संजय निरूपम ने मिलिंद देवड़ा पर साधा निशाना, बोले- यह इस्तीफा है या ऊपर चढ़ने की सीढ़ी?

मुम्बई कांग्रेस अध्यक्ष (Mumbai Congress President) पद से इस्तीफा देने के बाद मिलिंद देवड़ा (Milind Deora) अब अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं.

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कांग्रेस की मुंबई इकाई में मतभेद एक बार फिर सतह पर आ गया है. मुम्बई कांग्रेस अध्यक्ष (Mumbai Congress President) पद से इस्तीफा देने के बाद मिलिंद देवड़ा (Milind Deora) अब अपनी ही पार्टी के नेताओं के निशाने पर हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) ने देवड़ा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह राष्ट्रीय स्तर के पद के लिए बहुत उत्सुक हैं.

संजय निरुपम (Sanjay Nirupam) ने यह सुझाव देने के लिए भी मिलिंद देवड़ा की आलोचना की कि महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव तक मुम्बई पार्टी इकाई की देखरेख के लिए कांग्रेस के तीन वरिष्ठ नेताओं की एक समिति बनायी जाए. निरुपम ने कहा कि ऐसे कदम से पार्टी को और नुकसान होगा. संजय निरुपम ने Tweet कर कहा , ‘इस्तीफा में त्याग की भावना अंतर्निहित होती है. यहां तो दूसरे क्षण ‘नेशनल’ लेवल का पद मांगा जा रहा है. यह इस्तीफा है या ऊपर चढ़ने की सीढ़ी? पार्टी को ऐसे ‘कर्मठ’ लोगों से सावधान रहना चाहिए.’

आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ही निरुपम की जगह देवड़ा को मुम्बई कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था. निरुपम ने एक अन्य Tweet में लिखा, ‘अध्यक्ष के स्थान पर मुम्बई कांग्रेस चलाने के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाने का विचार बिल्कुल भी उचित नहीं है. इससे पार्टी को और नुकसान होगा.’ बता दें कि मिलिंद देवड़ा (Milind Deora) ने आज ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और आगामी विधानसभा चुनावों तक शहर इकाई की देखरेख के लिए तीन वरिष्ठ नेताओं के सामूहिक नेतृत्व की सिफारिश की. 26 जून को नई दिल्ली में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से मुलाकात के बाद देवड़ा ने इस्तीफा देने की मंशा जाहिर की थी.

देवड़ा के दफ्तर से जारी बयान में कहा गया है, ‘इसके बारे में मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव केसी वेणुगोपाल को अवगत कराया गया है.’ इस कदम को राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के AICC के अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद एकजुटता और सामूहिक जिम्मेदारी के तौर पर देखा जा रहा है. देवड़ा को लोकसभा चुनाव से एक महीने पहले मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था. ऐसे में उन्हें चुनाव की तैयारी करने के लिए कम ही समय मिला था.

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