जानिए केजरीवाल ने गडकरी से माफी क्यों मांगी

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आम आदमी पार्टी इन दिनों माफीनामे के दौर से गुजर रही है. दिल्ली से लेकर पंजाब तक चुनावी रैलियों में सख्ती से विरोधियों पर निशाना साधने वाले अरविंद केजरीवाल इन दिनों नरम पड़ते नज़र आ रहे हैं. राजनीति में आने के बाद आम आदमी पार्टी के कई नेता मानहानि के मुकदमों से जूझ रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम मजीठिया, मौजूदा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और कपिल सिब्बल से लिखित माफी मांगी है. इस फैसले से पार्टी के अंदरूनी नेताओं से लेकर बाहरी लोग भी हैरान हैं. पिछले साल भी अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी के पूर्व सांसद अवतार सिंह भड़ाना से माफी मांगी थी. उन्होंने यहां तक कहा था कि अपने सहयोगी के बहकावे में आकर गलत आरोप लगाए.

बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने आखिरकार अपनी शर्तों को मनवाने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के माफीनामे को स्वीकार कर लिया है. अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी नेता नितिन गडकरी को 16 मार्च को पत्र लिखा था. जिसमें उन्होंने लिखा है, ‘हम दोनों अलग-अलग दलों में हैं. मैंने आपके बारे में बिना जांचे कुछ आरोप लगाए, जिससे आपको दुख हुआ होगा. इसलिए आपने मेरे खिलाफ मानहानि का केस दायर किया. मुझे आपसे निजी तौर पर कोई दिक्कत नहीं है, इसलिए मैं आपसे माफी मांगता हूं.’

आ रही खबरों के मुताबिक सूत्रों कहना है कि दोनों नेताओं ने पुरानी बातें भुला दी हैं और फाइनल माफीनामा आने टाइम लगा. जैसे ही दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अपने बयान को लेकर नितिन गडकरी से बात की और समझौता हुआ वैसे ही कोर्ट में एक ज्वाइंट एपिलकेशन फाइल कर दी गई. साल 2014 में केजरीवाल ने गडकरी को देश के सबसे भ्रष्टाचारी नेताओं में से एक बताया था. इसका जवाब देते हुए बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया था.

क्या ये हैं माफीनामे की असल वजह?

1. संगठन की चिंता

यह सीएम केजरीवाल की खास रणनीति हो सकती है. नेतृत्व ने फैसला लिया है कि सभी नेताओं पर चल रहे मानहानि के मुकदमोंको जैसे-तैसे खत्म किया जाए. इसके लिए माफी भी मांगनी पड़े, तो भी वे तैयार हैं. मानहानि के मुकदमों की वजह से ‘आप’ नेता पार्टी के विस्तार पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. कई राज्यों में संगठन बढ़ाना है. अगले साल 2019 में लोकसभा के चुनाव होने हैं.

2. खतरे में पार्टी का भविष्य

मानहानि के मामलों में पर्याप्त सबूत न पेश कर पाने की स्थिति में या तो भारी भरकम हर्जाना देना पड़ेगा या जेल जाना होगा. आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल को ही देश भर में चेहरा बनाया है और ऐसे में जब मानहानि केस की मुसीबत में खुद अरविंद केजरीवाल फंस जाएं तो लगातार टूट रही पार्टी का भविष्य खतरे में पड़ सकता है.

3. फंड की कमी

एक सवाल यह भी उठता है कि क्या ‘आप’ को चंदा आना भी कम हो चुका है या पार्टी के पास मानहानि के मुकदमें लड़ने के लिए पर्याप्त रकम नहीं है. कोर्ट केस में वकील अपने मनमुताबिक फीस लेते हैं. तारीखों की वजह से समय के साथ पैसा भी नुकसान हो रहा है. जाहिर है 2019 के चुनाव प्रचार में धन की जरूरत होगी.

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