रीय पार्टियां निर्णायक कारक साबित होंगी.

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