COVID-19: मरीजों की संख्या पहली बार 11 लाख के पार

देश में अब भी 11,08,087 लोग संक्रमित हैं जो संक्रमण के कुल मामलों का 8.29 प्रतिशत है, जबकि स्वस्थ होने वाले लोगों की दर गिरकर 90.44 प्रतिशत रह गयी है।

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भारत में COVID-19 के एक दिन में रिकॉर्ड 1,52,879 नये मामले आने से संक्रमण के मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,33,58,805 हो गयी, जबकि देश में वर्तमान में इस बीमारी का इलाज करा रहे लोगों की संख्या महामारी शुरू होने के बाद से पहली बार 11 लाख के आंकड़े के पार चली गयी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, महामारी से एक दिन में 839 लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या 1,69,275 हो गयी है। 18 अक्तूबर 2020 के बाद से इस बीमारी से एक दिन में जान गंवाने वाले लोगों की यह सर्वाधिक संख्या है। मंत्रालय ने बताया कि संक्रमण के मामलों में लगातार 32वें दिन वृद्धि हुई है। देश में अब भी 11,08,087 लोग संक्रमित हैं जो संक्रमण के कुल मामलों का 8.29 प्रतिशत है, जबकि स्वस्थ होने वाले लोगों की दर गिरकर 90.44 प्रतिशत रह गयी है। देश में सबसे कम 1,35,926 उपचाराधीन मरीज 12 फरवरी को थे और सबसे अधिक 10,17,754 उपचाराधीन मरीज 18 सितंबर 2020 को थे, लेकिन अब उपचाराधीन मरीजों की संख्या इस आंकड़े से भी आगे निकल गयी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देश में ‘टीका उत्सव’ की शुरुआत की और इसे COVID-19 के खिलाफ दूसरी बड़ी लड़ाई की शुरुआत बताया। उन्होंने वायरस से मुकाबला करने के लिए जनता को अनेक सुझाव दिए और व्यक्तिगत एवं सामाजिक स्तर पर स्वच्छता पर जोर देने को कहा। मोदी ने कहा, ‘आज 11 अप्रैल यानी ज्योतिबा फुले जयंती से हम देशवासी ‘टीका उत्सव’ की शुरुआत कर रहे हैं। यह उत्सव 14 अप्रैल यानी बाबा साहेब अंबेडकर जयंती तक चलेगा।’ उन्होंने एक वक्तव्य में कहा कि जनता इन चार बातों का खासतौर पर ध्यान रखे- ‘ईच वन-वैक्सीनेट वन’, ‘ईच वन-ट्रीट वन’, ‘ईच वन-सेव वन’ और ‘माइक्रो कन्टेनमेंट जोन’।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को कहा कि पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण के 10,732 नये मामले आने के साथ ही शहर में हालात बेहद गंभीर हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलें। केजरीवाल ने कहा, ‘कोरोना वायरस की चौथी लहर पिछली लहर से ज्यादा खतरनाक है।’ महज कुछ हफ्तों पहले 16 फरवरी को ही दिल्ली में एक दिन में संक्रमण के 100 से कम मामले आए थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार दिल्ली में लॉकडाउन नहीं लगाना चाहती, लेकिन अगर अस्पतालों में भीड़ बढ़ गई तो लॉकडाउन लगाया जा सकता है।

कोरोना संक्रमण की नयी लहर से देश में आंशिक रूप से ‘लॉकडाउन’ लगाये जाने की आशंकाओं के बीच उद्योग जगत का मानना है कि ऐसा हुआ तो श्रमिकों और माल की आवाजाही प्रभावित होगी। इसका औद्योगिक उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा। उद्योग मंडल सीआईआई की ओर से कंपनियों के सीईओ के बीच कराए गए सर्वे के आधार पर सुझाव सुझाव दिया गया है कि ‘कोविड कर्फ्यू’ और प्रभावित जगहों पर मास्क पहनना और दूरी बनाये रखना आदि अपनाने की रणनीति संक्रमण पर काबू पाने में प्रभावकारी रहेगी। इस बीच व्यापारियों के संगठन कनफेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने मोदी को भेजे एक पत्र में कोरोना पर अंकुश के लिए लॉकडाउन और रात्रि कर्फ्यू की बजाय अन्य विकल्पों का आग्रह किया है।

कांग्रेस ने महामारी से निपटने को लेकर केंद्र पर हमला बोलते हुए रविवार को कहा कि मोदी सरकार के ‘अहंकार और अक्षमता’ के कारण कोरोना वायरस भारत के लोगों और अर्थव्यवस्था पर कहर बरपा रहा है। विपक्षी दल ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण समाज का हर वर्ग परेशानी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘न कोरोना पर काबू, न पर्याप्त टीके, न रोजगार, न किसान-मजदूर की सुनवाई, न लघु, कुटीर एवं मध्यम उपक्रम (एमएसएमई) सुरक्षित, न मध्यमवर्ग संतुष्ट। ‘आम’ खाना तो ठीक था लेकिन कम से कम ‘आम आदमी’ को तो छोड़ देते।’ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक टि्वटर हैंडल से देश में हालात को लेकर भी सरकार की आलोचना की।

उत्तर प्रदेश में COVID-19 के कहर को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को 12वीं तक के सभी स्कूलों के साथ-साथ कोचिंग संस्थान भी आगामी 30 अप्रैल तक बंद रखने के आदेश दिए। राज्य सरकार के एक प्रवक्ता के मुताबिक मुख्यमंत्री ने यहां एक उच्चस्तरीय बैठक में COVID-19 की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि प्रदेश में कक्षा 12 तक के सभी सरकारी तथा गैर सरकारी विद्यालयों को 30 अप्रैल तक बंद रखा जाए। इस अवधि में प्रदेश के कोचिंग सेन्टर भी बंद रहेंगे। उन्होंने कहा कि पूर्व निर्धारित परीक्षाएं निश्चित प्रोटोकॉल का कड़ाई से पालन कर आयोजित की जा सकती हैं। इससे पहले 12वीं तक के सभी स्कूल 15 अप्रैल तक बंद रखने के आदेश दिए गए थे।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने उन सात राज्यों से आने वाले लोगों के लिये COVID-19 की नेगेटिव रिपोर्ट दिखाना अनिवार्य कर दिया है, जहां कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पंजाब, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिये 16 अप्रैल से हिमाचल प्रदेश आने पर आरटी-पीसीआर नेगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य कर दिया गया है। यह रिपोर्ट 72 घंटे से पहले की नहीं होनी चाहिये।

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