सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कोरोना टीकों का पूरा ब्योरा मांगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमारे संविधान में यह परिकल्पित नहीं है कि जब कार्यपालिका की नीतियां नागरिकों के अधिकारों का अतिक्रमण करती हैं, तो अदालतें मूकदर्शक बनी रहें।

0
1484

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कोरोना टीकों की खरीद का पूरा ब्योरा मांगा है। म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) की दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाए गये कदमों के बारे में भी बताने को कहा है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर डाले गये 31 मई के आदेश में पीठ ने कहा, ‘हम केंद्र सरकार को 2 सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हैं।’ इसके अलावा निशुल्क टीकाकरण के संबंध में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से भी 2 सप्ताह के भीतर अपना रुख बताने को कहा गया है।

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एलएन राव और जस्टिस एस रवींद्र भट्ट की विशेष पीठ ने कहा, ‘केंद्र सरकार अपना हलफनामा दाखिल करते समय यह भी सुनिश्चित करे कि टीकाकरण नीति पर उसकी सोच को दर्शाने वाले सभी प्रासंगिक दस्तावेज और फाइल नोटिंग की प्रतियां टीकाकरण नीति के साथ संलग्न हों।’

पीठ ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्रत्येक मुद्दे पर अलग-अलग जवाब दिया जाए। अदालत ने कहा, कोविड-19 के सभी टीकों की खरीद पर ब्योरे में संपूर्ण आंकड़े होने चाहिए। टीकों की खरीद के लिए दिए गये हर ऑर्डर की तारीख, हर तारीख पर कितनी मात्रा में टीकों का ऑर्डर दिया गया और आपूर्ति की प्रस्तावित तारीखों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘हमारे संविधान में यह परिकल्पित नहीं है कि जब कार्यपालिका की नीतियां नागरिकों के अधिकारों का अतिक्रमण करती हैं, तो अदालतें मूकदर्शक बनी रहें। न्यायिक समीक्षा और कार्यपालिका द्वारा तैयार की गई नीतियों के लिए संवैधानिक औचित्य को परखना एक आवश्यक कार्य है, और यह काम न्यायालयों को सौंपा गया है।’ कोर्ट ने यह टिप्पणी केंद्र की इस दलील के संदर्भ में की है कि कोरोना प्रबंधन संबंधी फैसलों में अदालतों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

पीठ ने इस बारे में भी विवरण जमा कराने को कहा है कि कितने प्रतिशत आबादी का टीकाकरण हो चुका है। इसमें पहली खुराक और दूसरी खुराक के संबंध में भी जानकारी देनी होगी। पीठ ने कहा, ‘इस संबंध में भी आंकड़े मुहैया करायें कि ग्रामीण और शहरी आबादी के कितने प्रतिशत हिस्से का टीकाकरण हुआ है।’ मामले में 30 जून को सुनवाई होगी।

देश में एक दिन में कोरोना के 1,32,788 नये मामले सामने आये। वहीं, 2,31,456 लोग इस महामारी से उबरे, जबकि 3207 संक्रमितों की मौत हो गयी। बुधवार सुबह तक के इन सरकारी आंकड़ों के अनुसार उपचाराधीन कोरोना मरीजों की संख्या घटकर 17,93,645 रह गयी है, जो संक्रमण के कुल मामलों का 6.34 फीसदी है। पिछले 24 घंटे में संक्रमण के मामलों में 1,01,875 की कमी आयी। कोरोना मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर सुधरकर 92.48 फीसदी हो गयी है। मृत्यु दर 1.18 फीसदी है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि मंगलवार को 20.19 लाख नमूनों की कोरोना संबंधी जांच की गयी। संक्रमण की दैनिक दर 6.57 फीसदी तक नीचे अा गयी है। संक्रमण की साप्ताहिक दर गिरकर 8.21 फीसदी रह गयी है।

देश में कोरोना के कुल मामले 2.83 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं। इनमें से 2.61 करोड़ से ज्यादा लोग ठीक हो चुके हैं। मृतकों की संख्या 3,35,102 हो गयी है।

मॉडर्ना और फाइजर जैसी दवा कंपनियों की कोरोना वैक्सीन के भारत आने की राह आसान हो गयी है। इनकी वैक्सीन को केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला में जांच और ‘ब्रिजिंग ट्रायल’ से छूट दी जाएगी। भारत के औषधि महानियंत्रक ने कहा, ‘आपात स्थिति में सीमित इस्तेमाल के लिए भारत में कोविड-19 रोधी टीकों को स्वीकृति दिए जाने का फैसला किया गया है। ऐसे टीकों की मंजूरी दी जाती है जो अमेरिकी एफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए, पीएमडीए जापान द्वारा स्वीकृत हैं या डब्ल्यूएचओ के आपात इस्तेमाल सूची में सूचीबद्ध हैं और जिनका इस्तेमाल पहले ही लाखों लोगों पर किया जा चुका है। इन्हें टीके की जांच और ब्रिजिंग ट्रायल से छूट दी जाएगी।’ यह फैसला फाइजर और सिप्ला जैसी कंपनियों की मांग की पृष्ठभूमि में आया है। अभी तक नियम था कि विदेशी कंपनी को भारत में वैक्सीनेशन शुरू करने से पहले ब्रिजिंग ट्रायल करना होगा। इसमें सीमित संख्या में स्थानीय वॉलंटियर्स पर टीके के असर और सुरक्षा को परखा जाता है। औषधि महानियंत्रक ने कहा कि आयातित टीकों की उपलब्धता बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए यह छूट दी गयी है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here