उत्तराखंड बाढ़ : टनल में फंसे मजदूरों को निकालने की कोशिशें जारी

हादसे के वक्त 13.2 मेगावाट की ऋषिगंगा परियोजना और एनटीपीसी की 480 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड परियोजना में लगभग 176 मजदूर काम कर रहे थे।

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उत्तराखंड के चमोली जिले में रविवार को नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूट जाने के कारण ऋषिगंगा घाटी में अचानक विकराल बाढ़ आ गयी। इससे वहां 2 पनबिजली परियोजनाओं में काम कर रहे 7 लोगों की मौत हो गयी और 125 से ज्यादा मजदूर लापता हैं। एक पनबिजली परियोजना की सुरंग में फंसे 16 मजदूरों को आईटीबीपी ने बचा लिया है, जबकि एक अन्य सुरंग में फंसे लोगों को बचाने के प्रयास देर रात तक जारी रहे।

प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शाम को देहरादून में संवाददाताओं को बताया कि अभी तक 7 व्यक्तियों के शव बरामद हुए हैं। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस के जवान बचाव व राहत कार्य में जुटे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी घोषणा की।

हादसे के वक्त 13.2 मेगावाट की ऋषिगंगा परियोजना और एनटीपीसी की 480 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड परियोजना में लगभग 176 मजदूर काम कर रहे थे। उनमें से कुछ लोग भाग कर बाहर आ गये। ऋषिगंगा परियोजना में ड्यूटी कर रहे 2 पुलिसकर्मी भी लापता हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘एक अनुमान के अनुसार लापता लोग सवा सौ के आसपास या इससे ज्यादा भी हो सकते हैं। कंपनी के लोग भी ज्यादा बता पाने की स्थिति में नहीं हैं।’

बाढ़ से दोनों पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है। रविवार शाम दिल्ली में हुई एक आपात बैठक में राष्ट्रीय संकट प्रबंधन समिति (एनसीएमसी) को जानकारी दी गयी कि ऋषिगंगा नदी पर 13.2 मेगावाट की पनबिजली परियोजना बह गयी है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और लोगों की सुरक्षा की कामना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मैं उत्तराखंड में दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा हूं। भारत उत्तराखंड के साथ खड़ा है, सभी की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता है।’ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से बात की और उन्हें हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। शाह ने कई ट्वीट करके कहा कि एनडीआरएफ टीमों को तैनात किया गया है, दिल्ली से और टीमें भेजी गयी हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि सेना के 4 कॉलम और 2 मेडिकल टीमें तैनात की गयी हैं। सेना के एक कॉलम में 30-40 सैनिक होते हैं। वायुसेना के सी-130 और एएन32 विमानों की मदद से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के कर्मियों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाया गया।

रास्ते में आयी हर चीज बह गयी

नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क से निकलने वाली ऋषिगंगा के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में आई बाढ़ के कारण ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे गढ़वाल क्षेत्र के कई हिस्सों में दहशत का माहौल पैदा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह अचानक जोर-जोर की आवाजों के साथ धौली गंगा का जलस्तर बढ़ता दिखा। पानी तूफान की शक्ल में आगे बढ़ रहा था और अपने रास्ते में आने वाली सभी चीजों को अपने साथ बहा कर ले गया। रैणी में एक मोटर मार्ग और 4 झूला पुल बाढ़ की चपेट में आकर बह गये। सात गांवों का संपर्क टूट गया है, जहां राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए किया गया।

शाम तक कम हुआ पानी

बाढ़ के बाद समूचे गढ़वाल क्षेत्र में अलकनंदा और गंगा नदियों के आसपास के इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया गया। हालांकि, शाम होते-होते बाढ़ग्रस्त ऋषिगंगा नदी में पानी में भारी कमी आई, जिससे चेतावनी वाली स्थिति समाप्त हो गयी। डीजीपी अशोक कुमार ने कहा कि अब खतरे की स्थिति नहीं है और अलकनंदा में जलस्तर सामान्य है।

केदारनाथ आपदा की भयावह यादें हुई ताजा

देहरादून (एजेंसी) :
चमोली जिले में रविवार को हिमखंड टूटने से नदियों में आई विकराल बाढ़ ने 8 साल पहले की केदारनाथ आपदा की भयावह यादें फिर से ताजा कर दीं। गनीमत यह रही कि वर्ष 2013 की तरह इस बार बारिश नहीं थी और आसमान पूरी तरह साफ था, जिससे हेलीकॉप्टर उड़ाने में मौसम बाधा नहीं बना। एसडीआरएफ की टीमें जल्द ही प्रभावित स्थान पर पहुंच गईं और बचाव अभियान तुरंत शुरू कर दिया गया। प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि पुलिस और एसडीआरएफ के जवान मुस्तैदी से लगे हैं, पूरा प्रयास यह है कि लापता लोगों को ढूंढ़ा जाए।

3 दशक में 4 बड़ी आपदाएं

1991 उत्तरकाशी भूकंप :
अविभाजित उत्तर प्रदेश में अक्तूबर 1991 में आया था 6.8 तीव्रता का भूकंप, 768 लोगों की जान गयी, हजारों घर तबाह हो गये थे।

1998 माल्पा भूस्खलन :
पिथौरागढ़ जिले का गांव माल्पा भूस्खलन के चलते बर्बाद हुआ, 55 कैलास मानसरोवर श्रद्धालुओं समेत 255 लोगों की मोत हुई।

1999 चमोली भूकंप :
चमोली जिले में 6.8 तीव्रता के भूकंप ने 100 से अधिक लोगों की जान ले ली थी। रुद्रप्रयाग में भी नुकसान हुआ था।

2013 केदारनाथ आपदा :
जून में एक ही दिन में बादल फटने की कई घटनाओं के चलते भारी बाढ़ और भूस्खलन की घटनाएं हुईं थीं। राज्य सरकार के आंकलन के मुताबिक 5700 से अधिक लोगों की जान गयी। 3 लाख से अधिक लोग फंस गये थे।

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