Article 370: भाजपा सरकार के सामने अभी हैं तीन बड़ी चुनौतियां।

विशेषज्ञ इसे मोदी सरकार का साहसपूर्ण फैसला मानते है, लेकिन इसके साथ ही उनका मानना है कि भाजपा सरकार को अब आने वाले समय में तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा।

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केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति के आदेश के बाद जम्मू-कश्मीर राज्य (Jammu and Kashmir) में अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया। इस निर्णय से लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया गया है और दोनों अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश रहेंगे। मोदी सरकार (Modi Government) के इस फैसले को देश-दुनिया में सराहा गया तो वहीं, विपक्ष ने इसकी आलोचना की। अलग-अलग क्षेत्र के विद्वानों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस अशोक कुमार गांगुली (Justice Ashok Ganguli) ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाना असंवैधानिक नहीं है। राज्य को विशेष दर्जा देने का फैसला अस्थायी और सामयिक था। इसलिए इसे हमेशा बनाए नहीं रखा जा सकता था। Article 370 (उप-धारा 3) में विशेष दर्जा वापस लेने का एक प्रावधान है।

जस्टिस अशोक कुमार गांगुली (Justice Ashok Ganguli) ने कहा, अस्थायी प्रावधान 70 वर्षों से ज्यादा समय तक जारी रहा है। अब इसे और कितने दिन तक जारी रखा जाएगा? यह कहना मुश्किल है कि इसे खत्म करने का फैसला राजनीतिक तौर पर उचित है या नहीं। लेकिन यह असांविधानिक नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अदालत में सरकार के फैसले को चुनौती दी जाती है, तो गहराई से जांच के बाद उसका (अदालत का) रवैया भिन्न हो सकता है। लेकिन फिलहाल यह असांविधानिक नजर नहीं आता है।

विशेषज्ञ इसे मोदी सरकार (Modi Government) का साहसपूर्ण फैसला मानते है, लेकिन इसके साथ ही उनका मानना है कि भाजपा सरकार को अब आने वाले समय में तीन बड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा।

1) PDP, नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) समेत जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियां घाटी में गोलबंदी करने की कोशिश करेंगी। नजरबंदी हटने के बाद महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला घाटी में इस मुद्दे को गर्माने की कोशिश करेंगे।

2) इस फैसले के खिलाफ विपक्ष या कोई व्यक्ति सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। ऐसे में सरकार को अपने फैसले को सही साबित ठहराने की चुनौती होगी।

3) 370 खत्म करने से यह गारंटी कतई नहीं होगी कि जम्मू-कश्मीर से आतंक खत्म हो जाएगा। सर्दियों में पाकिस्तान की घुसपैठ बढ़ सकती है। पाकिस्तान और ज्यादा आतंकियों को भेजने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में अगर आतंकियों से निपटने की तैयारी मुकम्मल नहीं होगी तो वहां के हालात नहीं बदल पाएंगे।

इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियां पुरानी सियासत का राग छेड़ेंगी। वह पूर्ण राज्य की मांग कर सकती हैं। गठबंधन सरकार के दौरान भाजपा से हाथ मिलाने वाली पीडीपी की हालत अब उतनी अच्छी नहीं रही, यह बात भाजपा अच्छी तरह से जानती है। पीडीपी दक्षिण कश्मीर में चुनाव हार गई थी। इसे देखते हुए भाजपा वहां के उभरते हुए दलों जैसे नौकरशाह से नेता बने शाह फैसल और इंजीनियर राशिद की पार्टी को आगे बढ़ा रही है, ताकि सियासत का वहां पर नया माहौल बन सके।

जम्मू-कश्मीर के सीधे केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आने के कारण वहां की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी। व्यापार बढ़ेगा, नई इंडस्ट्री लग सकेगी, जिससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। जब युवाओं को रोजगार मिलेगा तो आतंकवाद कम होगा। अभी तक सरकार का पूरा पैसा वहां की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने में जाता है। अब उस पैसे का प्रयोग विकास कार्यों के लिए भी होगा बशर्ते वहां के लोग इसे स्वीकार करें।

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