2019 चुनाव से पहले सत्ता का सेमी-फाइनल

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By Mr Sanjeev Singh, Director of Center For Empowerment Studies New Delhi.

सत्ता का सेमीफाइनल , अक्सर मीडिया में इन राज्यों के चुनाव को सत्ता का सेमी फाइनल के रूप में पेश किया जाता है मानो जो यह चूनाव जीता वो 6 महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव भी जीत ही लेगा I 2013 तक तो इसमें एक और राज्य दिल्ली भी शामिल हुआ करता था I सत्ता का सेमी-फाइनल मेरे जहन में इसलिये घुस गया क्योंकि पहली बार मैंने यह शब्द 2003 में सुना था I स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपयी जी कि सरकार थी और दिल्ली छोड़ कर बाकी तीनो राज्य में कांग्रेस का शासन था I छत्तीसगढ़ को बने अभी कुछ वर्ष ही हुए थे और मुझे सेफोलोजी करते महज़ 4-5 साल ही हुए थे I उस साल भाजपा दिल्ली हार गयी थी मगर ये तीनो राज्य जीत गयी थी  I उस साल भी एग्जिट पोल राजस्थान में गलत साबित हुआ था I उसी जीत से लबरेज होकर स्वर्गीय प्रमोद महाजन जी ने लोकसभा चुनाव समय से पहले करा लेने का निर्णय लिया और नतीजा सबके सामने था I मुझे समझ में आ गया था कि दो चुनाव एक जैसे नहीं होते और उसे एक जैसा समझना मूर्खता है दूसरी कि एक्जिट पोल या ओपिनियन पोल कि अपनी खामियां हैं और उन्हें पुर्णतः सत्य मान लेना राजनितिक जोखिम ही है I ओपिनियन पोल /एक्जिट पोल तो सिर्फ मतदाताओं कि राय लेते हैं I इसमें कोई दो राय नहीं कि चुनाव में जनता की राय महत्वपूर्ण है और जीत का बड़ा कारण है मगर यह मान लेना कि यही सबकुछ है चुनावी राजनीति की जमीनी हकीक़त से अनभिज्ञता ही है I चुनावी रणनीतिकार के रूप में मेरा अनुभव बताता है कि जनमत के योगदान जीत में 60 – 80% ही होता है उसके अलावा भी कई कारण होते हैं जो  आपके जीत को प्रभावित करते हैं I मैंने तो यहाँ तक देखा है कि जो लोग ओपिनियन पोल में बढ़ चढ़ कर भाग लेते हैं , चुनाव के दिन  छुट्टियाँ मनाते हैं I मेरा यह आकलन मेरे जीत के 5 सूत्रीय कारक के आधार पर हैं, जिसे मैंने जमीन पर देखा सुना और समझा 

छत्तीसगढ़ : 15 साल सत्ता में रहना के बावजूद भाजपा ऐतिहासिक जीत की ओर I  

बीते 15 साल में यह पहली बार है कि यहाँ पर त्रिकोणीय मुकाबला है I अब तक यहाँ कांग्रेस और भाजपा के बीच सीढ़ी टक्कर होती थी I इसलिये यहाँ कि राजनितिक जमीन बीते 5 सालों में काफी बदल गयी है और पिछले चुनाव के आधार पर आकलन करना मूर्खता ही होगी I 2013 में कांग्रेस के वरिष्ठ  नेताओं कि झीरम घाटी में नक्सालियों द्वारा हत्या कर दी गयी थी जिससे समूचे राज्य में कांग्रेस के प्रति सहानुभूति थीI उस सहानुभूति का फायदा पाकर कांग्रेस ने अपने वोटों कि हिस्सेदारी तो बढ़ा ली मगर उसे सीटों में परिवर्तित नहीं कर पाए जिससे उनकी आंतरिक गुटबाजी और कलह खुल के सामने आगयी I 2018 आते आते कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री श्री अजित जोगी अपनी नयी पार्टी बनाकर मायावती जी के साथ गठबंधन कर एक तीसरा विकल्प खड़ा किया I जनता कांग्रेस , छत्तीसगढ़  और बहुजन समाज पार्टी के इस गठबंधन ने राज्य के चुनावी समीकरण को बदल दिया है और यह गठबंधन किसको कितना नुक्सान पहुंचाएगी यह राजनितिक पंडितों के लिए यक्ष प्रश्न है ? यह तो सभी जानते हैं कि जोगी जी की सतनामी समाज में अच्छी पैठ है मगर यह शायद कोई नहीं जानता कि छत्तीसगढ़ में गिरजाघरों में भी जोगी जी कि अच्छी पैठ है और इन गिरजाघरों और यहाँ के पादरियों का आदिवासी समाज में विशेष कर बस्तर क्षेत्र में काफी अच्छी पकड़ रही है I इस बार इनमें भ्रम था कि छोटे ईसाई (जोगी जी) और बड़े ईसाई (सोनिया गाँधी ) में किसे अपना समर्थन दिया जाय I इस बार अगर भाजपा बस्तर क्षेत्र में अप्रत्याशित जीत हासिल कर ले तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा I नयी पार्टी होने कि वजह से (जांकक्षा) संगठन काफी कमजोर है इस नाते यह पार्टी वोट कटवा कि भूमिका में ज्यादा रहेगी I मेरे अनुमान के अनुसार पार्टी को 17-18% वोट मिलेंगे जिसमे से अगर बहुजन समाज का ५% वोट हटा दें तो 12-13% रहेगा I कांग्रेस विरोधी मतदाता तो जोगी जी के तरफ जाने से रहा तो इसमें भाजपा विरोधी मतदाता ही ज्यादा रहेंगे I इसमें दो राय नहीं कि जोगी जी के कारण कांग्रेस को 10-12% वोट का नुक्सान हो रहा है और कांग्रेस को 31-33% वोट मिलेंगे I अजित जोगी का गठबंधन 10-11 सीटों पर जीतेगा मगर कांग्रेस को और 10 से 15 सीटों पर नुक्सान पहुंचाएगा I दुमदार चेहरे का अभाव और भूपेंद्र बघेल तथा पुनिया जी के बीच का संगर्ष भी कांग्रेस के लिए नुकसानदायक सिद्ध होगा I कांग्रेस प्रत्याशियों के पास समय ही नहीं था कि वो ठीक से प्रचार करें I 

