हवाई यात्रा बन रहा है शर्मिंदगी का सबब।

हवाई यात्रा के शर्म से बचने के लिए स्वीडन के लोग प्लेन की जगह रेलगाड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं। सफर करने वाले यात्रियों में ज्यादातर युवा है।

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देश में अब भी बहुत से लोगों के लिए हवाई यात्रा (Air travel) करना किसी सपने जैसा हो सकता है। बहुत से लोगों के लिए ये गर्व की बात है, लेकिन कुछ जगहों पर हवाई यात्रा शर्म का सबब बन चुकी है। सुनने में ये बड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन ये सच है और इसकी वजह भी उतनी ही हैरान करने वाली है।

हम बात कर रहे हैं स्वीडन की। हवाई यात्रा के शर्म से बचने के लिए स्वीडन (Sweden) के लोग प्लेन की जगह रेलगाड़ी (Train) का इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां रेलगाड़ी की यात्रा हवाई यात्रा से काफी लंबी और खर्चीली है, बावजूद लोग ट्रेन से सफर कर रहे हैं। खास बात ये है कि प्लेन की जगह ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों में ज्यादातर युवा है। ये लोग भविष्य के एक गंभीर खतरे से निपटने के लिए ऐसा कर रहे हैं, जिनसे दुनिया के ज्यादातर देश अभी अनजान हैं या उनका ध्यान इस तरफ नहीं है।

न्यूज एजेंसी AFP के अनुसार स्वीडन में सर्दियों के दौरान बहुत से लोग ऐसे देशों की यात्रा करना पसंद करते हैं, जहां सूरज की रोशनी हो। इसके लिए ज्यादातर लोग हवाई यात्रा का सहारा लेतें हैं, लेकिन हवाई यात्रा से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की वजह से अब उन्हें अपने ही देश में शर्मिंदगी का सामना करना पड़ रहा है। इसी के मद्देनजर स्वीडन में इन दिनों एक शब्द बहुत लोकप्रिय हो रहा है फ्लिग्सकैम (FLYGSKAM), जिसका मतलब है फ्लाइट शेम (Flight Shame)। ये शब्द हवाई यात्रा कर रहे लोगों के मन में पर्यावरण को होने वाले नुकसान का अहसास कराता है।

खास बात ये है कि फ्लिग्सकैम (FLYGSKAM) की मुहिम को स्वीडन की 16 वर्षीय ग्रेटा थुनबर्ग ने अनोखे तरीके से रफ्तार दी है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए शुक्रवार को स्कूल में हड़ताल शुरू की। इसके बाद ग्रेटा थुनबर्ग (Greta Thunberg) की तरह ही दुनिया के कई देशों में युवाओं ने पर्यावरण के लिए स्कूल छोड़ प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ग्रेटा थुनबर्ग (Greta Thunberg) को उनके इस अनोखे अभियान के लिए पिछले दिनों दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और पोलैंड के काटोवित्से में आयोजित जलवायु सम्मेलन में आमंत्रित किया गया और वह सभी जगह ट्रेन से सफर कर पहुंची।

ग्रेटा थुनबर्ग (Greta Thunberg) से प्रेरणा लेकर अब बहुत से लोग #Stayontheground अभियान से जुड़ रहे हैं। इसमें कई सेलिब्रिटीज भी हैं। पिछले दिनों स्वीडन (Sweden) के स्पोर्ट्स कमेंटेटर ब्योर्न फेरी ने इस अभियान से प्रेरित होकर घोषणा की थी कि वह विभिन्न प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए ट्रेन से ही यात्रा करेंगे।

वही स्वीडिश फिल्म उद्योग से जुड़े तकरीबन 250 लोगों ने फिल्म निर्माताओं से अपील की है कि वे विदेशों में होने वाली शूटिंग पर रोक लगाएं। इसी अभियान के समर्थन में इंस्टाग्राम पर भी एक बेनामी अकाउंट बना है, जिस पर उन सेलिब्रिटीज की आलोचना की जा रही है, जो विभिन्न विज्ञापनों में हवाई यात्रा का प्रमोशन कर रहे हैं। इस पेज के 60,000 से ज्यादा फॉलोवर बन चुके हैं।

