अटल जी का राजनीतिक सफ़र

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जन्म- 25 दिसंबर 1924, ग्वालियर, मध्यप्रदेश
पिता – पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी (अध्यापक और कवि)
मां- कृष्णा देवी (घरेलू महिला)
1951 में भारतीय जनसंघ के संस्थापक बनें।
1957 में पहली बार बलरामपुर से लोकसभा का चुनाव जीते।
1962 में बलरामपुर से चुनाव हार गए।
1962 से 1967 राज्य सभा के सदस्य रहे।
1967 में एक बार फिर वाजपेयी बलरामपुर से चुनाव जीत गए।
1968 जनसंघ के अध्यक्ष बनें।
1977 मोरारजी देसाई की जनता सरकार में विदेश मंत्री बनें।
1977 4 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र में अटल जी ने हिंदी में संबोधन किया।
1980 में बीजेपी का गठन हुआ और 1986 तक पार्टी के अध्यक्ष रहे।
1984 के लोकसभा चुनावों में ग्वालियर से अटल जी की माधवराव सिंधिया से हार हुई थी।
1996 लोकसभा के चुनावों में अटल जी के नेतृत्व में केंद्र में बीजेपी की सरकार बनीं पर 13 दिन में गिर गई।
1998 में बीजेपी फिर सत्ता में आई और वाजपेयी पीएम बनें। 13 महीने बाद सरकार गिर गई।
1998 में टीडीपी ने बाहर से समर्थन दिया और केंद्र में फिर बीजेपी की सरकार बनीं, अटल पीएम बनें।
1999 कंधार विमान हाइजैक के बावजूद वाजपेयी 22 अन्य लोगों के साथ दिल्ली से लाहौर गए।
2001 में पाकिस्तान से रिश्ते सुधारने की कोशिश की।
2002 गुजरात दंगों के बाद अटल ने गुजरात के तात्कालीन सीएम को राजधर्म का पालन करने की बात कही।
2003 में तीसरी बार वाजपेयी ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान से बातचीत की पेशकश की।
2004 पार्टी की स्थापना दिवस के 25 साल पूरे होने पर सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा की।
2009 एक स्ट्रोट पड़ने के बाद लगभग शांत हो गए।
2014 24 दिसंबर को मोदी सरकार ने अटल बिहारी वाजपेयी को भारत रत्न के लिए चुना।
2015 राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 27 मई को नई दिल्ली में अटल जी के कृष्ण मेनन मार्ग पर उनके आवास में जाकर उन्हें भारत रत्न दिया।
16 अगस्त 2018 को उन्होंने आखिरी सांस ली।

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