‘देव’ की कृपा से ही बनेगी कर्नाटक में अगली सरकार

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(By – संजीव डारेक्टर सीएएस……)

12 मई 2018 को कर्नाटक में मतदान के साथ ही चुनावी सरगर्मियां थम गयीं और अटकलों का बाज़ार तेज हो गया I तमाम टीवी चैनलों पर एग्जिट पोल की भरमार हो गयी पर मूल प्रश्न का उत्तर किसी के पास नहीं था कि आखिर कौन चुनाव जीत रहा है और इसके क्या मायने हो सकते हैं I सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे थे कि क्या यह एग्जिट पोल एक ही विधानसभा चुनाव के हैं क्योंकि हर किसी का आंकड़ा अलग अलग था I चूंकि मैं भी एक चुनावी विश्लेषक रहा हूँ और शुरू के दिनों में सेफोलोजी की है तो मैंने भी अपने एक विश्लेषण किया जिससे यह पता चले कि कर्नाटक में ऊँट किस करवट बैठेगा?

लाइव इंडिया के लिए मेरी संस्था, सेंटर फॉर एम्पावरमेंट स्टडीज , नयी दिल्ली द्वारा किये गए विश्लेषण से यह बात स्पष्ट हो गयी है कि टक्कर कांटे का है और सत्ता की चाभी इस बार पूर्व प्रधानमंत्री श्री देवेगौड़ा जी के हाथों में ही रहेगी I आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में काफी उठा पटक देखने को मिल सकती है

 

राजनितिक संभावनाएं:                                                                                                                                                                                   किसी भी सूरत में भाजपा और कांग्रेस अपने बल बूते सरकार बनाने में विफल रहेंगे और अगर भाजपा को 102 सीट , कांग्रेस को 100 सीट और जेडीएस को 21 सीटें मिलती है तो भाजपा चाहेगी कि वो जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाये I अगर भाजपा या कांग्रेस को बहुमत मिल भी जाये तो मजबूत सरकार बनाने के लिए उन्हें देवेगौडा जी का सहयोग चाहिए होगा I पहले भी भाजपा और जेडीएस मिलकर सरकार बना चुके हैं I कुमारस्वामी और यदुरप्पा की सरकार कर्नाटक में रही है I इससे भजपा एक तीर से कई शिकार कर लेगी I उसके कांग्रेस मुक्त अभियान को और गति तो मिलेगी है , चंद्रबाबू नायडू के जाने के बाद भाजपा गठबंधन को नया साथी मिलेगा और कांग्रेस के लोकसभा चुनाव के अभियान को धक्का लगेगा I आनेवाले समय में भाजपा काफी आक्रमक हो जाएगी और राजस्थान तथा मध्यप्रदेश में अपने मुख्यमंत्रियों को लेकर कड़े फैसले भी ले लेगी I राहुल गांधी के राजनितिक भविष्य परएक और ग्रहण लग जायेगा और कांग्रेस में सिद्धेरामैया युग का अंत हो जायेगा I

 कांग्रेस अगर जेडीएस के साथ मिल कर सरकार बनती है तो यह काफी दिलचस्प होगा क्योंकि कांग्रेस के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री सिद्धेरमैया जेडीएस के ही नेता रहें हैं और देवगौड़ा जी के साथ उनके कैसे सम्बन्ध रहे हैं यह किसी से छुपा नहीं है I कांग्रेस के लिए इन दोनों को एक ही मंच पे लाना एक टेढ़ी खीर साबित होगी वो भी तब जब जेडीएस के पास विकल्प खुले हैं I हालाँकि कांग्रेस ने सिद्धेरमैया के हाथों दलित कार्ड खेल एक नयी समीकरण रचने कि कोशिश कि है और अगर कांग्रेस इस चमत्कार को कर लेती है तो यह राहुल गांधी की सबसे बड़ी सफलता मानी जाएगी और राहुल गांधी का कद काफी बड़ा हो जायेगा, क्योंकि कांग्रेसी परम्परा के अनुसार इसका श्रेय सिर्फ राहुल गांधी को जाएगा I इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश तो होगा , राजस्थान और मध्यप्रदेश में पार्टी को एक नयी उर्जा मिलेगी और पार्टी एक नए जोश से लोकसभा चुनाव के लिए जुटेगी I

 कर्नाटक के राजनीति में एक बार फिर गोवा और पंजाब कि भूमिका बढ़ सकती है दोनों बड़े दल अपने अपने विधायकों को गोवा कि सैर या पंजाब कि सैर करवा सकते हैं I यह  तो 14 मई के बाद ही पता चलेगा कि जेडीएस नेता तथा पूर्व प्रधानमंत्री देवे गौड़ा जी कि रुचि गोवा में है कि पंजाब में I

 

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