आज तीसरे नंबर पर ही शपथ लेंगे जस्टिस जोसफ, सरकार ने खारिज की आपत्तियां

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उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ तमाम विवादों के बीच मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के तौर पर शपथ लेंगे। सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए तीन जजों की लिस्ट में जस्टिस जोसेफ का नाम तीसरे नंबर पर है। इस मामले को लेकर काफी विवाद हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों का ऐसा मानना था कि केंद्र ने पदोन्नति में उनकी वरिष्ठता को कम कर दिया है। हालांकि सरकार ने साफ किया कि वह इस मामले में नियमों के अनुसार ही काम कर रही है और वरिष्ठता तथा परंपरा के अनुसार ही नोटिफिकेशन जारी किया गया है।

दूसरी तरफ कई जजों का जस्टिस जोसफ को लेकर कहना है कि इस मामले में वरिष्ठता का उल्लंघन नहीं हुआ है। जजों का मानना है कि जस्टिस बनर्जी और जस्टिस सरन जस्टिस जोसफ से वरिष्ठता क्रम में ऊपर हैं। जस्टिस बनर्जी और जस्टिस सरन 7 अगस्त 2002 को हाई कोर्ट में जज नियुक्त हुए थे। जस्टिस जोसफ 14 अक्टूबर 2004 को हाई कोर्ट के जज नियुक्त हुए थे।

वरिष्ठता उल्लंघन के मसले पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल से सोमवार को मुलाकात की थी और उन्हें इसपर जस्टिस कुरियन जोसफ की आपत्तियों से अवगत कराया था। फिर इस मामले को कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के सामने भी रखा गया था। लेकिन रविशंकर प्रसाद ने साफ-साफ कहा कि सरकार ने नियमों के तहत ही यह फैसला किया है और वरिष्ठता तथा परंपरा का पालन किया है।

दूसरी तरफ चीफ जस्टिस मिश्रा ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में होने वाले शपथ ग्रहण कार्यक्रम की अधिसूचना जारी कर दी, जिसमें जस्टिस केएम जोसेफ को जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस विनीत सरन के बाद दर्शाया गया है। चीफ जस्टिस मंगलवार को जस्टिस जोसेफ के अलावा जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस विनित सरन को शपथ दिलवाएंगे। अगर जस्टिस जोसेफ तीसरे नंबर पर शपथ लेते हैं तो वह तीनों में सबसे जूनियर होंगे। ऐसी व्यवस्था है कि सरकार जिस ऑर्डर में जजों के नाम नोटिफाई करती है, उसी के अनुरूप चीफ जस्टिस उन्हें शपथ दिलाते हैं।

इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को लोकसभा में बिना कोई नाम लिए सरकार पर मनमाने ढंग से जजों की नियुक्ति का आरोप लगाया था। केरल से कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने शून्य काल में कहा कि सरकार कलीजियम की सिफारिशों की अनेदखी कर अपने तरीके से काम करना चाहती है। चार महीने पहले कलीजियम ने एक जज के नाम की सिफारिश की थी, जो सरकार ने खारिज कर दी थी। दोबारा उनके नाम का प्रस्ताव आने पर उन्हें स्वीकृति दी गई। सरकार को सफाई देनी चाहिए कि इस जज के मामले में ऐसा क्यों हुआ?

निरंजन कुमार

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