इतिहास की कहानियों से भरपूर हैं मध्यप्रदेश का असीरगढ़ किला

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हमारे देश में कई ऐसी जगह हैं, जिनकी किसे- कहानियां इतिहास की उन जगहों से जुड़ी है। जो बेहद ही खतरनाक मानी जाती है और तो और ये कई लोगों के लिए रोमांचक होती है। जहाँ लोग दूर- दूर से ऐसी जगहों पर जाकर उसका लुफ़्त उठाते हैं। ऐसी ही एक जगह है असीरगढ़ का किला। कहा जाता है कि इस किले में महाभारत के कई प्रमुख चरित्रों में से एक अश्वत्थामा आज भी वहां वजूद है। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने निकले अश्वत्थामा को उनकी एक चूक भारी पड़ी और भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें युगों-युगों तक भटकने का श्राप दे दिया। लोगो का मानना है कि अश्वत्थामा लगभग पिछले पांच हजार वर्षों से भटक रहे हैं।

भारत में मध्यप्रदेश राज्य के बुरहानपुर शहर के पास स्थित असीरगढ़ के किले के संदर्भ में लोक मान्यता है कि इस किले के गुप्तेश्वर महादेव मंदिर में अश्वत्थामा अमावस्या व पूर्णिमा तिथियों पर शिव की उपासना और पूजा करते हैं। वह आज भी यहां पूजा करते हैं, इस दावे की पुष्टि तो नहीं हुर्इ लेकिन कुछ बातें स्वतः झलकती हैं वह वही हो सकते हैं।

अश्वत्थामा महाभारतकाल अर्थात द्वापरयुग में जन्मे थे। उनकी गिनती उस युग के श्रेष्ठ योद्धाओं में होती थी। वे गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र व कुरु वंश के राजगुरु कृपाचार्य के भानजे थे। द्रोणाचार्य ने ही कौरवों और पांडवों को शस्त्र विद्या में पारंगत बनाया था। महाभारत के युद्ध के समय गुरु द्रोण ने हस्तिनापुर राज्य के प्रति निष्ठा होने के कारण कौरवों का साथ देना उचित समझा।अश्वत्थामा भी अपने पिता की भांति शास्त्र व शस्त्र विद्या में निपुण थे। पिता-पुत्र की जोड़ी ने महाभारत के युद्ध के दौरान पांडवों की सेना को छिन्न-भिन्न कर दिया था।

असीरगढ़ किला बुरहानपुर से लगभग 20 किमी की दूरी पर उत्तर दिशा में सतपुड़ा पहाडिय़ों के शिखर पर समुद्र सतह से 750 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। बुरहानपुर खंडवा से लगभग 80 किमी दूर है। यहां से बुरहारनपुर तक जाने के लिए ट्रेन, बसें व टैक्सी आसानी से मिल जाती हैं। यहां से सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है, जो करीब 180 किमी दूर है। बुरहानपुर मध्य प्रदेश के सभी बड़े शहरों से रेल मार्ग द्वारा जुड़ा है।

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