महात्मा गांधी जिंदा होते तो Article 370 हटाए जाने के फैसले के खिलाफ लाल चौक पर मार्च निकालते – दिग्विजय सिंह

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, 'पाकिस्तान में बहुसंख्यकों का सांप्रदायिकरण हुआ है और वहां के हालात आप देख ही रहे हैं.

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने कहा कि अगर महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) जिंदा होते तो वह केंद्र के जम्मू-कश्मीर के फैसले के खिलाफ दिल्ली से श्रीनगर तक मार्च का ऐलान कर देते.

दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने कहा कि पीएम मोदी (PM Modi) और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ‘कश्मीरियत, जम्हूरियत और इन्सानियत’ के जरिए जम्मू-कश्मीर मुद्दे के हल करने के सिद्धांत को खत्म कर दिया. साथ ही उन्होंने कहा, ‘अगर महात्मा गांधी जिंदा होते तो जिस दिन अनुच्छेद 370 हटाया गया, उस दिन वे दिल्ली में लाल किले से श्रीनगर में लाल चौक तक की यात्रा का ऐलान कर देते. दिग्विजय ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में यह बात कही.

दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने यह भी कहा, “भारत एक धार्मिक देश है. महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) इस देश की सनातनी संस्कृति में निहित सत्य, अहिंसा, प्रेम और सद्भाव के संदेशों को अच्छी तरह समझते थे. लेकिन देश के वर्तमान हालात में सनातनी परंपरा वाले धर्म के साथ गांधी, भगवान महावीर और गौतम बुद्ध की अहिंसा की विचारधाराएं भी संकट में हैं, क्योंकि हिंसा को पनपाने वाले लोगों को महिमामंडित किया जा रहा है.”

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के हालिया भाषण का हवाला देते हुए दिग्विजय सिंह ने बुधवार को कहा कि मुस्लिमों के चरमपंथीकरण की तरह हिंदुओं का चरमपंथीकरण भी खतरनाक है. उनके इस बयान पर विवाद उत्पन्न हो गया है. उन्होंने कहा, ‘आपने (संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में) पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का हालिया भाषण सुना होगा जिसमें वह इस्लामोफोबिया और इस्लामी चरमपंथ की बात कर रहे थे. इसके विरोध में “रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज” (हिंदुओं का चरमपंथीकरण) की बात की जा रही है और “रेडिकलाइजेशन ऑफ द हिंदूज” भी उतना ही खतरनाक है, जितना तरनाक “रेडिकलाइजेशन ऑफ द मुस्लिम्स (मुस्लिमों का चरमपंथीकरण) है.’

दिग्विजय ने कहा, ‘पाकिस्तान में बहुसंख्यकों का सांप्रदायिकरण हुआ है और वहां के हालात आप देख ही रहे हैं. इसी तरह अगर भारत में बहुसंख्यकों का सांप्रदायिकरण होगा, तो इसके दुष्परिणामों से हमारे देश को बचाना आसान नहीं होगा.” दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जिया-उल-हक के कार्यकाल में भी पड़ोसी मुल्क में “घोर चरमपंथ” को बढ़ावा दिया गया था.

दिग्विजय ने कहा, “जवाहरलाल नेहरू का कथन था कि अल्पसंख्यकों की सांप्रदायिकता के मुकाबले बहुसंख्यकों की सांप्रदायिकता ज्यादा खतरनाक होती है.” उन्होंने कहा, “सांप्रदायिकता का भूत जब तक बोतल में बंद है, बंद है. लेकिन इसके एक बार बाहर निकलने के बाद इसे दोबारा बोतल में डालना आसान नहीं है.”

उधर, भाजपा ने दिग्विजय के बयान पर कड़ी आपत्ति जतायी है. प्रदेश भाजपा प्रवक्ता उमेश शर्मा ने कहा, “भगोड़े इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक की भाषा बोलते हुए दिग्विजय हिंदुओं के खिलाफ सांप्रदायिक विषवमन कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि इसी मानसिकता के कारण दिग्विजय को मई में संपन्न लोकसभा चुनावों में भोपाल लोकसभा सीट पर भाजपा नेता साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

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