HARERA ने बिल्डर पर लगाया 3 करोड़ का जुर्माना, 40 अलॉटियों से मिली थी शिकायत

40 अलॉटियों से मिली शिकायत के बाद HARERA ने प्रोजक्ट में देरी पर बिल्डर अथवा प्रोमोटर के खिलाफ यह कार्रवाई की है।

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हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HARERA) ने मैसर्स साना रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड (SANA Realtors Pvt Ltd) पर तीन करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। 40 अलॉटियों से मिली शिकायत के बाद HARERA ने प्रोजक्ट में देरी पर बिल्डर अथवा प्रोमोटर के खिलाफ यह कार्रवाई की है। इसके अलावा स्वीकृत बिल्डिंग प्लान में संशोधन के बगैर विभिन्न इकाइयों के क्षेत्रफल में बदलाव करने के मामले में फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त करने तथा प्रोमोटर को अथॉरिटी के समक्ष सभी दस्तावेजों के साथ पेश होने के लिए वारंट जारी किया है।

मंगलवार को हुई सुनवाई में डॉ. के.के. खंडेलवाल (Dr K K Khandelwal) की अध्यक्षता में HARERA गुरुग्राम की बेंच ने यह फैसला सुनाया है। इस बेंच के दोनों सदस्य समीर कुमार तथा सुभाष चंद कुश भी सुनवाई के दौरान मौजूद रहे।

डॉ. खंडेलवाल (Dr K K Khandelwal) ने बताया कि सेक्टर-67 में बिल्डर कंपनी की ओर से प्रेसिजन सोहो टॉवर, नामक प्रोजेक्ट विकसित किए जा रहे हैं। मैसर्स साना रीयल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की सुनवाई के दौरान HARERA गुरुग्राम के सामने आया कि प्रोमोटर और 350 अलाटियों के बीच बिल्डर का एग्रीमेंट सन 2010 और 2011 में हुए थे। उसके अनुसार पजेशन 2013 और 2014 में दिया जाना था, लेकिन अभी तक प्रोमोटर ने वैध रूप से पोजेशन नहीं दिया है।

HARERA चेयरमैन ने कहा कि प्रोमोटर का यह फर्ज था कि ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (Occupation Certificate) मिलने की तिथि से वह अलॉटियों को तीन महीने की अवधि में पजेशन दे। ऐसा नहीं करने पर उसने रेरा एक्ट की धारा 17 (1) का उल्लंघन किया है।

अथॉरिटी की बेंच ने रेरा एक्ट की धारा 17(1) के उल्लंघन के लिए दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी। धारा 61 के तहत प्रोमोटर के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय भी लिया है। RERA एक्ट की धारा 61 के तहत प्रोमोटर पर रियल एस्टेट प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत का पांच प्रतिशत तक जुर्माना लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा अथॉरिटी ने प्रोमोटर द्वारा सुपर एरिया में वृद्धि के नाम पर मांगी गई राशि वापस लौटाने के आदेश दिए हैं। सुपर एरिया में वृद्धि का कोई औचित्य नहीं है। इसके लिए एक फॉरेंसिक ऑडिटर भी नियुक्त करने का निर्णय लिया है। जो प्रोजेक्ट की स्वीकृत बिल्डिंग प्लान में किसी संशोधन के बगैर विभिन्न इकाइयों के क्षेत्रफल में बदलाव कर सुपर एरिया के बढ़ाने या घटाने की जांच करेंगे।

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