सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का किया सफल परीक्षण

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भारत ने गुरुवार की सुबह राजस्‍थान के पोखरण में दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का फिर से एक सफल परीक्षण किया है। पोखरण फायरिंग रेज में हुए इस परीक्षण में सेना और डीआरडीओ के कई सीनियर ऑफिसर्स मौजूद थे। जानकारी के मुताबिक इस मिसाइल ने सफलतापूर्वक सही निशाने पर वार किया। ब्रह्मोस की स्‍पीड 2.8 मैक (ध्वनि की रफ्तार के बराबर) है। इस मिसाइल की रेंज 290 किलोमीटर है और ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जा सकती है। कुछ दिनों पहले खबरें आई थीं कि ब्रह्मोस जैसी क्षमता वाली मिसाइल अभी तक चीन और पाकिस्‍तान ने विकसित नहीं की है।

बता दें इससे पहले पोखरण में इस माह की शुरुआत में डीआरडीओ एंटी-टैंक गाइडेड नाग मिसाइल का सफल परीक्षण कर चुकी है। नाग तीसरी पीढ़ी की एक एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) है और डीआरडीओ ने इसका परीक्षण भारतीय सेनाओं को और ताकत देने के मकसद से किया है। इस मिसाइल को रेगिस्‍तान की परिस्थितयों में अलग-अलग रेंज और टाइम पर दो टैंक टारगेट को भेदने में भी सफलता हासिल की।

यही नहीं हवा से जमीन पर वार करने वाले ब्रह्मोस मिसाइल का दुश्मन देश की सीमा में स्थापित आतंकी ठिकानों पर हमला बोलने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह मिसाइल अंडरग्राउंड परमाणु बंकरों, कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर्स और समुद्र के ऊपर उड़ रहे एयरक्राफ्ट्स को दूर से ही निशाना बनाने में सक्षम है।

बता दें कि इससे पहले सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का आखिरी परीक्षण नवंबर 2017 में भारतीय वायुसेना के लड़ाकू, सुखोई -30 एमकेआई के साथ किया गया था। माना जा रहा है कि सुखोई में ब्रह्मोस फिट होने से क्षेत्र में एयरफोर्स की ताकत काफी बढ़ जाएगी। गौरतलब है कि 12 फरवरी 1998 को भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल टेक्नॉलजिस्ट डॉ. ए.पी.जे अब्दुल कलाम और रूस के प्रथम डेप्युटी डिफेंस मिनिस्टर एन.वी. मिखाइलॉव ने एक इंटर-गवर्मेन्टल अग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किया था। इसके बाद ही ब्रह्मोस बनाने का रास्ता साफ हुआ। इसे भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओएम द्वारा संयुक्त रूप से बनाया गया था।

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