जम्मू-कश्मीर में सामान्य होने लगे हालात, हटाई गईं कई पाबंदियां

कश्मीर में शुक्रवार से सरकारी दफ्तरों (Government Office) में काम होने लगा। बंद पड़े शिक्षण संस्थान (Education Institutes) भी सोमवार से खुलने शुरू हो जाएंगे।

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Kashmir: कश्मीर में शुक्रवार से सरकारी दफ्तरों (Government Office) में काम होने लगा। बंद पड़े शिक्षण संस्थान (Education Institutes) भी सोमवार से खुलने शुरू हो जाएंगे। टेलीफोन सेवा को भी चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जा रहा है, लेकिन मोबाइल व इंटरनेट सेवाएं हालात सामान्य होने तक बंद रहेंगी। लोग शांति व्यवस्था बनाए रखने में पूरा सहयोग कर रहे हैं। यही कारण है कि पिछले 15 दिनों में कहीं कोई जानी नुकसान नहीं हुआ है।

जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य होने लगे हैं। जम्मू में 4 अगस्त से बंद पड़ी इंटरनेट सेवा को बहाल कर दिया गया है। हालांकि, फिलहाल जम्मू में उपभोक्ता सिर्फ 2जी सेवा का फायदा ही उठा पाएंगे। लेकिन, अब उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही जम्मू-कश्मीर के हालात सामान्य हो जाएंगे। जम्मू में इंटरनेट सेवा बहाल करने के बाद अब आज ही प्रशासन घाटी में लैंडलाइन फोन सेवा को फिर से शुरू करने जा रहा है।

कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जारी एहतियातन गिरफ्तारियों और रिहाई का सिलसिला अभी चलता रहेगा। जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रहमण्यम ने कहा कि 22 में से 12 जिलों में स्थिति पूरी तरह सामान्य है। इनमें से सिर्फ पांच जिलों में ही अब कुछ हद तक रात्रिकालीन पाबंदियां हैं। जैसे-जैसे हालात सामान्य होते जाएंगे, सभी जिलों से पाबंदियां हटा ली जाएंगी।

शुक्रवार होने के बावजूद पूरी वादी में शांति रही। सभी मस्जिदों में शांतिपूर्वक नमाज संपन्न हुई। ज्ञात हो, जम्मू संभाग में भी इंटरनेट सेवा पूरी तरह ठप है। पांच जिलों जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी व ऊधमपुर में मोबाइल और टेलीफोन सेवा सुचारू रूप से चल रही है, जबकि अन्य जिलों में मोबाइल सेवा ठप है।

मुख्य सचिव ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 समाप्त कर इसे दो केंद्र शासित राज्य बनाने के केंद्र सरकार के फैसले का जिक्र किए बगैर कहा कि यह निर्णय स्थानीय लोगों के दीर्घकालिक कल्याण के लिए लिया गया है। सरकार को यकीन है कि समग्र विकास से ही अलगाववाद को रोका जा सकता है।

मुख्य सचिव ने कहा कि लश्कर, जैश और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों का मकसद हमले कर यहां डर पैदा करना और युवाओं का विकास रोकना है। दुनिया और संयुक्त राष्ट्र भी इन संगठनों के मंसूबों को समझता है। पाकिस्तान ने भी हालात बिगाड़ने की हर संभव कोशिश की। वहीं, आतंकी हमलों की पक्की सूचना थी। ऐसे में आम लोगों के जान माल की सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए निषेधाज्ञा लगाई गई थी। टेलीफोन और इंटरनेट सेवाओं को बंद किया गया है।

बीवीआर सुब्रहमण्यम (BVR Subrahmanyam) ने कहा कि लोगों को दिक्कत न हो इसके लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई कमी नहीं है। हाजियों के आगमन के लिए सभी आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। मीडिया सेंटर भी बनाया है, जहां रोज संबंधित अधिकारी हालात का पूरा ब्योरा दे रहे हैं। कश्मीर में सभी प्रमुख अखबार छप रहे हैं, सेटलाइट टीवी नेटवर्क भी काम कर रहा है।

राजभवन के प्रवक्ता ने कहा, ”स्वतंत्रता दिवस पर कहीं भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिन्होंने समारोह में खलल डालने की किसी भी कोशिश को नाकाम कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने प्रतिबंधों के दौरान लोगों को सहयोग करने के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें आश्वासन दिया कि इसे धीरे-धीरे कम किया जाएगा।

सभी शिक्षण संस्थानों के भीतर अकादमिक गतिविधियों के अनुकूल माहौल बनाए रखने, शिक्षण संस्थानों आसपास के इलाके में किसी भी तरह के हिंसक प्रदर्शन को रोकने की कार्ययोजना पर भी काम हो रहा है। इस संदर्भ में राज्य शिक्षा विभाग के अधिकारियों, विभिन्न स्कूलों के प्रबंधकों और प्रिंसिपल की एक बैठक भी शनिवार को हुई है।

यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकारों को समाप्त कर इसे दो केंद्र शासित राज्यों में विभाजित किए जाने के संसद के फैसले के बाद उपजे हालात को देखते हुए प्रशासन ने पूरे राज्य में पांच अगस्त की सुबह से शिक्षण संस्थानों को एहतियातन बंद कर दिया था।

अलबत्ता, हालात में सुधार को देखते हुए प्रशासन ने जम्मू संभाग के जिला कठुआ और सांबा में चार दिनों के बाद ही स्कूल खोल दिए गए थे। लेह व करगिल में भी बीते सप्ताह ही शिक्षण संस्थान खोल दिए गए थे। लेकिन कश्मीर घाटी में सभी शिक्षण संस्थान बंद रखे गए थे।

भारत और पाकिस्तान के सवाल पर शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में अनौपचारिक बैठक हुई। बैठक में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और इससे जुड़े अन्य मसलों पर सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य देशों और दस अस्थायी देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चीन की मांग पर बुलाई गई इस आपात बैठक में दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव पर चिंता जताई गई और संयम बरतने की अपील की गई। पाकिस्तान की मंशा के अनुसार जम्मू-कश्मीर मसले को तूल नहीं दिया जा सका।

पाकिस्तान के बैठक में भाग लेने के अनुरोध को पहले ही खारिज कर दिया गया था। बैठक के सूचना पत्र में इसके अनौपचारिक होने का स्पष्ट उल्लेख था। सुरक्षा परिषद की अनौपचारिक बैठक में विषय पर सामान्य चर्चा होती है और इनमें सदस्य देश विचार रखने से ज्यादा ताजा जमीनी हालात के जानकारी लेते हैं। इसमें न कोई संकल्प लिया जा सकता है और न ही मतदान होता है।

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