तो क्या भाजपा के खिलाफ कोई माहौल नहीं था ? मेरे पत्रकार दोस्त अक्सर मुझसे यही सवाल पूछते थे I सत्ता के खिलाफ जो माहौल था वो सिर्फ शहरी युवाओं में था और छत्तीसगढ़ में भाजपा की ताकत गाँव में है I यह दिल्ली के पत्रकारों के लिए काफी चौकाने वाला तथ्य है और इसे समझने के लिए हमें अविभाजित मध्यप्रदेश को समझना होगा I कांग्रेस कि पकड़ अविभाजित मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में था तो भाजपा मध्यप्रदेश के शहरी इलाके और आदिवासी इलाके ( आज का छत्तीसगढ़) में मजबूत थी I यहाँ शुरू से ही वनवासी कल्याण केंद्र और आरएसएस जमीन पर धर्म परिवर्तन के खिलाफ मुहीम चला जमीन पर काफी सक्रिय रहे हैं I राज्य बनने के बाद कांग्रेस इतनी कमजोर हो गयी है कि बीते 15 साल से सत्ता का वनवास झेल रही है I मुख्यमंत्री रमन सिंह कि अधिकतर योजना ग्रामीण महिलाओं , आदिवासिओं के लिए है और उनके सफल प्रशासन के कारण महत्वपूर्ण योजना जमीन पर काफी सुचारू ढंग से चल रहे हैं I मुझे किसी भी तरह से भाजपा का मत प्रतिशत 41% से कम होता नहीं दिख रहा है 

