भाजपा नेता का नया ज्ञान – सलमान-रहमान की तरह बताया ‘हनुमान’ को मुसलमान

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पवनपुत्र, केसरीनंदन, महावीर, अंजनीपुत्र, बजरंग बली आदि नामों से जाने जाने वाले रामभक्त हनुमान की जाति को लेकर बयानबाजी कुछ और आगे बढ़ गई है। इस बार उनका धर्म भी बदला गया है। अब सपा से भाजपा में आए एमएलसी बुक्कल नवाब ने बजरंग बली को मुसलमान बता दिया है। हालांकि हनुमान जी का अस्तित्व जिस त्रेता युग में था, उस समय इस्लाम का नामोनिशान नहीं था। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा कथित तौर पर बजरंगबली को दलित जाति का बताने को लेकर सियासी हलचल मची थी। अब बुक्कल नवाब का बयान चर्चा में है। इस बाबत उनके तर्क भी हैं। जैसे रहमान, सुलतान, सलमान, जीशान और इमरान मुसलमानों के नाम हैं। उसी तरह हनुमान नाम मुसलमान का है।

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान की चुनावी सभा में भक्त हनुमान को दलित बताया था। योगी के इस बयान के बाद सियासी सरगर्मी बढ़ गई थी। इसके बाद से हनुमान जी की जाति बताने की होड़ भाजपा से जुड़े लोगों में लग गई। केंद्रीय मंत्री सत्यपाल चौधरी ने हनुमानजी आर्य बताया था। यूपी अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष नन्द किशोर ने हनुमान को जनजातीय समाज का बताया था। अब बुक्कल नवाब ने उनका धर्म बदलकर मुसलमान करार दिया है।

एमएलसी बुक्कल नवाब ने कहा कि बजरंगबली मुसलमान इसलिए थे कि मुसलमानों में रहमान, फुरखान, जीशान, अरमान, रेहान, जितने भी नाम रखे जाते हैं। अतः वह बजरंगबली को मुसलमान मानते हैं। बोले, बजरंग बली की हमारे परिवार और पूर्वजों पर बहुत कृपा रही है। पूर्वजों ने उनके मंदिर भी बनवाए हैं। बजरंग बली से हम लोगों का खास नाता है। इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए क्योंकि मेरा मानना है कि भगवान सभी धर्मों के हैं और उनको एक सांचे में बांधकर नहीं रखा जा सकता। ध्यान रहे कि बुक्कल नवाब समाजवादी पार्टी की ओर से विधान परिषद पहुंचे थे लेकिन उन्होंने इस्तीफा देकर भाजपा का झंडा थाम लिया। इसके बाद भाजपा ने बुक्कल को एलएलसी बनाया।

हनुमानजी पर आपत्तिजनक बयान पर धर्मगुरुओं ने भाजपा नेता बुक्कल नवाब की निंदा की। भाजपा के एमएलसी नवाब बुक्कल ने हनुमानजी को मुसलमान करार दिया है। नवाब बुक्कल के इस बयान पर फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि कोई बात कहने से पहले उस बारे में अच्छी जानकारी होनी चाहिए। बिना किसी बुनियाद के किसी के मजहब या अकीदे पर मनगढ़ंत राय देना गलत और आपसी भाईचारे व देश के खिलाफ है।

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