Coronavirus- बिगड़ते हालात के बीच कानपुर में अघोषित कर्फ्यू, लखनऊ के कई इलाके सील

कानपुर (Kanpur) में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल है तो लखनऊ (Lucknow) के कई इलाकों को सील कर दिया गया है। राशन की दुकानें भी नहीं खोलने दी जा रही हैं।

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Uttar Pradesh- बिगड़ते हालात के बीच जहां लोगों में तनाव बढ़ता जा रहा है वहीं प्रशासन ने Lockdown का पालन और कड़ाई से कराना शुरू किया है। कानपुर (Kanpur) में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल है तो लखनऊ (Lucknow) के कई इलाकों को सील कर दिया गया है। राशन की दुकानें भी नहीं खोलने दी जा रही हैं। कोशिश है कि सभी सामान होम डिलीवरी ही पहुंचाया जाए। सिर्फ दूध की दुकानें और सब्जी के ठेले वह भी गिनकर कॉलोनियों में भेजे जा रहे हैं। उनको भेजने से पहले सतर्कता बरतने की हिदायत भी दी जा रही है। प्रशासन ने कालाबाजारी और जमाखोरी तो रोकी है लेकिन कई जगह अधिक कीमत वसूलने से नहीं रोक पा रहा है। कानपुर में होम डिलीवरी के लिए दुकानदारों ने तीस रुपये प्रशासन से अतिरिक्त लिए हैं।

संपूर्ण लॉकडाउन (Complete Lockdown) में शहर में अघोषित कर्फ्यू जैसा माहौल है। सुबह चार से 11 बजे तक मिलने वाली छूट भी नहीं दी गई। मुख्य मार्गों और गलियों की भी दुकानें खुलनी नहीं दी गईं। दूध पार्लर और ब्रेड की दुकानों के अलावा सब्जियों के ठेले ही मोहल्लों के अंदर दिखे। जिला प्रशासन ने अन्य वस्तुओं की होम डिलीवरी शुरू कराई। दूध और सब्जी वालों ने इसका फायदा उठा। 30 फीसदी तक महंगे सामान बेचे। वहीं होम डिलीवरी करने करने वालों ने प्रशासन से तय दर के अलावा 30 रुपये होम डिलीवरी का चार्ज वसूला। जमातियों के संपर्क में आए 32 लोग क्वारंटीन किए गए हैं। जिनके नमूने जांच को भेजे गए हैं। पिछले दिनों गजनेर व सैंथा की मिस्जदों में 11 जमाती रुके थे, जिनके संपर्क में रहे लोगों में से यह 32 चिह्नित किए गए हैं। इनके नमूने लखनऊ भेजे गए हैं।

राजधानी में जहां पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ रही है वहीं दूसरे शहरों के मरीजों को भी यहां के अस्पतालों में लाया जा रहा है जिससे लोगों में दहशत है। पुराने लखनऊ के कई मुहल्लों को सील कर दिया गया है। वहां की सभी दुकानें बंद हैं और होम डिलीवरी से ही सामान पहुंचाया जा रहा है। लखनऊ के दो सैंपल की रिपोर्ट मंगलवार को पॉजिटिव निकली। जिनमेें एक ढाई साल के बच्चा भी शामिल है। बच्चा लखनऊ की पहली पॉजिटिव महिला का बेटा है।

निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद मेडिकल कालेज के क्वारंटीन वार्ड में भर्ती 34 लोगों को छुट्टी देकर कृषि विश्वविद्यालय में बनाए गए अस्थायी क्वारंटीन सेंटर भेजा गया। यहां वे 14 दिन रहेंगे। मेडिकल कालेज के आइसोलेशन वार्ड में मात्र 6 लोग भर्ती। इनमें मात्र एक पॉजिटिव है। इटावा में जमातियों के संपर्क में आए 12 लोग निगरानी में। आगरा में मिले कोरोना पॉजिटिव जमाती मिलने के बाद हुई कार्रवाई। आगरा के चार जमातियों का जत्था इटावा तकिया मोहल्ले में 7 से 11 मार्च के बीच रुका था। फिर 14 से 28 मार्च तक औरैया रहे थे। आगरा जाने के बाद एक की कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट मिलने पर मंगलवार को इटावा में हुई कार्रवाई। सभी 12 के सैंपल सैफई पीजीआई भेजे गए हैं।

कोरोना पॉजिटिव आए चार जमातियों के संपर्क में आए 11 हजार परिवारों का सर्वे पूरा हो गया है। खानपुर कस्बे के मिलाकर 11 हजार परिवारों का 266 टीमों से सर्वे कराया है। वहीं फतेहपुर में कोरोना से मिलते जुलते लक्षण पाए जाने के कारण क्वारंटीन किए गए लोगों की संख्या 15 हो गई है। इन सभी को नेवलापुर स्थित स्पोर्टस कॉलेज के हॉस्टल में क्वारंटीन किया गया है। 6 के खून का सैंपल वाराणसी लैब भेजा गया है, रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है।

दूर दराज बने क्वारंटीन सेंटरों से अक्सर निगरानी में रहे लोगों के भागने की खबरें आ रही हैं। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए हमीरपुर जिलाधिकारी ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने नई पहल की है। उन्होंने जिले के आठ बड़े क्वारंटीन सेंटरों में टीवी लगवा दिए हैं। ताकि यहां रह रहे 274 लोग बोर न हों। दरअसल, कुछ दिन पहले जिलाधिकारी ने इन सेंटरों का निरीक्षण किया था। यहां के लोगों ने उनसे मांग की थी कि वे यहां बोर हो रहे हैं। यहां टेलीविजन मिल जाए तो वह समाचार, रामायण आदि देख लेंगे। जिलाधिकारी ने उनकी मांग मानते हुए आठ सेंटरों में एलईडी टीवी लगवा दिए। अब यहां के लोग सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए न्यूज व सीरियल देखकर समय काट रहे हैं।

परसपुर में सर्वे करने गई स्वास्थ्य टीम पर बाहर से आए लोगों ने हमला कर दिया। इस बारे में पीड़ित आशा कार्यकर्ता ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉ. एमपी यादव से शिकायत की। अधीक्षक ने परसपुर कोतवाल को इस बारे में कार्रवाई के लिए जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि परसपुर थाना क्षेत्र के भौरीगंज क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं की टीम बाहर विदेश और गैर प्रदेशों से आये लोगों का सर्वे कर रही थी। जैसे ही टीम अनीस के घर पहुंची तो वहां मौजूद करीब आधा दर्जन लोगों ने आशा कार्यकर्ता और टीम पर हमला बोल दिया। टीम के पास मौजूद सभी अभिलेख फाड़ डाले। इतना ही नहीं पीड़िता आशा कार्यकर्ता के बेटे को जमकर पीटा। किसी तरह वह अपनी जान बचाकर सीएचसी पहुंची।

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