लोकसभा में अनुच्छेद 370 पर घमासान, तीखी बहस जारी।

कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने नियमों का उल्लंघन करते हुए रातोंरात एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को अनुच्छेद 370 (Article 370) को हटाने वाले विधेयक को लोकसभा में पेश किया। जिसपर तीखी बहस जारी है। कांग्रेस (Congress) ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने नियमों का उल्लंघन करते हुए रातोंरात एक राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया है। जिसपर शाह (Amit Shah) ने उसने पूछा कि वह बताएं कौन का नियम तोड़ा गया है। वहीं श्रीनगर में इस समय धारा 144 लागू है। जरूरी काम के लिए लोग बाहर निकल रहे हैं और क्षेत्र में शांति के साथ सामान्य स्थिति बनी हुई है।

विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद किशोर शर्मा (Kishore Sharma) ने कहा कि नेहरू के कारण इस धारा का कलंक हमारे ऊपर लगा है। सरदार पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने तब भी इसका विरोध किया था। इस धारा ने कश्मीर को भारत से दूर करने का कार्य किया है। इसके कारण वहां भ्रष्टाचार बढ़ता चला गया क्योंकि केंद्र की एजेंसियां वहां जांच नहीं कर सकती है। मोदी सरकार से दिया गया गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण भी वहां लागू नहीं होता है। आतंकवाद भी अनुच्छेद 370 की ही देन है। इसके कारण हमारे जवानों और लोगों को जान गंवानी पड़ती है।

DMK सांसद दयानिधि मारन ने लोकसभा में अनुच्छेद 370 पर चर्चा के दौरान कहा, ‘इस सदन के सदस्य मिस्टर फारूक अब्दुल्ला अनुपस्थित हैं। उन्हें गिरफ्तार किया गया है। हमें इसकी भनक नहीं थी। आपको एक अध्यक्ष के रूप में सदस्यों की सुरक्षा करनी चाहिए। आपको तटस्थ होना चाहिए।’

मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने कहा, ‘पंडित नेहरू ने कदम उठाकर उसे भारत का अभिन्न अंग बनाया। उस विलय में कुछ वादे किए गए थे। 1952 में भारत के संविधान में धारा 370 को शामिल किया गया। भारतीय संविधान में केवल अनुच्छेद 370 ही नहीं है। इसमें अनुच्छेद 371 ए से आई भी है। यह नागालैंड, असम, मणिपुर, आंध्र प्रदेश, सिक्किम आदि को विशेष अधिकार प्रदान करते हैं। आज जब आप अनुच्छेद 370 को समाप्त कर रहे हैं, तो आप इन राज्यों को क्या संदेश भेज रहे हैं? आप कल अनुच्छेद 371 को निरस्त कर सकते हैं? उत्तर पूर्वी राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करके और संसद में उनकी विधानसभाओं के अधिकारों का उपयोग करके, आप अनुच्छेद 371 को भी रद्द कर सकते हैं? आप देश में किस तरह की संवैधानिक मिसाल कायम कर रहे हैं? यदि आज जूनागढ़, हैदराबाद और जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा हैं तो उसकी वजह पंडित नेहरू हैं।’

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि आजादी के बाद दो मुल्क बने और एक भारत और दूसरा पाकिस्तान। इसके बाद 562 रियासतें बनीं जिन्हें कहीं भी जाने की आजादी थी। तीन रियासतों को लेकर संवेदनशील स्थिति बनी जिसमें जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद और जूनागढ़ शामिल था। महात्मा गांधी ने जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह से कश्मीर का भारत में विलय करने की अपील की थी लेकिन राजा असमंजस में थे। पाकिस्तान ने जब कश्मीर पर हमला कर दिया और वह श्रीनगर की तरफ बढ़ने लगे तो राजा के पास पाकिस्तान में विलय करने या भारत के साथ जाने का विकल्प था। राजा ने पाकिस्तानी घुसपैठियों का सामना किया और भारत से मदद मांगी। इसके बाद राजा ने नेहरू की अगुवाई में भारत से संधि पर हस्ताक्षर किए और फौज को कश्मीर बचाने के लिए भेजा गया।

गृहमंत्री ने पुनर्गठन बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि हम जम्मू-कश्मीर के लिए दो केंद्र शासित प्रदेश लेकर आ रहे हैं जिसमें लद्दाख और जम्मू कश्मीर होंगे। जम्मू-कश्मीर मे विधानसभा होगी और वहां चुना हुआ मुख्यमंत्री काम करेगा। मैं हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं आप इसपर चर्चा कीजिए। हम शांत माहौल में चर्चा चाहते हैं क्योंकि घाटी सहित देश और दुनिया हमें देश रही है।

अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि विपक्ष जो पूछेगा उसका हम जवाब देंगे लेकिन मुझे अपनी बात रखने दीजिए। धारा 373 (3) का प्रयोग करके राष्ट्रपति इसे सीज कर सकते हैं लेकिन राष्ट्रपति तभी ये अधिसूचना निकाल सकते हैं जब जम्मू-कश्मीर संविधान सभा की अनुशंसा हो। कांग्रेस इस प्रावधान का उपयोग 1952 और 1955 में कर चुकी है। महाराजा के लिए पहले सदर-ए-रियासत और फिर 1965 में इसे गवर्नर किया गया। जम्मू कश्मीर में विधानसभा नहीं चल रही है और ऐसे में इसी संसद में जम्मू-कश्मीर के सारे अधिकार निहित हैं।

गृह मंत्री ने कहा कि आज सदन जिसपर विचार कर रहा है वह प्रस्ताव और विधेयक भारत के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। राष्ट्रपति ने कल एक संवैधानिक आदेश जारी किया है जिसके तहत भारत के संविधान के सारे अनुबंध जम्मू-कश्मीर में लागू होंगे। साथ ही कश्मीर को मिलने वाले विशेष अधिकार भी नहीं रहेंगे और मैं पुनर्गठन बिल लेकर आया हूं। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। इसपर कोई कानूनी या संवैधानिक विवाद नहीं है। जम्मू कश्मीर के अनुच्छेद 370 (सी) में इस बात का जिक्र है। संसद कश्मीर पर कानून बनाने के लिए पूरी तरह से सक्षम है। हम राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संकल्प लेकर आए हैं।

कांग्रेस को जवाब देते हुए शाह ने कहा, ‘जम्मू और कश्मीर भारतीय संघ का अभिन्न हिस्सा है। कश्मीर की सीमा में पीओके भी आता है। जान दे देंगे इसके लिए। मैंने सदन में जब जब जम्मू और कश्मीर राज्य बोला है तब-तब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और अकसाई चीन दोनों इसका हिस्सा हैं। ये बात है। संसद को जम्मू-कश्मीर पर कानून बनाने का अधिकार है। कोई हमें कानून बनाने से नहीं रोक सकता। दोनों हिल काउंसिल अस्तित्व में रहेगें। हिल काउंसिल के सदस्यों को मंत्री का दर्जा मिलेगा।’

चौधरी ने कहा, ‘आपने कहा यह आंतरिक मामला है। लेकिन इसकी निगरानी यूएन द्वारा 1948 से की जा रही है। क्या यह आंतरिक मामला है?हमने शिमला समझौते और लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किए। यह आंतरिक मामला या द्विपक्षीय क्या है? एस जयशंकर ने कुछ दिनों पहले माइक पॉम्पियो से कहा था कि कश्मीर द्वीपक्षीय मामला है। इसलिए इसमें हस्तक्षेप न करें। क्या जम्मू-कश्मीर अब भी आंतरिक मसला है? हम जानना चाहते हैं। पूरी कांग्रेस पार्टी आपके द्वारा प्रबुद्ध होना चाहती है।’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को रद्द करने का लोकसभा में संकल्प पेश किया। जिसपर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि आप पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) के बारे में सोच रहे हैं, आपने सभी नियमों का उल्लंघन किया और एक राज्य को रातोंरात केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया।’

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल अनुच्छेद 370 हटने के बाद राज्य के हालातों का जायजा लेने के लिए सोमवार रात को ही कश्मीर पहुंच चुके हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद यहां किसी तरह का कोई प्रदर्शन न हो और दिक्कतें न आए इसके लिए सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। नए कानून के तहत अब दिल्ली की तरह जम्मू-कश्मीर की पुलिस केंद्र सरकार के अंतर्गत काम करेगी। घाटी में काफी संख्या में सुरक्षाबल तैनात हैं जिन्हें अगले आदेश तक वहीं रहने का आदेश दिया गया है।

धारा 370 के हटने के बाद पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और नेशनल कॉफ्रेंस विधेयक का विरोध कर रही है। यही वजह है कि उन्हें फिलहाल हिरासत में रखा गया है। उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती को सोमवार देर रात को हिरासत में लेकर गेस्ट हाउस में रखा गया है। घाटी में सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा चाक-चौबंद कर दी गई है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

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