Chief Justice of India के रूप में जस्टिस रंजन गोगोई का पहला दिन-दिए अहम निर्देश

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देश के प्रधान न्यायाधीश पद की शपथ लेने के बाद पहले ही दिन जस्टिस रंजन गोगोई के सख्त तेवर देखने को मिले. उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट में तभी जल्द सुनवाई के लिए आ सकते हैं, जब किसी को फांसी होने वाली हो, कोई मरने वाला हो या फिर कोई डिमोलेशन जैसी कार्रवाई का मामला हो. CJI के इस सख्त रुख को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने गौतम नवलखा मामले में जल्द सुनवाई की मांग करने का फैसला टाल दिया. वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने 6 रोहिंग्या को डिपोर्ट करने का मामला उठाया तो CJI ने कहा कि पहले याचिका दाखिल करें फिर देखेंगे.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पहले ही दिन एक याचिका खारिज कर दी. यह याचिका बीजेपी नेता अश्वनी उपाध्याय की चुनाव सुधार को लेकर दाखिल हुई थी. दरअसल जब सुनवाई हो रही थी, तब CJI रंजन गोगोई ने उपाध्याय के अपने वकील को कुछ बताने पर नाराजगी जाहिर की.उन्होंने कहा कि खुद आप पेटिशनर इन पर्सन नहीं हैं लेकिन इस तरह कैसे वकील को समझा सकते हैं.आपकी याचिका इसी आधार पर खारिज की जाती है. अश्विनी उपाध्यय ने अपनी याचिका में कहा था कि केंद्र सरकार को चुनावी याचिकाओं के जल्द निपटारे, हाईकोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई छह महीने या साल में पूरी करने के लिए अतिरिक्त जजों की नियुक्ति के निर्देश दिए जाएं.

बुधवार को शपथ लेने के बाद पहली बार चीफ जस्टिस के रूप में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे जस्टिस रंजन गोगोई. उन्होंने पहली मेशनिंग को मना किया. कहा कि  मेंशनिंग के लिए पहले पेटिशन फाइल करना ज़रूरी होगा. जस्टिस गोगोई ने कहा कि बहुत अर्जेंट मैटर ही मेंशन किए जा सकेंगे.चीफ जस्टिस ने सख्त लहजे में कहा कि जब तक पैरामीटर तय नहीं होते कोई मेंशनिंग नहीं होगी. जब तक कि मामला सही में ही अर्जेंट ना हो.जैसे कि कल किसी को मौत की सजा हो रही हो या जेल हो रही हो.दरअसल सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस के सामने जल्द सुनवाई की मांग होती है.

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