अमेरिका की बढ़ती इकॉनमी बनी दूसरे देशों के लिए खतरा

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एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉलर की बढ़ती कीमत, बढ़ता ब्याज दर और चीन के साथ चल रहे अमेरिका के ट्रेड वॉर ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि इस साल सिर्फ अमेरिका में ही आर्थिक वृद्धि देखने को मिलेगी।

नेटवेस्ट में क्रॉस ऐसेट स्ट्रैटजी के हेड दिम मैक कॉर्मिक बताते हैं कि फेडरल रिजर्व द्वारा 2018 में ब्याज दर बढ़ाने के फैसले ने डॉलर की कीमत बढ़ा दी जिससे अंतरराष्ट्रीय कर्जदारों के लिए लोन चुकाना मुश्किल हो गया। वहीं कई देश इस वक्त आर्थिक परेशानियों का सामना भी कर रहे हैं। एक ओर जहां चीन इस वक्त अमेरिका के साथ हुए ट्रेड वॉर से नुकसान झेल रहा है, वहीं जापान में भी आर्थिक विषेशज्ञों को स्लोडाउन नजर आ रहा है। इटली में वहां की आर्थिक नीतियों के कारण निवेशकों से ठनी पड़ी है। बात अगर ब्रिटने की करें तो ब्रेग्जिट के साथ जुड़ी अनिश्चितता से सभी वाकिफ हैं।

इसके साथ ही इमर्जिंग मार्केट्स जैसे वेनेजुएला इस वक्त अपने इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है तो अर्जेंटीना अपनी करंसी को बचाने के लिए कीमतें बढ़ाने में लगा हुआ है। ब्लूमबर्ग के चीफ इकॉनमिस्ट टॉम ओर्लिक बताते हैं कि चीन को छोड़कर पिछले साल डिवलपिंग इकॉनमी का ग्लोबल आउटपुट में हिस्सा गिरकर 24.6 प्रतिशत हो गया था जबकि साल 2013 में यह 26.7 प्रतिशत था। वहीं क्रॉस बॉर्डर ट्रेड में भी काफी कमी आई है। इसके अलावा सिंगापुर के नोमुरा होल्डिंग्स के इमर्जिंग मार्केट इकॉनमिक्स के हेड रॉबर्ट सुब्बरमन कहते हैं कि अब सवाल है कि सेकंड हाफ में एशिया का ग्रोथ कितना और कितना कम होगा।

निरंजन कुमार

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