बॉर्डर पर शहीद हुए जवानों के बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाएगी सरकार

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NIRMLA SITARAMAN

भारत सरकार ने सेना के जवानों के द्वारा दी गई शहादत को लेकर शहीदों के परिवारों और उनके बच्चों के लिए बड़ा फैंसला लिया है। विभिन्न अभियानों में शारीरिक रूप से अक्षम हुए जवानों तथा अधिकारियों के बच्चों की स्कूल तथा कॉलेज की फीस के भुगतान पर लगाई सीमा को हटा दिया है और अब उन्हें पहले की तरह फीस नहीं देनी होगी। बता दें सरकार ने सातवें वेतन आयोग को लागू करते हुए शहीदों के बच्चों की फीस के लिए भुगतान सीमा दस हजार रूपए प्रति माह निर्धारित की थी। दस हजार रूपए से अधिक की फीस का भुगतान इन छात्रों को खुद करना था जिसकी बाद में बहुत आलोचना हुई थी लेकिन सरकार ने इस मसले पर जल्द निर्णय लेने का आश्वाशन दिया था।

रक्षा मंत्रालय ने इस मामले में याचिका वित् मंत्रालय में दी थी जिसकी मंजूरी मिलने पर शहीदों के बच्चों की फीस के भुगतान की सीमा हटा ली गई है। इससे विभिन्न संस्थानों में पढ रहे शहीदों के तीन हजार से भी अधिक बच्चों को फायदा मिलेगा। सूत्रों के हवाले से मिली सुचना के अनुसार भारत सरकार ने इस सीमा को बनाए रखने के लिए वर्ष केवल 4 करोड रूपये की राशि की बचत हो रही थी इसे ध्यान में रखते हुए सीमा निर्धारित करने के फैसले को वापस ले लिया गया।

अपने बयान में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस सुविधा को मुख्यता लाभ केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूलों कालेजों तथा संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को ही मिलेगा। शहीदों के बच्चों की फीस माफ करने का निर्णय 1971 की लड़ाई के बाद 1972 में लिया गया था। बाद में 1990 तथा 2003 के आदेशों के आधार पर इसका दायरा बढाकर अलग अलग अभियानों में शहीद होने वाले तथा जंग के मैदान में शारीरिक रूप से अक्षम जवानों के बच्चों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा

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