हिरासत में मौत मामले में बर्खास्त आईपीएस संजीव भट्ट को आजीवन कारावास।

बर्खास्त गुजरात-कैडर के IPS अधिकारी संजीव भट्ट को 30 साल पुराने हिरासत में मौत के मामले में जामनगर की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

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बर्खास्त गुजरात-कैडर के आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट (Sanjeev Bhatt) को 30 साल पुराने हिरासत में मौत के मामले में जामनगर की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एक अन्य पुलिस अधिकारी प्रवीण सिंह झाला को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने पिछले सप्ताह भट्ट की याचिका पर 11 अतिरिक्त गवाहों की जांच की मांग पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। संजीव भट्ट इन गवाहों के बयानों को फिर से दर्ज कराना चाहते थे।

आईआईटी मुंबई (IIT Mumbai) से पोस्ट ग्रेजुएट संजीव भट्ट (Sanjeev Bhatt) वर्ष 1988 में भारतीय पुलिस सेवा में आए. उन्होंने आईआईटी मुंबई से एम टेक किया था. उसके बाद संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में बैठे और सफल हुए. आईपीएस बनने के बाद उन्हें गुजरात काडर मिला.

इसके बाद करीब ढाई दशकों तक उन्होंने गुजरात के ज़िलों, पुलिस आयुक्त के कार्यालय और अन्य पुलिस इकाइयों में काम किया. बाद में 2015 में गुजरात सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था. पिछले साल सितंबर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया गया. तब से वो जेल में ही थे. भट्ट को 2011 में बिना अनुमति के ड्यूटी से नदारद रहने और सरकारी गाड़ियों का दुरुपयोग करने के आरोप में निलंबित किया गया था. बाद में अगस्त 2015 में इसी आधार पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.

दरअसल वो गुजरात में 90 के दशक में जहां जहां तैनात रहे, वहां अपने काम करने के तरीकों को लेकर भी चर्चांओं में रहे. 1990 के दशक में वो जामनगर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक थे. उसी समय जाम जोधपुर में दंगा हुआ और पुलिस ने 100 से कहीं ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया.

इसमें कुछ लोगों को पुलिस हिरासत में यातनाएं देने का आरोप लगा. इन्हीं में एक थे प्रभुदास वैष्णवी, जिन्हें काफी खराब हालत में पुलिस ने रिहा किया. फिर अस्पताल में उनकी मौत हो गई. उनके परिवारजनों मे जामनगर अदालत में गुहार लगाई कि पुलिस यातना से उनकी मौत हुई है. उसी मुकदमे में अदालत ने आईपीएस संजीव भट्ट को आजीवन कैद की सजा सुनाई है.

संजीव भट्ट दिसंबर 1999 से सितंबर 2002 तक वे राज्य ख़ुफ़िया ब्यूरो में ख़ुफ़िया उपायुक्त के रूप में कार्यरत थे. गुजरात के आंतरिक सुरक्षा से जुड़े सभी मामले उनके अधीन थे. इनमें सीमा सुरक्षा और तटीय सुरक्षा के अलावा अति विशिष्ट जनों की सुरक्षा भी शामिल थे. वो नोडल ऑफ़िसर भी थे, जो कई केंद्रीय एजेंसियों और सेना के साथ ख़ुफ़िया जानकारियों का आदान-प्रदान भी करते थे.

संजीव भट्ट को 2011 में गुजरात सरकार ने नौकरी से निलंबित कर दिया था. बाद में हटा दिया गया था. कुछ महीने पहले उनकी पत्नी ने ये आरोप लगाया था कि उनके पति की जान खतरे में है. उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट में ये भी लिखा था कि एक तेज गति से आते ट्रक से उन्हें और बेटे को मारने की कोशिश की गई.

संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट ने 2012 में कांग्रेस के टिकट पर अहमदाबाद की मणिनगर विधानसभा सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार मिली थी.

1998 के मादक पदार्थ से जुडे़ एक मामले में भी भट्ट गिरफ्तार हुए थे. तब संजीव भट्ट को पालनपुर में मादक पदार्थों की खेती के एक मामले में छह अन्य लोगों केसाथ अरेस्‍ट किया गया था. 1998 में संजीव भट्ट बनासकांठा के डीसीपी थे.

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