पूर्व CJI गोगोई बोले- शपथ लेने दीजिए, फिर बताऊंगा, राज्यसभा सदस्यता क्यों स्वीकार की

अपने मनोनयन पर गोगोई ने कहा, 'मैं संभवत कल दिल्ली जाऊंगा। मुझे पहले शपथ लेने दीजिए। इसके बाद मैं विस्तार से मीडिया से बात करुंगा कि आखिर मैंने ऐसा क्यों किया और मैं राज्यसभा क्यों जा रहा हूं।'

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भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने राज्यसभा मनोनयन को स्वीकार कर लिया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) ने राज्यसभा सदस्य के तौर पर सोमवार को उन्हें नामित किया था। अपने मनोनयन पर गोगोई ने कहा, ‘मैं संभवत कल दिल्ली जाऊंगा। मुझे पहले शपथ लेने दीजिए। इसके बाद मैं विस्तार से मीडिया से बात करुंगा कि आखिर मैंने ऐसा क्यों किया और मैं राज्यसभा क्यों जा रहा हूं।’

कांग्रेस सहित कई राजनीतिक दलों ने जस्टिस गोगोई के मनोनयन पर सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि उन्हें इसे स्वीकार करने से मना कर देना चाहिए क्योंकि इससे न्यायापालिका की निष्पक्षता पर प्रभाव पड़ेगा। वहीं कुछ नेताओं ने उन्हें उनके पुराने बयान याद दिलाते हुए इस मनोनयन को अस्वीकार करने की सलाह दी थी।

जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) का जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ। वह असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशव चंद्र गोगोई के पुत्र हैं। रंजन गोगोई का जन्म 18 नवंबर 1954 को हुआ। उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट से वकालत की शुरुआत की थी। 28 फरवरी 2001 को वह गुवाहाटी हाई कोर्ट में स्थायी जज नियुक्त हुए।

वह 12 फरवरी 2011 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने और 17 नवंबर 2019 को इस पद से सेवानिवृत्त हुए। भारत के पूर्वोत्तर राज्य से इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाले वह पहले जस्टिस थे।
सुप्रीम कोर्ट की गरिमा बनाए रखने के लिए की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने देश के सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा बनाए रखने के लिए भी आवाज उठाई। जनवरी 2018 में तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के कार्य प्रणाली से नाराज गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के तीन अन्य जजों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट के जज एकसाथ न्यायालय के आंतरिक मामलों को लेकर मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से आए थे।

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