डायबटीज से बचने के लिए कुछ आसान उपाए

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यह एक ऐसा वक़्त है, जहाँ किसी को किसी भी प्रकार की बीमारी का सामना करना पड़ सकता है। हर इंसान के जीवनकाल में एक ऐसा वक़्त जरूर आता है जब उसको कोई रोग हो जाए। वैसे, डायबटीज की बात की जाये तो ये शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाने पर होती है। ये मेटाबोलिक नामक बीमारियों का एक समूह है, जिसमें व्यक्ति के खून में ग्लूकोज का लेवल नॉर्मल से अधिक हो जाता है। ऐसा तब होता है, जब शरीर में इंसुलिन ठीक से न बने या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के लिए ठीक से प्रतिक्रिया न दें। इस रोग से पीड़ित हो जाने पर इसका असर हमारे शरीर के दुसरे हिस्सों पर भी पड़ता हैं, जिसके कारण हमे अन्य रोग भी हो जाते है। जिन मरीजों का ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होता है, वे अक्सर पॉलीयूरिया से परेशान रहते हैं और उन्हें प्यास और भूख ज्यादा लगती है।

डायबटीज के कारण :

गतिहीन जीवनशैली, अधिक मात्रा में जंक फूड, फिजी पेय पदार्थो का सेवन और खाने-पीने की गलत आदतें डायबटीज का कारण बन सकती हैं। घंटों तक लगातार बैठे रहने से भी डायबटीज की संभावना अधिक बढ़ जाती है।
अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय न हो अथवा मोटापे का शिकार हो, उसका वजन सामान्य से अधिक हो तो भी डायबटीज की सम्भावना बढ़ जाती है। ज्यादा वजन इंसुलिन के निर्माण में बाधा पैदा करता है। शरीर में वसा की लोकेशन भी इसे प्रभावित करती है। पेट पर अधिक वसा का जमाव होने से इंसुलिन उत्पादन में बाधा आती है, जिसका परिणाम टाइप 2 डायबिटीज, दिल एवं रक्त वाहिकाओं की बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है। ऐसे में व्यक्ति को अपने बीएमआई पर निगरानी बनाए रखते हुए अपने वजन पर नियन्त्रण रखना चाहिए।

कुछ विशेष जीन डायबटीज की सम्भावना बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में मधुमेह का इतिहास होता है, उनमें इस रोग की सम्भावना अधिक होती है।

हानिकारक या खतरनाक वजह भी डायबटीज का कारण बन सकती हैं:

मोटापा हाइपर लिपिड़ेमिया
उच्च रक्तचाप
ह्रदय सम्बन्धी रोग
पेट निकल आए
कमर या कुल्हो का बढ़ना

मधुमेह से बचाव:

1. अपनी जीवनशैली में बदलाव करें और शारीरिक श्रम करना शुरू करें। जिम नहीं जाना चाहते हैं तो दिन में तीन से चार किलोमीटर तक जरूर पैदल चलें या फिर योग करें।
2. कम कैलोरी वाला भोजन खाएं। भोजन में मीठे को बिलकुल खत्म कर दें। सब्जियां, ताज़े फल, साबुत अनाज, डेयरी उत्पादों और ओमेगा-3 वसा के स्रोतों को अपने भोजन में शामिल कीजिये। इसके अलावा फाइबर का भी सेवन करना चाहिए।
3. अगर, धूम्रपान और शराब का सेवन करते है तो त्याग दे।
4. दिन में तीन समय खाने की बजाय उतने ही खाने को छह या सात बार में खाएं।
5. नियमित रूप से स्वास्थ्य की जांच कराते रहें और शुगर लेवल को रोजाना मॉनीटर करें ताकि वह कभी भी लेवल से ज्यादा नहीं हो। एक बार शुगर बढ़ जाता है तो उसके लेवल को नीचे लाना काफी मुश्किल काम होता है और इस दौरान बढ़ा हुआ शुगर स्तर शरीर के अंगों पर अपना बुरा प्रभाव छोड़ता रहता है।
6. गेहूं और जौ 2-2 किलो की मात्रा में लेकर एक किलो चने के साथ पिसवा लें। इस आटे की बनी चपातियां ही भोजन में खाएं।
7. मधुमेह रोगियों को अपने भोजन में करेला, मेथी, सहजन, पालक, तुरई, शलगम, बैंगन, परवल, लौकी, मूली, फूलगोभी, ब्रौकोली, टमाटर, बंद गोभी और पत्तेदार सब्जियों को शामिल करना चाहिए।
8. फलों में जामुन, नींबू, आंवला, टमाटर, पपीता, खरबूजा, कच्चा अमरूद, संतरा, मौसमी, जायफल, नाशपाती को शामिल करें। आम, केला, सेब, खजूर तथा अंगूर नहीं खाना चाहिए क्योंकि इनमें शुगर ज्यादा होता है।
9. खाने में बादाम, लहसुन, प्याज, अंकुरित दालें, अंकुरित छिलके वाला चना, सत्तू और बाजरा आदि शामिल करें तथा आलू, चावल और मक्खन का खाने में न के बराबर उपयोग करें।
10.मेथी दाना रात को भिगो कर रख दें। सुबह के समय प्रतिदिन इसका सेवन खाली पेट फ़ायदेमंद हैं।

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