जेटली ने ठुकराई राफेल पर JPC की मांग, बोले- यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ

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राफेल सौदे (Rafale Deal) को लेकर लोकसभा में बुधवार को बहस हुई। इस बहस की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने की और उन्होंने राफेल सौदे को लेकर सरकार पर निशाना साधा। इस दौरान राहुल गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार ने 126 की बजाए 36 एयरक्राफ्ट की डील क्यों की? इतना ही उन्होंने राहुल ने पूछा ये विमान अब तक आए क्यों नहीं। लोकसभा में राहुल गांधी के बयान के दौरान एआईएडीएमके (AIADMK) के सांसद संसद में हंगामा करते रहे। सदन में कांग्रेस अध्यक्ष ने राफेल मामले में जेपीसी (JPC) की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने लोकसभा में कहा, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने फैसले में कहा कि राफेल की प्रक्रिया से हम संतुष्ट हैं।

लोकसभा में अरुण जेटली ने बताया कि बेसिक एयरक्राफ्ट यूपीए की डील के मुकाबले नौ प्रतिशत और हथियार से लैस एयरक्राफ्ट 20 प्रतिशत सस्ता है। उन्होंने कहा कि राफेल की कीमत बताने से दुश्मन को पता चल जाएगा कि हमारे पास कैसे राफेल विमान है। उन्होंने कहा कि यह पहले एयरक्राफ्ट की कीमत है और चौथी व आठवें एयरक्राफ्ट में बदल जाएगी। उन्होंने कहा कि यूपीए के समय ही यह समझौता हुआ था समझौता होने के 11 साल बाद एयरक्राफ्ट की सप्लाई होगी।जेटली ने कहा कि रक्षा मंत्री ने बेसिक एयरक्राफ्ट की कीमत सदन में बताई थी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जेपीसी की मांग को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट राफेल की कीमत और अन्य जानकारी की प्रक्रिया से गुजर चुका है, तब कैसे जेपीसी बनाई जा सकती है।

 

कांग्रेस अध्यक्ष ने लोकसभा में ऑडियो टेप चलाने की मांग की लेकिन स्पीकर ने मना कर दिया। बता दें कि कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने गोवा के एक मंत्री का ऑडियो जारी किया जिसमें मंत्री राज्य के मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर पर राफेल विमान सौदे के दस्तावेज का फिरौती की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, मीडिया से बातचीत में मंत्री ने ऑडियो टेप में अपनी आवाज होने से इंकार किया है। लोकसभा में राहुल गांधी इसी ऑडियो टेप को चलाने की मांग कर रहे थे।

– इसपर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने टेप को फर्जी बताया है और कहा कि ऑडियो टेप की सत्यता साबित करें। अरुण जेटली ने कहा कि कारगिल के युद्ध के दौरान हमारे जवानों के पास 155 एमएम बंदूक थी। अगर राफेल होता तो 100 और 150 मीटर की दूरी से दुश्मन को उड़ा देते। जेटली ने कहा कि सेना को भी जरूरत थी और उस वक्त की यूपीए सरकार में भी कहा ये जरूरी है। 2007 में टेंडर बुलाए गए। उन्होंने कहा कि रक्षा सौदों में या तो टेंडर मंगाए जाते हैं या फिर सरकार-सरकार के बीच में समझौता होता है। उन्होंने बताया कि छह कंपिनयों ने बोली लगाई थी। उसमें दसौल्ट और यूरो फाइटर को फाइनल किया गया था।

वहीं, राहुल गांधी ने कहा कि रक्षा मंत्री रह चुके मनोहर पार्रिकर कह चुके हैं डील में बदलाव का पता नहीं था। उन्होंने पूछा कि किसने सौदे में बदलाव किया। क्या वायुसेना से पूछे बिना बदलाव हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि इस टेप में पूर्व रक्षामंत्री ने कैबिनेट के सामने कहा कि मेरे घर में राफेल की फाइलें पड़ी हुई हैं। राफेल का पूरा सच मेरे पास है।

इससे पहले अलग-अलग मांगों को लेकर अखिल भारतीय अन्नाद्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) और तेलुगूदेशम पार्टी (तेदेपा) के हंगामे के कारण बुधवार को लोकसभा में शून्यकाल नहीं हो सका तथा सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। एक बार के स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही जैसे ही दोपहर 12 बजे शुरू हुई, अन्नाद्रमुक और तेदेपा के सदस्य हाथों में तख्तियां लिये हुए अध्यक्ष के आसन के समीप पहुंच गये। उन्होंने हाथों में अपनी मांगों की तख्तियां ले रखी थीं तथा जोर-जोर से नारेबाजी कर रहे थे। अन्नाद्रमुक के सदस्य कावेरी नदी पर बांध निर्माण रोकने की मांग को लेकर सत्र के पहले दिन से ही हंगामा कर रहे हैं। तेदेपा की मांग आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने और वहां रेलवे जोन तथा इस्पात कारखाना बनाने की है।

हालांकि, राफेल विमान सौदे मुद्दे पर चर्चा को सदन की कार्यसूची में शामिल किये जाने के कारण मौजूदा सत्र के आरंभ से ही इस मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन की मांग पर हंगामा कर रहे कांग्रेस सदस्य शांतिपूर्वक कार्यवाही में हिस्सा ले रहे थे। हंगामे के बीच ही अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन पटल पर जरूरी दस्तावेज रखवाये। विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हंगामे के बीच ही आधार एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक 2018 पेश किया, जिसका कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी ने कड़ा विरोध किया।

इस दौरान अन्नाद्रमुक और तेदेपा के सदस्यों ने हंगामा और तेज कर दिया। अन्नाद्रमुक के कुछ सदस्यों ने हाथ में लिये कागज फाड़कर हवा में उछाल दिये। अध्यक्ष ने मार्शल को उन सदस्यों के नाम लिखकर देने को कहा जिन्होंने कागज उछाले। महाजन के बार-बार आगाह करने के बावजूद हंगामा कर रहे सदस्य शांत नहीं हुए और बीच-बीच में वे कागज के टुकड़े हवा में उछालते रहे। इसके बाद सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।

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