BSNL पर मंडरा रहे हैं खतरे के बादल, कर्मचारियों ने पीएम मोदी को लिखा खत।

BSNL के कर्मचारियों पर सैलरी संकट मंडरा रहा है, BSNL के कर्मचारियों ने PM Modi को पत्र लिखकर कंपनी को उबारने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया है।

0
231

सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल (BSNL) के कर्मचारियों पर सैलरी संकट मंडरा रहा है। BSNL के कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) को पत्र लिखकर कंपनी को उबारने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया है। बता दें कि कंपनी के पास कर्मचारियों को जून माह के लिए सैलरी देने के लिए भी पैसे नहीं है। BSNL के इंजीनियरों ने कहा है कि कंपनी को फिर से खड़ा किया जाना चाहिए। इसके लिए उन कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए जो अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं।

इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि फिलहाल BSNL पर कोई कर्ज नहीं है और इसकी बाजार हिस्सेदारी में लगातार इजाफा हो रहा है। ऑल इंडिया ग्रैजुएट इंजीनियर्स एंड टेलीकॉम ऑफिसर्स असोसिएशन (AIGETOA) ने पत्र लिखकर पीएम मोदी से कंपनी के नकदी संकट को दूर करने के लिये बजट समर्थन दिए जाने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि नकदी संकट की वजह से कंपनी का परिचालन प्रभावित हो रहा है।

पत्र में कहा गया है कि, ‘हमारा मानना है कि मौजूदा नकदी संकट को दूर करने के लिए सरकार की तरफ से मिलने वाले न्यूनतम समर्थन से भी BSNL को एक बार फिर से मुनाफा कमाने वाली कंपनियों में शामिल किया जा सकता है।’

1.7 लाख कर्मचारियों वाली कंपनी को फरवरी में भी वेतन देने में परेशानी आई थी। सरकार ने पिछले महीने कंपनी को बैंकों से कर्ज दिलाने के लिए गारंटी पत्र जारी किया था। वित्तीय संकट से जूझ रही कंपनी को इससे काफी सहूलियत मिलेगी। इसी महीने कंपनी ने कहा था कि 2019-20 की सितंबर तिमाही तक स्थिति सामान्य हो जाएगी।

एसोसिएशन की मांग है कि BSNL में कर्मचारियों के लिए प्रदर्शन आधारित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। इससे अच्छा प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत किया जा सकेगा जबकि खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों से जवाब मांगा जा सकेगा।

सार्वजनिक क्षेत्र की दोनों दूरसंचार कंपनियां BSNL और MTNL 2010 से घाटे में चल रही हैं। MTNL दिल्ली और मुंबई में तथा BSNL शेष 20 दूरसंचार सर्किलों में परिचालन करती है। BSNL का घाटा लगातार बढ़ता जा रहा है। वित्त वर्ष 2017 में कंपनी को 4,786 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। वहीं 2018 में यह बढ़कर आठ हजार करोड़ रुपये हो गया। 2019 में इसके और ज्यादा होने की उम्मीद है।

फिलहाल कंपनी के पास फंड की भारी कमी है और वो इससे अपनी कई जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रही है। वहीं वीआरएस स्कीम के लिए भी उसे करीब 6500 करोड़ रुपये की जरूरत है। कंपनी को सरकार से भी फिलहाल 3300 करोड़ रुपये का फंड मिलना बाकी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here