Ayodhya case- सुप्रीम कोर्ट में भूमि विवाद मामले की सुनवाई पूरी, फैसला नवंबर महीने में सुनाया जाएगा

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले की सुनवाई पूरी कर ली, फैसला नवंबर महीने में सुनाया जाएगा.

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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद (Ayodhya land dispute) मामले की सुनवाई पूरी कर ली, फैसला नवंबर महीने में सुनाया जाएगा.

CJI रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अगुवाई वाली पांच जंजों की बेंच ने इस मामले में 40 दिन तक सुनवाई करने के बाद दलीलें पूरी कर लीं. बेंच ने अयोध्या भूमि विवाद (Ayodhya Land Dispute) मामले में संबंधित पक्षों को ‘मोल्डिंग ऑफ रिलीफ’ (राहत में बदलाव) के मुद्दे पर लिखित दलील दाखिल करने के लिये तीन दिन का समय दिया. इस पीठ में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं.

आज सुबह सुनवाई शुरू होने पर बेंच ने कह दिया था कि वह पिछले 39 दिनों से अयोध्या भूमि विवाद मामले (Ayodhya Land Dispute Case) में सुनवाई कर रही है और मामले में सुनवाई पूरी करने के लिए किसी भी पक्षकार को आज (बुधवार) के बाद अब और समय नहीं दिया जाएगा. कोर्ट ने पहले कहा था कि सुनवाई 17 अक्टूबर को पूरी हो जाएगी. बाद में इस समय सीमा को एक दिन पहले कर दिया गया.

CJI का कार्यकाल 17 नवंबर को समाप्त हो रहा है. उल्लेखनीय है कि बेंच ने अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला-के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश देने संबंधी इलाहाबाद हाईकोर्ट के सितंबर, 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर सुनवाई की है.

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन (Rajiv Dhawan) ने हिन्दू महासभा के वकील विकास सिंह की ओर से पेश किए गए नक्शे को फाड़ दिया. इसके बाद सीजेआई रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) ने कहा कि अगर कोर्ट का डेकोरम नहीं बनाया रखा गया तो हम कोर्ट से चले जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को एक हिन्दू पक्षकार की ओर से दलील दी गई कि सुन्नी वक्फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) और अन्य मुस्लिम पक्षकार यह सिद्ध करने में विफल रहे हैं कि अयोध्या में राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल पर मुगल बादशाह बाबर ने मस्जिद का निर्माण किया था.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सामने इस मामले की सुनवाई के 40वें दिन एक हिन्दू पक्षकार की ओर से वकील सी एस वैद्यनाथन ने कहा कि मुस्लिम पक्ष का यह दावा था कि विवाद की विषय वस्तु मस्जिद का निर्माण शासन की जमीन पर हुकूमत (बाबर) द्वारा किया गया था लेकिन वे इसे अभी तक सिद्ध नहीं कर पाये. वैद्यनाथन सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य मुस्लिम व्यक्तियों द्वारा अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर मालिकाना हक के लिये 1961 में दायर मुकदमे का जवाब दे रहे थे.

उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम पक्ष प्रतिकूल कब्जे के सिद्धांत के तहत विवादित भूमि पर मालिकाना हक का दावा कर रहे हैं तो उन्हें यह स्वीकार करना होगा कि मूर्तियां या मंदिर पहले इसके असली मालिक थे. वैद्यनाथन ने कहा कि वे प्रतिकूल कब्जे के लाभ का दावा नहीं कर सकते. यदि वे ऐसा दावा करते हैं तो उन्हें पहले वाले मालिक, जो इस मामले में मंदिर या मूर्ति हैं, को बेदखल करना दर्शाना होगा. इस प्रकरण की सुनवाई कर रही संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं.

वैद्यनाथन ने कहा कि अयोध्या में मुसलमानों के पास नमाज पढ़ने के लिये अनेक स्थान हो सकते हैं लेकिन हिन्दुओं के लिये तो भगवान राम का जन्म स्थान एक ही है जिसे बदला नहीं जा सकता. उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष की इस दलील में कोई दम नहीं है कि लंबे समय तक इसका उपयोग होने के आधार पर इस भूमि को ‘वक्फ’ को समर्पित कर दिया गया था क्योंकि इस संपत्ति पर उनका अकेले का कब्जा नहीं था.

मुस्लिम पक्षकारों की ओर से वकील राजीव धवन ने पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल द्वारा अयोध्या पर लिखित एक पुस्तक का हवाला दिए जाने की कोशिश पर आपत्ति जताई और कहा कि इस तरह की कोशिशों की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. बेंच ने सिंह को अपनी बहस जारी रखने के लिये कहा और टिप्पणी की कि धवन जी हमने आपकी आपत्ति का संज्ञान ले लिया है. धवन ने भगवान राम के सही जन्मस्थल को दर्शाने वाले सचित्र नक्शे का हवाला देने पर आपत्ति की थी. धवन ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच से जानना चाहा कि वह इसका क्या करें. बेंच ने कहा कि वह इसके टुकड़े कर सकते हैं. इसके बाद धवन ने अखिल भारतीय हिन्दू महासभा द्वारा उपलब्ध कराए गये इस नक्शे को कोर्ट के सामने में ही फाड़ दिया.

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