एशियन गेम्स 2018: भारत को युवा ऐथलीट हिमा दास से है मेडल की उम्मीद

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इंडोनेशिया के जकार्ता और पेलेमबैंग में 18 अगस्त से एशियाई खेलों का आगाज होने जा रहा है। इस बार एशियाई खेलों में ऐथलीट हिमा दास से भी पदक की उम्मीद की जा रही है। उन्होंने फिनलैंड में 400 मीटर फाइनल रेस में 51.46 सेकंड में पूरा किया था। वहीं एशियाई खेलों में बहरीन की केमी अडेकोया के नाम 51.11 सेकंड्स का रेकॉर्ड है। अगर हिमा को गोल्ड जीतना है तो उन्हें अपना प्रदर्शन और बेहतर करना होगा। 200 मीटर के अलावा हिमा इस साल 4×400 रिले स्क्वॉड का भी हिस्सा हो सकती हैं।

2016 में राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजर हिमा पर पड़ी थी। हिमा ने अंडर-18 नैशनल्स में 200 मीटर और 100 मीटर में क्रमश: रजत और कांस्य पदक जीते थे। हैदराबाद से उन्होंने एशियन यूथ मीट बैंकॉक के लिए क्वॉलिफाई किया और पिछले साल वह केन्या में हुए वर्ल्ड यूथ मीट का भी हिस्सा थीं।

हिमा 2018 में गोल्डकोस्ट में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स का भी हिस्सा थीं और उन्होंने 400 मीटर और 4×400 रिले प्रतियोगिता में भाग लिया था। 400 मीटर हिमा ने 51.32 सेकंड्स में पूरा किया था और वह छठे पोजिशन पर आई थीं। हिमा गोल्ड मेडल विजेता अमांटले मोंटशो से केवल 1.17 सेकंड्स पीछे थीं।

आपको बता दें कि नौगांव जिले के कांदुलिमारी गांव के किसान परिवार में जन्मी हैं उनके पिता रंजीत दास के पास दो बीघा जमीन है और उनकी मां जुनाली घरेलू महिला हैं। जमीन का यह छोटा सा टुकड़ा ही हिमा के छह सदस्यों के परिवार की आजीविका का साधन है। हिमा अपने गांव से एक किलोमीटर दूर स्थित ढींग के एक कालेज में बारहवीं की छात्रा हैं।

हिमा अपने स्कूल में फुटबॉल भी खेला करती हैं। उन्होंने लड़कों के साथ फुटबॉल खेलने की शुरुआत की थी। जब हिमा अपने लोकल फुटबॉल क्लब के लिए गोल मारने में व्यस्त थीं तभी उन पर एक कोच की नजर पड़ी और वह उन्हें ऐथलेटिक्स में ले आए। हिमा की जीत के बाद असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस बात की पुष्टि की थी कि हिमा दास असम की स्पोर्ट्स ऐंबैसडर होंगी।

निरंजन कुमार

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