जब भाजपा सांसद बोले कांग्रेस की ही होगी जीत, सीएम खट्टर मुंह देखते रह गए।

भिवानी-महेन्द्रगढ़ से भाजपा सांसद धर्मबीर सिंह की जुबान फिसल गई और उन्होंने राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत का दावा कर डाला.

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भाजपा (BJP) की विजय संकल्प रैली के दौरान भिवानी में शनिवार को भिवानी-महेन्द्रगढ़ से भाजपा सांसद धर्मबीर सिंह (Dharambir Singh) की जुबान फिसल गई और उन्होंने राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों में कांग्रेस (Congress) की जीत का दावा कर डाला. उन्होंने कहा, ‘मैं दावे के साथ कह सकता हूं आपके हौसलों के देखते हुए भिवानी महेंद्रगढ़ लोकसभा में मुझे लगता है कि सन 1987 की तरह इस प्रदेश में पहली बार दोबारा से 85 से भी ज्यादा सीट आप कांग्रेस पार्टी को दोगे.’ हरियाणा में विधानसभा की कुल 90 सीटें हैं.

सांसद के संबोधन के वक्त मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर (Manohar Lal Khattar) समेत कई बड़े नेता मंच पर मौजूद थे. कांग्रेस की जीत का दावा करने की बात पर भाजपा नेता एक-दूसरे का मुंह ताकते नजर आए. लोग जोर-जोर से तंज कसते नजर आए और इस पर सांसद भी झेंप गए. बाद में उन्होंने अपनी बात को दुरुस्त किया.

लोकसभा चुनाव 2014 (Lok Sabha Election) में बीजेपी ने हरियाणा की 10 सीटों में से 7 पर जीत दर्ज की थी. 2 सीटें इंडियन नेशनल लोकदल और 1 सीट कांग्रेस के खाते में गई थी. इस चुनाव में बीजेपी ने हरियाणा जनहित कांग्रेस के साथ समझौता किया था. 2019 के लिए अभी बातचीत जारी है. वहीं जींद में लोकसभा उपचुनाव के दौरान बीएसपी और आईएनएलडी के बीच समझौता तो हुआ लेकिन इस चुनाव में बीजेपी के जीतने के बाद ही दोनों की दोस्तों परवान नहीं चढ़ पाई. हालांकि, आईएनएलडी के नेता ओम प्रकाश चौटाला ने समान विचारधारा वाली पार्टी के साथ गठबंधन करने के संकेत दिए हैं.

फिलहाल 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा के बाद राज्य में समीकरण बदले से नजर आते हैं. हरियाणा में जातिगत समीकरण चुनाव में बड़ी भूमिका निभाएंगे. जाट आरक्षण आंदोलन की आग में झुलस चुकी बीजेपी अब पंजाबी और बनिया वोटरों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है.

वहीं इस बार जाट बैंक कांग्रेस, आईएनएलडी और नई पार्टी जननायक जनता पार्टी के बीच बंटा हुआ नजर आ रहा है. आम जनता राज्य सरकार के कामकाज से खुश नहीं है हालांकि गुस्से जैसी बात नजर नहीं आ रही है. बेरोजगारी और भ्रष्टाचार राज्य में अब भी बड़ा मुद्दा है. इन सब के बावजूद जातिगत समीकरण ही सब पर हावी हैं.

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