मध्यप्रदेश: कांटे की टक्कर, मगर गुजरात की तरह भाजपा सरकार बनाएगी 

छत्तीसगढ़ बनने के बाद इस राज्य की राजनीति में मूभूत परिवर्तन हुआ . यहाँ इस बात का उल्लेख महत्वपूर्ण है की जिस तरह झारखण्ड और उत्तर्राखंड बनने के लिए जन आन्दोलन हुआ वैसे कोई आन्दोलन छत्तीसगढ़ बनाने के लिए नहीं हुआ था I इसे भाजपा की एक चाल समझी जा सकती है जिससे कांग्रेस एक बहुत बड़े राज्य से बेदखल हो गयी I 2003 तक कांग्रेस ने दिग्विजय सिंह की अगुवाई में 10 साल राज किया I इन 10 सालों का शासन काल ऐसा था की उसे याद कर आज भी प्रदेश के मतदाताओं की रूह काँप उठती है I लोग कहते हैं की शिवराज सिंह ने दिग्विजय सिंह की तस्वीर दिखा दिखा एक के बाद एक चुनाव जीतेते आ रहे हैं I 2003 का चुनाव भाजपा ने शिवराज सिंह नहीं बल्कि सुश्री उमा भारती जी के नेत्रत्व में लड़ा था और वो चुनाव एक राजा और एक सन्यासिन के व्यक्तित्व की लडाई थी I दिग्गी राजा से त्रस्त जनता सन्यासिन के पीछे चल दी और भाजपा की बड़ी जीत हुई I कांग्रेस 31.23% मतों के साथ मात्र ३८ सीटों पर ऐसी सिमटी की आज तक उठ नहीं पायी I कांग्रेस की अन्दुरुनी गुटबाजी उसे खोखला करती चली गयी I 5 साल बाद कांग्रेस के सत्ता वापसी का सुनहरा अवसर मिला जब भाजपा से बगावत कर उमा भारती ने अलग पार्टी बना चुनाव लड़ीं I उमा जी के इस कदम से भाजपा को 5% मतों का नुक्सान हुआ और उसका मत प्रतिशत लुढ़क कर 37.5% हो गया I नतीजे आये तो चुनावी पंडितों को मनो सांप सूंघ गया I भाजपा 143 सीट जीत सत्ता में बनी रही तो पहली बार मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान का डंका बज उठा I कांग्रेस अपने बेहतरीन प्रदर्शन पर थी पर उसे 31% मत प्रतिशत और 75 सीटों के साथ संतोष करना पड़ा I 2013 में कांग्रेस विरोधी माहौल और मोदी लहर में भाजपा 165 सीट जीत सत्ता पर काबिज़ रही I इस बार भाजपा को 45% वोट मिले थे Iमध्य प्रदेश में कांग्रेस एक बटी हई पार्टी है , जमीन पर कार्यकर्त्ता गायब है I कांग्रेस ने भले ही दिग्विजय सिंह को मध्य प्रदेश से बाहर कर दिया , मध्य प्रदेश को दिग्गी राजा के दिल से बाहर न कर सकी I इस चुनाव की कमान भले ही कमलनाथ जी के हाथों में हो टिकेट बटवारे में दिग्विजय सिंह की अहम् भूमिका रही है I इसमें कोई शक नहीं की बीते पांच सालों में शिवराज सिंह की लोकप्रियता कम हुई है I कांग्रेस ने किसान आन्दोलन और सवर्ण –दलित के जाल में भाजपा को फंसाया है जिसका लाभ उसे मिल रहा है मगर अति पिछड़ा वर्ग पूर्णतः भाजपा के साथ है और 45% अति पिछड़ा वर्ग का इस बार भाजपा के जीत में अहम् योगदान होने जा रहा है I कांग्रेस इस बार भी बटी हुई दिख रही है और कमलनाथ तथा ज्योतिराजे सिंधिया अपनी अपनी डफली पीट रहे हैं I कमलनाथ के कुछ विडियो जनता के बीच आने से ग्रामीण सवर्णों पर उसका नकारात्मक असर होगा I इतने होने के बावजूद शिवराज सिंह की लोकप्रियता विशेष कर महिलाओं में कांग्रेसी नेताओं की तुलना में बहुत ज्यादा हैI कुल मिलकर इस चुनाव में भाजपा को 5% वोट का नुक्सान होगा मगर कांग्रेस का मत प्रतिशत 40% के आंकड़े के आस पास ही रहेगा जिससे लड़ाई कांटे की होती दिख रही है Iमध्य प्रदेश में गुजरात की पुनरावृति हो रही है और मामूली बढ़त से भाजपा सरकार बनाएगी क्योंकि नतीजों के आने के बाद कांग्रेस में सिर फुटव्वल शुरू होगा  

 राजस्थान : कांग्रेस की सत्ता में वापसी मगर ६ महीने बाद लोकसभा चुनाव के नतीजे उसे चौंका देंगे 

अक्सर राजनीति के पंडित कहते हैं कि राजस्थान की जनता परिवर्तन के लिए वोट देती है I मुझे इस तरह की बातों से काफी पीड़ा होती है I राजस्थान की जनता विकास के उम्मीद में भाजपा और कांग्रेस को बार बार मौका देती आ रही है और ये दोनों पार्टियाँ उसे ठगती ही आ रही है I बेचारी जनता इन दोनों पार्टियों के बीच पिस रही है I हर बार की तरह इस बार भी राजस्थान की जनता मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के हाथों ठगी महसूस कर रही है और उसका सारा गुस्सा मुख्यमंत्री के प्रति है I जाहिर है की उसका खामियाजा भाजपा को भी भुगतना पड़ेगा मगर दिलचस्प बात यह है कि मोदी जी अभी भी जनमानस में छाए हुए हैं जिससे पार्टी को डैमेज कंट्रोल करने में कुछ आसानी हो सकती है I बीते तीन चुनाव में कांग्रेस ने कभी भी यहाँ 100 का आंकड़ा पार नहीं किया है I कांग्रेस के लिए 2008 बहुत ही प्रतिकूल था जब राज्य में वसुंधरा के खिलाफ माहौल था और केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार से भी लोग मोहित थे I उस परिस्थित में भी कांग्रेस 96 सीट ही जीती जबकि लगभग वैसे ही परिस्थित 2013 में बनने से भाजपा 163 सीट जीत कर कांग्रेस का सुपड़ा साफ़ कर दिया I इस जीत में भाजपा को 45% मत मिले I कांग्रेस के इस जीत में नरेन्द्र मोदी बहुत बड़ी बाधा हैं वो भाजपा को सत्ता में बिठा तो शायद नहीं पायेंगे मगर उसकी हार को जरुर कम कर देंगे I कांग्रेस ने भी चुनाव अभियान में काफी गलतियाँ की है I कांग्रेस के बड़े नेता सीपी जोशी का नरेंद्र मोदी पर जाती गत टिपण्णी और राहुल गांधी के गोत्र की राजनीति का लाभ भाजपा को मिलेगा I राहुल गांधी की छवि दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है और अब जनता उनके किसी भी बात को गंभीरता से नहीं लेती है I राजस्थान में जमीन पर एक नारा चल रहा था जो पूरे राजनितिक हालात का वर्णन कर देता है –“मोदी तुझसे बैर नहीं , मगर वसुंधरा की अब खैर नहीं ‘ 

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