देश भर में जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमित शाह ने बुलाई आपात बैठक

देश भर में जारी प्रदर्शनों के बीच अमित शाह ने अधिकारियों की बैठक बुलाई है. सूत्रों ने बताया कि लखनऊ में हुई हिंसा को लेकर सरकार बहुत चिंतित है.

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नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Bill) को लेकर देश भर में जारी प्रदर्शनों के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने अधिकारियों की बैठक बुलाई है. सूत्रों ने बताया कि लखनऊ (Lucknow) में हुई हिंसा को लेकर सरकार बहुत चिंतित है. अधिकारियों ने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी और केंद्रीय गृह सचिव अजय कुमार भल्ला के बैठक में शामिल होने की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि बैठक में गृह मंत्रालय द्वारा देश की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की जाएगी. बता दें कि नागरिकता संशोधन (CAA) कानून को लेकर देश के तमाम हिस्सों में जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच लखनऊ से भी हिंसा की खबरें सामने आई हैं.

मालूम हो कि लखनऊ में कई जगह आगजनी और तोड़फोड़ हुई है. पुलिस की गाड़ी समेत कई गाड़ियों में आग लगा दी गई है. भीड़ को काबू करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया है. प्रदर्शनकारियों ने परिवर्तन चौक पर NDTV की ओबी वैन को भी नुकसाना पहुंचाया है. ओबी के टेक्निशियन को भी चोट आई है. समाचार एजेंसी ANI के मुताबिक लखनऊ के हजरतगंज में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन काफी हिंसक हो गया है. प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया. इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया. प्रदर्शनकारियों ने पुराने लखनऊ में पुलिस चौकी में भी आग लगाई दी और ठाकुरगंज इलाके में कुछ वाहनों को भी फूंका.

बता दें कि नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) लोकसभा में 9 दिसंबर, 2019 को पास होने के बाद 11 दिसंबर, 2019 को राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने पेश किया जहां एक लंबी बहस के बाद यह बिल पास हो गया. इस बिल के पास होने के बाद यह नागरिकता संशोधन कानून बन गया. इस कानून के विरोध में असम, बंगाल समेत देश के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए. 15 दिसंबर को इस कानून के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा हुई. इस प्रदर्शन में कई छात्रों समेत पुलिस के कुछ जवान भी घायल हो गए. जामिया की घटना के अगले दिन 16 दिसंबर, 2019 को नागरिकता संशोधन कानून को लेकर सीलमपुर में जमकर प्रदर्शन हुए. इस प्रदर्शन के दौरान पथराव की घटना हुई. स्‍कूली बस पर भी पत्‍थर फेंके गए. इस प्रदर्शन में कुछ प्रदर्शनकारियों समेत पुलिस वाले भी घायल हुए. एक पुलिस चौकी को प्रदर्शनकारियों ने जला दिया. पुलिस ने हालात को काबू में किया और वहां चौकसी बढ़ा दी गई.

17 दिसंबर को देश के दूसरे हिस्‍सों में भी प्रदर्शन शुरू हो गए. जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों के समर्थन में देश के कई यूनिवर्सिटी में भी प्रदर्शन हुए. कई यूनिवर्सिटी को 5 जनवरी, 2020 के लिए बंद कर दिया गया है और छात्रों से हॉस्‍टल खाली करा लिया गया. इस कानून के विरोध में दिल्‍ली के लाल किला पर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. उधर जमा मस्जिद के इमाम ने कहा है कि इस कानून से देश के मुसलमानों को कोई लेना देना नहीं है. उन्‍हें नहीं डरना चाहिए. विरोध प्रदर्शन को देखते हुए 19 दिसंबर, 2019 को देश के कई हिस्‍सों में धारा 144 लागू कर दी गई है.

उधर गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया है कि चाहे जितना भी विरोध हो इस कानून को वापस नहीं लिया जाएगा. उनका कहना है कि यह कानून देश की जनता के लिए नहीं है, यह कानून उन अल्‍पसंख्‍यक लोगों के लिए है जो अफगानिस्‍तान, बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान में धार्मिक रूप से प्रताडि़त होकर भारत में शणार्थी के रूप में आए हैं.

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