करुणानिधि के बेटों के बीच है विरासत की लड़ाई

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तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। चेन्नई के कावेरी अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली। करुणानिधि ने तीन शादियां कीं थीं। उनकी पहली पत्नी पद्मावती, दूसरी पत्नी दयालु अम्माल और तीसरी पत्नी रजति अम्माल हैं। पहली पद्मावती का निधन हो चुका है, जबकि दयालु और रजती जीवित हैं। उनके 4 बेटे और 2 बेटियां हैं। एमके मुथू पद्मावती के बेटे हैं। जबकि एमके अलागिरी, एमके स्टालिन, एमके तमिलरासू और बेटी सेल्वी दयालु अम्मल की संतानें हैं। करुणानिधि की तीसरी पत्नी रजति अम्माल की बेटी कनिमोझी हैं।

करुणानिधि की राजनीतिक विरासत को लेकर उनके दो बेटे एमके अलागिरी और एमके स्टालिन में संघर्ष काफी समय तक चला। इस संघर्ष में छोटे बेटे स्टालिन हमेशा भारी पड़े। उनके प्रशंसकों की फेहरिस्त भी बड़ी है वहीं वे अलागिरी की तुलना में ज्यादा पढ़े लिखे और कूटनीति में माहिर भी हैं। हालांकि करुणानिधि ने कई मौकों पर सार्वजनिक मंचों से संकेत दे दिया था कि उनके बाद उनकी विरासत को एमके स्टालिन ही संभालेंगे। स्टालिन का चेन्नई क्षेत्र में ज्यादा प्रभाव है तो अलागिरी का मदुरै क्षेत्र में। दोनों भाइयों की लड़ाई साल 2014 में चरम पर थी। जिसके बाद अलागिरी को डीएमके प्रमुख ने साल 2014 में पार्टी से निकाल दिया था। करुणानिधि के पहले बेटे मुथु राजनीति में ज्यादा रूचि नहीं रखते। वहीं उनके चौथे बेटे एमके तमिलरासू लो प्रोफाइ व्यक्ति हैं।

करुणानिधि कई मौकों पर आलोचना के भी शिकार हुए। खासतौर पर उनके ऊपर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगे। सबसे पहले अपने बेटे मुत्थु को फिल्मों में हीरो के तौर पर उतारा हालांकि उनकी फिल्मों को ज्यादा सफलता नहीं मिली। लेकिन उनके इस कदम से एमजी रामचंद्रन के साथ उनके रिश्तों में दरार बढ़ी। ऐसा कहा जाता है कि यहीं से एमजीआर और करुणा की राहें अलग अलग हुईं और एमजीआर ने एआईडीएमके नामक नई पार्टी का गठन किया। इसी तरह बेटों को राजनीति में बढ़ावा देने के कारण वाइको जैसे तेजतर्रार नेता को भी राजनीति में किनारे लगाने का आरोप उनके ऊपर लगा। बाद में उपेक्षा के कारण वाइको डीएमके छोड़कर चले गए। यहां तक की करुणा पर अपने बेटे के लिए मारन बंधुओ की उपेक्षा के भी आरोप लगे।

निरंजन कुमार

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