स्वीडन (Sweden) की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी है। चार्टर टूरिज्म बढ़ने से वहां किफायती एयरलाइंस उद्योग का भी काफी विस्तार हुआ है। यही वजह है कि दुनिया भर के हवाई यात्रियों में स्वीडन के लोगों की संख्या काफी ज्यादा है। गोथेनबर्ग के रिसर्चरों को पिछले साल एक शोध में पता चला कि स्वीडन का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 1990 से 2017 के बीच वैश्विक औसत का पांच गुना था। शोध के अनुसार 1990 से स्वीडन में हवाई यात्रा से कार्बन उत्सर्जन में 61 फीसद की बढ़ोत्तरी हुई है। यही वजह है स्वीडन का मौसम विभाग भी चेतावनी जारी कर चुका है कि देश का औसत तापमान वैश्विक औसत से दोगुनी तेजी से बढ़ रहा है। मालूम हो कि हवाई यात्रा में प्रति किलोमीटर 285 ग्राम, कार से 158 ग्राम और ट्रेन से सबसे कम 14 ग्राम कार्बन उत्सर्जन होता है। यही वजह है कि स्वीडन के लोग बढ़ते प्रदूषण से खासे चिंतित हैं।

मार्च 2019 में वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फाउंडेशन (WWF) के सर्वे में पता चला कि हवाई यात्राओं के पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव की वजह से हर पांचवां स्वीडनवासी अब प्लेन की जगह ट्रेन से सफर करने को तरजीह दे रहा है। इसमें महिलाओं और युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। स्वीडन की एक टूरिज्म प्रतिका ने पिछले दिनों एक सर्वे प्रकाशित किया। इसमें बताया गया कि वर्ष 2018 में विदेशी यात्राओं में काफी कमी आई है। विदेश यात्राओं में कटौती करने वाले लोगों में से 64 फीसद लोगों ने बताया कि उन्होंने ये निर्णय पर्यावरण संरक्षण की चिंताओं की वजह से लिया है।

वहीं स्वीडन की राष्ट्रीय रेल कंपनी एसजे ने सर्दियों में यात्रियों की संख्या में 21 प्रतिशत बढ़ोतरी के आंकड़े पेश किए हैं। लोगों की प्रतिक्रिया को देखते हुए फ्रांस सरकार ने फिर से स्वीडन के शहरों और प्रमुख यूरोपीय शहरों के बीच नाइट ट्रेन शुरू करने का ऐलान किया है। माना जा रहा है कि स्वीडन में इस वर्ष के अंत तक हवाई यात्राओं में 3.2 फीसद की कमी आएगी। स्वीडन की इस मुहिम से प्रभावित होकर फिनलैंड में भी लैंटोहेपिया नाम से अभियान शुरू हुआ है। कई अन्य देशों में भी #Flyingless और #Stopflying जैसे अभियान शुरू हो चुके हैं।

न्यूज एजेंसी AFP के अनुसार हवाई यात्राओं से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए बर्लिन (Berlin) की एक कंपनी ने अनोखी तरकीब निकाली है। वाइबरविर्टशाफ्ट नाम की कंपनी ने अपने कर्मचारियों के लिए घोषणा की है कि जो साल में एक भी हवाई यात्रा नहीं करेगा, उसे तीन दिन की अतिरिक्त छुट्टी मिलेगी। जर्मनी में आमतौर पर साल में 30 अवकाश मिलते हैं, लेकिन कंपनी ने इस घोषणा के बाद सालभर हवाई यात्रा न करने वाले कर्मचारियों के अवकाश में 10 फीसद की बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी की सीईओ कात्या फॉन डेय बेय के अनुसार हर कोई हवाई यात्रा से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से वाकिफ है, बावजूद लोग जागरूक नहीं हो रहे। न्यूज एजेंसी से बातचीत में सीईओ ने बताया कि उन्होंने खुद हवाई यात्रा छोड़ दी है और अब केवल ट्रेन से ही सफर करती हैं।

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