पाकिस्तान में सीपीईसी के खिलाफ उठ रही हैं विरोध की आवाजें

0
363

अतंर्राष्ट्रीय संकट समूह (आईसीजी) के अनुसार चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) की वजह से स्थानीय लोगों में असंतोष फैला हुआ है। उनमें 2,700 किलोमीटर के कॉरिडोर में अधूरे रोजगार और नागरिकों की जिंदगी में सेना के बहुत ज्यादा दखल की वजह से रोष है। आईसीजी के नीति निदेशक रिचर्ड एटबुडका कहना है, ‘ग्वादर के लोगों ने अतीत में सेना के खिलाफ आक्रमक कार्यों को जन्म दिया था। अब वह सेना की अत्यधिक मौजूदगी से परेशान हैं।’

ग्वादर पोस्ट सीपीईसी का मुख्य हिस्सा है। चीन को उम्मीद है कि इस पोस्ट के जरिए उसे अरब सागर तक पहुंच मिल जाएगी और यहां से उसे अपने सामान को निर्यात करने के लिए वैकल्पिक रास्ता मिल जाएगा। यह क्षेत्र अशांत बलूचिस्तान प्रांत में पड़ता है जहां के लोग पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह करते रहते हैं। यही वजह है कि यहां सेना की अत्यधिक उपस्थिति है। आईसीजी रिपोर्ट की वजह से राजनीतिज्ञों को मजबूरन इस क्षेत्र में बढ़ते असंतोष की तरफ ध्यान देना पड़ेगा क्योंकि यह रिपोर्ट चुनाव से चंद हफ्ते पहले आई है।

25 जुलाई को पाकिस्तान में आम चुनाव होने हैं। ब्रसेल्स की एक गैर मुनाफा संस्थान का कहना है कि डॉलर 62 बिलियन वाले सीपीईसी प्रोजेक्ट की वजह से राजनीतिक परेशानी और विद्वेष पैदा हो सकता है। जिसकी वजह से पाकिस्तान और चीन को आम लोगों की परेशानियों को दूर करने के लिए तुरंत कार्रवाई करनी ही पड़ेगी। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को साफ तौर से सुधार की जरुरत है ताकि वह अपने लोगों की बेहतर सेवा कर सके और बहुत से लोगों का कहना है कि सीपीईसी इसमें उसकी मदद करेगा।

हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में यह प्रोजेक्ट पड़ोसी देश की राजनीतिक चिंता, बड़े पैमाने पर सामाजिक बंटवारा और पाकिस्तान में संघर्षों का स्रोत बन रहा है। वहीं चीन हर उस घटना को दूर करने के लिए तैयार है जो इस प्रोजेक्ट के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं क्योंकि यह उसके बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव () का बेहतरीन उदाहरण है। रिपोर्ट के अनुसार इस कॉरिडोर के कारण लोगों में एंटी-चीन भावनाएं जन्मी हैं क्योंकि प्रोजेक्ट को बनाने के लिए बिना पूर्व योजना बनाए कुछ समुदायों को विस्थापित करना पड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स के लिए बिना किसी स्पष्ट पुनर्वास नीति के समुदायों के विस्थापन की वजह से कॉरिडोर के आस-पास के कुछ इलाकों में चीन-विरोधी भावनाओं में उभार देखा गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि चरमपंथियों ने सीपीईसी से जुड़े होने की वजह से दर्जनों पाकिस्तानियों को मार डाला है।

पाकिस्तान और चीन के नेता बार-बार यह दावा करते आए हैं कि सीपीईसी से पाकिस्तान को आर्थिक फायदा पहुंचेगा लेकिन आईसीजी ने पर संदेह जताया है। आईसीजी को इस बात पर संदेह है कि सीपीईसी में पाकिस्तान को आर्थिक फायदा पहुंचाने की क्षमता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here