कर्नाटक चुनाव: दोस्त के हाथों मिली करारी हार….

0
369
CHAMUNDESHVARI

12 मई को हुए कर्नाटक चुनाव के रुझान सामने आने और कड़ी टककर के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर्नाटक में खड़ी हो चुकी है। लेकिन प्रदेश के लोकप्रिय बताए जाने वाले कांग्रेस नेता सिद्धरमैया इस बार दो सीटों बादामी तथा चामुंडेश्वरी से चुनाव लड़ रहे थे। बादामी में उन्हें भाजपा प्रत्याशी बी श्रीरामुलु से 1696 मत अधिक हासिल हुए। वहीं विपक्षी पार्टी के नेता चामुंडेश्वरी में सिद्धरमैया को अपने ही एक पुराने दोस्त जेडीएस प्रत्याशी जीटी देवगौड़ा से करारी हार मिली। बता दें दोनों ही नेता आपस में घनिष्ठ मित्र हैं। लेकिन राजनीती आमने सामने होने के बावजूद देवगौड़ा को काफी करारी हार का मुँह देखना मिला और उन्हें कुल 36,042 मतों से पराजय मिली। हलांकि आंतरिक सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के लिए इस बार जीत आसान नहीं होगी। और उन्हें यह बात पहले से ही पता थी इसलिए उन्होंने दो सीटों से अपना नामांकन किया था।

बता दें जीटी देवगौड़ा ने 1970 में कृषि को-ऑपरेटिव सोसायटी के चुनाव से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया था। 1978 में देवगौड़ा कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में वे विधानसभा चुनाव में उतरे। देवगौड़ा हंसूर और चामुंडेश्वरी से तीन बार विधायक रह चुके हैं। एचडी कुमारास्वामी की सरकार में वो मंत्री भी रह चुके हैं। उस समय कांग्रेस और कांग्रेस में लड़ाई थी। इसके बाद जीटी देवगौड़ा कांग्रेस छोड़कर जनता पार्टी में शामिल हो गए। 1983 के विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी सिद्धरमैया से दोस्ती हुई और यह सफर करीब 20 साल तक चला।

2004 में जीटी देवगौड़ा पहली बार हंसूर से विधायक बने। इसी साल वे लोकसभा चुनाव भी लड़े लेकिन कड़े मुकाबले में पराजित हो गये। सिद्धरमैया से विवाद होने के बाद केजीटी देवगौड़ा की दोस्ती में दरार आ गई और वे 2007 में बीजेपी में शामिल हो गए। 2013 में वे फिर से जेडीएस में शामिल हो गए और चामुंडेश्वरी सीट से करीब 9000 वोटों से जीत दर्ज की।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here