जानिए कैसे बीते मोदी सरकार के 4 साल, क्या कुछ रहा विशेष…

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संजीव सिंह  – निर्देशक,
सेंटर फॉर एम्पावरमेंट स्टडीज,
नयी दिल्ली

मई 26, 2018 को मोदी सरकार के ठीक 4 साल पूरे हो जायेंगे I आज ही के दिन 2014 में श्री नरेंद्र मोदी जी की अगुवाई में भाजपा ने सरकार बनायी थी और नरेंद्र मोदी ने देश के चौदहवे प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी I मेरी राय में 2014 का जनादेश ‘भ्रष्ट-धर्मनिरपेक्षिता’ के खिलाफ तो था ही देश के सर्वांगिक विकास के लिए भी था I जनता को मोदी जी से ‘विकास’ की एक नयी माडल कि उम्मीद थी I बीते 4 सालों में देश की राजनीतिक दिशा और दशा में काफी परिवर्तन आया I आज भाजपा एक मजबूत दल के रूप में उभरी है, देश के करीब 20 राज्यों में उसकी सरकार चल रही है और विपक्ष आज अपने अस्तित्व बचाने के लिए जूझ रहा है I कांग्रेस के खिलाफ अपनी राजनीति शुरू करने वाली ढेरों विपक्षी पार्टियाँ आज उसी के साथ मिल कर भाजपा मुक्त भारत का सपना अगर देख रहीं है तो यह नरेंद्र मोदी की बढती लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

हाल ही में संपन्न हुए कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस के सरकार बनालेने से विपक्षी खेमे में नयी जान आ गई है I गुजरात चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन के बाद कर्नाटक में सरकार बना लेना, कांग्रेस के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है I इससे कांग्रेस पार्टी में एक नयी जान आ गयी है I पहले बिहार और फिर कर्नाटक में उसके प्रयोग ने साबित कर दिया है कि विपक्षी लामबंदी (महागठबंधन) ही भाजपा के विजय रथ को रोक सकती है I एक आकलन के अनुसार, अगर कांग्रेस और जेडीएस एक साथ चुनाव लड़ती तो करीब १५० सीट जीत सकती थी I परन्तु राजनीति आंकड़े और अंकगणित का खेल नहीं है I राजनीति में कई बार 2 और 2 का जोड़।

 

शुन्य भी हुआ है जिसका ताज़ा उदहारण यूपी है जहाँ सपा –कांग्रेस का गठबंधन चुनाव में धराशायी हो गया I एक बड़ा सवाल यह कि क्या विपक्ष राहुल गांधी को अपने नेता के रूप में स्वीकार करेगा I शायद कर भी ले तो क्या देश राहुल गांधी को अपने नेता के रूप में स्वीकार कर लेगा I देश के बड़े राज्य जैसे की उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़, पंजाब ओडिशा, और गुजरात में हमारे द्वारा किये गए सर्वेक्षणों पर नज़र डालें तो पता चलता है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी कि लोकप्रियता अभी भी बनी हुई है I इन राज्यों में लोकसभा के कुल 220 सीटें हैं I इन राज्यों में हमारे द्वारा किये गए सर्वेक्षण देश के मिजाज़ की एक झलक तो दे ही देते हैं।

इन चार सालों में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता में 11% की बढ़ोतरी हुई है I इन राज्यों में 2014 में जहाँ 57% मतदाता नरेंद्र मोदी को अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते थे वहीँ ऐसे लोगों की प्रति शत अब बढ़ कर 69% हो गयी है I वहीँ दूसरी ओर, राहुल गांधी को इन राज्यों के मात्र 31% मतदाता ही प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते है I इनमे ऐसे राज्य भी हैं जहाँ इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने है I प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश में सबसे ज्यादा है I इन दो राज्यों में करीब तीन चौथाई से ज्यादा मतदाता उन्हें एक प्रधानमंत्री के रूप में पसंद करते हैं और अगले प्रधानमन्त्री के रूप में देखना चाहते हैं I बिहार ,मध्यप्रदेश और गुजरात में 70% मतदाता उन्हें अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं I इन सभी राज्यों की तुलना में, मोदी की लोकप्रियता पंजाब और ओडिशा में कम है मगर वहां भी वो राहुल गांधी से काफी आगे हैं ।

 

ओडिशा और पंजाब में 64% मतदाता मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं तो राहुल गांधी के पक्षधर करीब एक तिहाई मतदाता ही हैं।

नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी सफलता, भारत को विश्व में एक नयी पहचान देने की है I 10 में से 9 मतदाताओं ने इसे मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बतायी है I आज विश्व में भारत की एक नयी छवि बनी है और जिस तरह से विश्व भारत को देख रहा है उससे मतदाता काफी खुश है I मोदी सरकार की दूसरी बड़ी उपलब्धि स्वक्षता मिशन है I मतदाता मोदी द्वारा आतंकवाद पर लगाम लगा पाकिस्तान को विश्व में अलग थलग कर उसे कूटनीतिक शिकस्त देने को भी एक बड़ी सफलता मानते हैं I नोट बंदी और उज्जवला योजना को भी मतदातों ने काफी सराहा है I इन राज्यों में हर 10 में से 7 मतदाताओं ने माना कि देश हित और समाज हित में उठाया गया यह एक महत्वपूर्ण कदम है ।

मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी मंहगाई और बेरोजगारी न रोक पाने की है I आज जनता महंगाई की मारझेल रही है और त्रस्त है I नोट बंदी तथा जीएसटी से जनता को महंगाई कम होने की बहुत उम्मीद थी जो नहीं हुई I अगर विपक्ष इन मुद्दों के लेकर अगले एक साल तक सड़क पर उतरता है तो मोदी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा हो जायेगी।

आज देश में सबसे बड़ी बाधा सरकारी तंत्र का लचरपन है I बहुत अच्छी-अच्छी योजनाये खटाई में है और यह जनमत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के पास इस लचरपन को दूर करने का एक सुनहरा अवसर था I आर्थिक उदारीकरण के बाद आज देश को सबसे ज्यादा जरुरत प्रशासनिक उदारीकरण की है I अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा किये गए अध्यन हमारी प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़ा करते हैं I इसकी सुधार के लिए प्रधानमंत्री जी को देश हित में कई कठोर निर्णय लेने होंगे तभी उनके योजनाओं को अमली जामा पहनाया जा सकेगा वरना ये वादे चुनावी जुमले ही बन कर रह जायेंगे I अब यह तो अगले साल ही पता चलेगा कि क्या यह देश ‘महंगा पर इमानदार राष्ट्रवाद’ चाहता है ?

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