पैसा शिक्षा-अस्पताल पर खर्च हो या मूर्तियों पर, यह कोर्ट तय नहीं कर सकता- मायावती

मायावती ने शहरों में अपने द्वारा बनाई गई मूर्तियों की स्थापना को सही ठहराया और कहा कि ये लोगों की इच्छा थी।

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बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अपनी और हाथी की प्रतिमाओं पर पैसा खर्च करने के मामले में अपना हलफनामा दाखिल किया है। उन्होंने शहरों में अपने द्वारा बनाई गई मूर्तियों की स्थापना को सही ठहराया और कहा कि ये लोगों की इच्छा थी।

मायावती ने हलफनामे में कहा है कि विधानसभा की इच्छा का उल्लंघन कैसे करूं? इन प्रतिमाओं के माध्यम से विधानमंडल ने आदर व्यक्त किया है। बता दें मुख्यमंत्री रहते हुए इन मूर्तियों के लिए उनकी तरफ से बजट का उचित आवंटन किया गया था।

इसके साथ ही मायावती ने कहा कि ये पैसा शिक्षा पर खर्च किया जाना चाहिए या अस्पताल पर, यह एक बहस का सवाल है और इसे अदालत द्वारा तय नहीं किया जा सकता। प्रतिमाएं लोगों को प्रेरणा देने के लिए बनाई गई थीं। उन्होंने हाथियों की प्रतिमाओं पर कहा कि ये प्रतिमाएं केवल वास्तुशिल्प की बनावट हैं और ये बसपा के प्रतीक चिन्ह का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं।

मायावती ने अपने हलफनामे में कहा है कि अनुसूचित जाति के नेताओं द्वारा बनाई गई मूर्तियों पर ही सवाल क्यों? भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों द्वारा जनता का पैसा इस्तेमाल किए जाने पर सवाल क्यों नहीं? इस हलफनामे में मायावती ने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सरदार पटेल और जयललिता आदि की मूर्तियों का हवाला भी दिया है।

इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई कर सकता है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में उसका विचार है कि बसपा सुप्रीमो मायावती को प्रतिमाओं पर लगाया जनता का पैसा लौटाना चाहिए।

मायावती और उनकी पार्टी के चिन्ह हाथी की प्रतिमाएं नोएडा और लखनऊ में बनवाई गई थीं। एक वकील ने इस मामले में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया है कि नेताओं द्वारा अपनी और पार्टी के चिह्न की प्रतिमाएं बनाने पर जनता का पैसा खर्च ना करने के निर्देश दिए जाएं।

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