भारत-चीन के बीच क्या LAC पर कम होंगे तनाव? मोल्डो में छठवें दौर की बैठक आज

LAC पर उत्पन्न तनाव के बाद यह छठवें दौर की लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत है। इस बार इसमें दोनों देशों की तरफ से विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे।

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भारत और चीन के शीर्ष सैन्य कमांडरों के बीच बहुप्रतीक्षित बातचीत सोमवार को चीनी क्षेत्र मोल्डो (Moldo) में होगी। LAC पर उत्पन्न तनाव के बाद यह छठवें दौर की लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत है। इस बार इसमें दोनों देशों की तरफ से विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। यह प्रतिनिधि संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी होंगे। सेना के सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

आपको बता दें कि बैठक सुबह 11 बजे मोल्डो में होगी। कोर कमांडर स्तर की पिछली बैठक दो अगस्त को हुई थी। इस प्रकार लंबे अरसे के बाद यह बैठक हो रही है। हालांकि बीच में ब्रिगेडियर स्तर की पांच बैठक हुई हैं। इस बीच दोनों देशों की सेनाओं के बीच फिर से झड़पें हो चुकी हैं और हवाई फायरिंग भी हो चुकी है। इस बीच भारत ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कई ऊंची चोटियों पर स्थिति मजबूत कर ली है।

सेना से जुड़े सूत्रों ने कहा कि भारत की तरफ से यही मांग रखी जाएगी कि मई से पहली की स्थिति एलएसी पर बहाल की जाए। इस बैठक में भारत का रुख और सख्त रहने की भी उम्मीद है। अब वह एलएसी पर चीनी सेना के मुकाबले के लिए पहले से कहीं ज्यादा बेहतर स्थिति में मौजूद है और तमाम अहम चोटियों पर सेना डटी हुई। भारतीय सेना ने सर्दियों के लिए अपनी पूरी तैयारी कर रखी है जबकि चीनी सेना सर्दी की दस्तक भर से बेहाल है। बैठक में भारत का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल हरेंद्र सिंह द्वारा किए जाने की संभावना है जो लगातार पिछली पांच बैठकों का भी नेतृत्व कर चुके हैं।

भारतीय सेना पिछले कुछ वक्त में पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील (Pangong Lake) के निकट टकराव वाले क्षेत्रों के आसपास 20 ऊंची पहाड़ियों पर अपना कब्जा जमा चुकी है। सरकारी सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। चीन और भारत के बीच सोमवार को कोर कमांडर स्तर की छठवें दौर की वार्ता के पहले भारत की इस सामरिक बढ़त को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारत ने बर्फीले मौसम के बीच चुशूल (Chushul) के इलाके में भी पिछले कुछ दिनों से अपनी मौजूदगी बढ़ाई है, ताकि अपना प्रभुत्व कायम रखा जा सके। सूत्रों का कहना है कि सेना ने लद्दाख के सभी अग्रिम मोर्चों और संवेदनशील ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान सैनिकों की मौजूदा संख्या और हथियार बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम कर लिए हैं। सर्दियों में यहां तापमान शून्य से 25 डिग्री तक नीचे चला जाता है। भारत ने पैंगोंग झील के दक्षिण किनारे पर सामरिक बढ़त वाली पहाड़ियों पर नियंत्रण के साथ फिंगर 2 और फिंगर 3 इलाके में सैन्य तैनाती और मजबूत की है। जबकि चीन ने फिंगर 4 से फिंगर 8 के बीच के इलाके पर नियंत्रण कर रखा है।

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