INS विराट: पूर्व नौसेना प्रमुख एल रामदास ने पीएम मोदी के बयान को ठहराया ग़लत।

पूर्व नौसेना प्रमुख एल रामदास ने पीएम मोदी के बयान को ग़लत रिपोर्ट पर आधारित बताते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी INS विराट पर सरकारी काम से गए थे.

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दिल्ली के रामलीला मैदान में बुधवार को एक जनसभा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajeev Gandhi) पर एक और सनसनीखेज आरोप लगाया था. पीएम मोदी का आरोप था कि राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए विमानवाहक पोत INS विराट का इस्तेमाल एक द्वीप पर परिवार के साथ छुट्टी मनाने के लिए किया था. पीएम मोदी ने दावा किया था कि इसमें इटली से आए उनके रिश्तेदार भी शामिल हुए थे और INS विराट का इस्तेमाल टैक्सी की तरह किया गया था.

पीएम मोदी के इस बयान को पूर्व ऐडमिरल एल रामदास ने को गलत करार दिया। पूर्व नौसेना प्रमुख एल रामदास (Admiral L Ramdas (Retd.) ने पीएम मोदी के इस बयान को को ग़लत रिपोर्ट पर आधारित बताते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajeev Gandhi) INS विराट (INS Viraat) पर सरकारी काम से गए थे. उन्होंने कहा कि राजीव गांधी INS विराट पर राष्ट्रीय खेल पुरस्कार वितरण में गए थे. उन्होंने कहा कि आरोप एकदम झूठा है. प्रधानमंत्री का वह सरकारी दौरा था. हम इस तरह के आरोप से व्यथित हैं. सेना किसी के निजी इस्तेमाल के लिए नहीं है.

पीएम मोदी ने कहा था, ‘आईएनएस विराट का इस्तेमाल एक निजी टैक्सी की तरह करके राजीव गांधी ने इसका अपमान किया गया. यह तब हुआ जब राजीव गांधी एवं उनका परिवार 10 दिनों की छुट्टी पर गए हुए थे. आईएनएस विराट को हमारी समुद्री सीमा की रक्षा के लिए तैनात किया गया था, किन्तु इसका मार्ग बदल कर गांधी परिवार को लेने के लिए भेजा गया जो अवकाश मना रहा था.’

उन्होंने यह भी दावा किया था कि गांधी परिवार को लेने के बाद आईएनएस विराट द्वीप पर 10 दिनों तक खड़ा रहा. पीएम ने सवाल किया, ‘राजीव गांधी के साथ उनके ससुराल के लोग भी थे जो इटली से आए थे. सवाल यह है कि क्या विदेशियों को एक युद्धपोत पर ले जाकर देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं किया गया?’ साथ ही उन्होंने कहा, ‘क्या यह कभी कल्पना की जा सकती है कि भारतीय सशस्त्र सेनाओं के प्रमुख युद्धपोत का इस्तेमाल निजी अवकाश के लिए एक टैक्सी की तरह किया जाए?’ विमान वाहक आईएनएस विराट को भारतीय नौसेना में 1987 में सेवा में लिया गया था. करीब 30 वर्ष तक सेवा में रहने के बाद 2016 में इसे सेवा से अलग किया गया.

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