अमिताभ बच्चन के फिल्मी सफ़र की Golden Jubilee

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में जिन ऊंचाइयों को छुआ है, उसका मुक़ाबला तो शायद ही कोई कर सके।

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बॉलीवुड (Bollywood) में महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) को आज हिन्दी सिनेमा में 50 साल पूरे हो गए हैं। बता दें 15 फरवरी 1969 से ही अमिताभ के अभिनय की यात्रा सिनेमा जगत में शुरू हुई थी। अमिताभ ने फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था। अमिताभ बच्चन उन चंद अभिनेताओं में से एक हैं जिनकी दमदार एक्टिंग ने उनके आलोचकों को भी चौंकाया। उनके उत्साह और काम करने के लगन ने आज उन्हें ऐसे मुकाम पर पहुंचाया है जिसे पाने का मुकाम हर कोई संजोता है। अमिताभ बच्चन की संघर्ष की कहानी जितनी आश्चर्यजनक है उतनी रोमांचक भी है।

सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने अपने करियर में जिन ऊंचाइयों को छुआ है, उसका मुक़ाबला तो शायद ही कोई कर सके।

SAAT HINDUSTANI

अमिताभ बच्चन का जन्म 11 अक्टूबर 1942 को उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में हुआ था। वे प्रसिद्ध कवि डॉ. हरिवंश राय बच्चन के बेटे हैं और उनकी मां का नाम तेजी बच्चन था जिन्हें थियेटर में गहरी रूचि थी लेकिन उन्हें घर संभालना की पसंद आया। साल 2003 में अमिताभ के सिर से पिता का साया उठ गया और साल 2007 में उनकी मां ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अमिताभ बच्चन को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कड़ा संघर्ष करना पडा। शुरूआत में उन्हें अपने लंबे कद की वजह से कई फिल्मों से हाथ धोना पड़ा। उनकी आवाज का भी मजाक बना। लेकिन उन्‍होंने हार नहीं मानी। उन्‍होंने अपने सिने करियर की ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से की. इसके बाद उन्होंने राजेश खन्ना के साथ फिल्म ‘आनंद’ (1971) में काम किया। इस फिल्म के लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला। इसके बाद उन्होंने ‘परवाना’, ‘रेशमा और शेरा’, ‘गुड्डी’ और ‘बावर्ची’ जैसी फिल्मो में काम किया। साल 1973 में आइ फिल्म ‘जंजीर’ उनके करियर में मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म के बाद वे एंग्री मैन बनकर उभरे। इसके बाद अमिताभ बच्चन ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

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‘सात हिंदुस्तानी’ साइन करके हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था। तब कोई नहीं जानता था कि यह पतला-दुबला, लंबा युवक आगे चलकर भारतीय सिनेमा का इतिहास बदल देगा। एक संमय ऐसा आया कि कई मामलों में अमिताभ बच्चन ने अभिनय सम्राट दिलीप कुमार और लोकप्रियता के शिखर पर रहे सुपरस्टार राजेश खन्ना को भी पीछे छोड़ दिया है।

साल 1984 में अमिताभ बच्चन इलाहाबाद से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़े थे। इन चुनावों में उन्होंने यूपी के पूर्व सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया था। बता दें कि अमिताभ का पोलिटिकल करियर तीन साल ही चल पाया और उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

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अमिताभ बच्‍चन के पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में फिल्‍म कुली बेहद अहम रही। इस फिल्‍म की शूटिंग के दौरान हुए एक हादसे में अमिताभ ने जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ी। 24 जुलाई 1982 को शूटिंग के दौरान पुनीत इस्सर का घूंसा अमिताभ के मुंह पर पड़ते ही वह स्टील की टेबल पर गिरे और लुढ़कते हुए दूसरी ओर जा गिरे। सीन काफी रियल लगा और इसपर उन्हें तालियां मिली। अमिताभ के पेट में दर्द होने के कुछ देर बाद उन्‍होंने बताया कि कि टेबल का कोना उनके पेट में बुरी तरह चुभा है।

डॉक्टर्स ने ऑपरेशन का फैसला किया. अमिताभ के पेट की झिल्ली (जो पेट के अंगो को जोड़े रखती है) और छोटी आंत फट चुकी थी। ऑपरेशन के एक दिन बाद अमिताभ को निमोनिया हो गया। उनके शरीर में जहर फैलना शुरू हो गया और खून पतला हो रहा था। फिर एयरबस के जरिए उन्‍हें मुंबई लाया गया. उन्हें ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल के स्पेशल विजिलेंस वॉर्ड में रखा गया। कुछ दिन बाद फिर उनकी हालत बिगड़ने लगी। शरीर में जहर फैलने की वजह से डॉक्टर्स ने दोबारा ऑपरेशन कियो जो 3 घंटों तक चला. लोगों की दुआओंने काम किया और काफी दिनों बाद वे स्‍वस्‍थ हुए।

Shahenshah

अमिताभ बच्‍चन की चर्चित फिल्‍मों में जंजीर, नमक हराम, रोटी कपड़ा और मकान, दीवार, कभी कभी, हेराफेरी, अमर अकबर एंथोनी, खून पसीना, परवरिश, कसमें वादे, त्रिशूल, डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, मि० नटवरलाल, काला पत्थर, सुहाग, लावारिस, सिलसिला, कालिया, सत्ते पे सत्ता, नमक हलाल, शराबी, खुद्दार, शक्ति, अग्निपथ, मोहब्बतें, एक रिश्ता, कभी ख़ुशी कभी ग़म, आंखें, अक्स, कांटे, बागबान, खाकी, वीर – जारा, ब्‍लैक, सरकार और कभी अलविदा न कहना शामिल है।

अमिताभ बच्‍चन को सर्वश्रेष्‍ठ अभिनेता के लिए 4 राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार मिल चुके हैं। उन्‍होंने कई अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों पर भी पुरस्‍कार जीते हैं। उन्‍हें 15 फिल्‍मफेयर अवार्ड मिले हैं और 41 बार नॉमिनेट भी हुए हैं। उन्‍हें साल 1954 में पद्मश्री, साल 2001 में पद्म भूषण और साल 2015 में पद्म विभूषण से सम्‍मानित किया गया।

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