भयावह और रहस्यों से भरा भानगढ़, क्या वाकई रात में जाने वाला वापस लौटकर नहीं आता?

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ऐसी कई जग़ह हैं जिनके राज़ इतिहास के पन्नों में दफ़न होकर रह गए हैं। वो जगह, जिनकी किस्से- कहानियाँ रोमांच और रहस्यों से भरपूर हैं। इस लेख में ऐसी विचित्र जगह के बारे में बात होगी, जिससे शायद आज हर कोई वाकिफ़ है। दुनियाभर के डरावने स्थानों में से एक राजस्थान के भानगढ़ (भूतों का भानगढ़) को सबसे डरावना स्थान माना गया हैं। यू तो, भानगढ़ नाम सुनते ही दिल में दहशत की घंटियां बजने लगती हैं, लेकिन भानगढ़ का रहस्य क्या है? क्या यहां वाकई में भूतों का बसेरा है या फिर सिर्फ सुनी सुनाई बातें? क्या वाकई रात में यहां जाने वाला वापस लौटकर नहीं आता?

भानगढ़ राजस्थान के अलवर जिले में है, जहां बड़ी तादाद में लोग यहां घूमने के लिए जाते हैं लेकिन रात होने से पहले ही वापस रवाना हो जाते हैं। आस पास के लोगो का कहना हैं कि रात के वक्त यहां पर पायल की आवाजें और घुंघरुओं की गूंज सुनाई देती हैं। बता दे, जिले में स्थित भानगढ़ दिन में पर्यटकों से आबाद रहता है लेकिन सूरज ढलते ही इसमें प्रवेश बंद कर दिया जाता है। इसके लिए यहां रात को करीब आधा दर्जन गार्ड भी तैनात किए गए हैं।
17 वीं शताब्दी में भारत के राजस्थान राज्य में किले का निर्माण हुआ। इस किले का निर्माण मान सिंह (जो अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक थे) ने अपने पौत्र माधो सिंह के लिए करवाया था। इस किले का नाम माधो सिंह के दादा मान सिंह व् बहन सिंह के नाम पर पड़ा। भानगढ़ से पांच किलोमीटर दूर है सोमसागर तालाब, जिसके किनारे से एक पत्थर मिला था। इस पत्थर से पता चला कि माधो सिंह अकबर के दरबार में दीवान थे। सोमेश्वर मंदिर और गोपीनाथ मंदिर की कुछ नक्काशियां अच्छी हैं। मान्यताओं के अनुसार एक दुष्ट जादूगर ने श्राप दिया था जिसके कारण यहां सब खत्म हो गया।

भानगढ़ के विनाश के बहुत से कई किस्से प्रचलित हैं, लेकिन सर्वाधिक चर्चित कहानी यह है कि इस राज्य में तांत्रिकों, साधुओं और ज्योतिषियों को बेहद सम्मान हासिल था। कहानी के मुताबिक, भानगढ़ की राजकुमारी रत्‍नावती अपूर्व सुन्‍दरी थी। वह तंत्र-मंत्र की विधाओं में भी पारंगत थी।

राजकुमारी रत्‍नावती के रूप के चर्चे पूरे राज्य में थे। देश के कई राजकुमार उनसे विवाह करना चाहते थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 18 वर्ष ही थी। इस दौरान कई राज्यो से उनके लिए विवाह के प्रस्ताव आ रहे थे। बात उस समय की है जब एक बार वे अपनी सखियो के साथ बाजार जाने के लिए किले से निकली थी। तब बाजार में राजकुमारी एक इत्र की दुकान पर पहुंची और इत्रों को हाथों में लेकर उनकी खुशबू लेने लगी। उसी समय एक सिंधु सेवडा नाम का व्यक्ति, जो दुकान से कुछ दूरी पर खड़ा थे उन्हे गौर से देखने लगा। वह राजकुमारी पर मोहित हो गया और उन्हें चाहने लगा।

वह अच्छी तरह जानता था कि बिना तांत्रिक शक्तियों का प्रयोग किए राजकुमारी तक पहुंच पाना असंभव है, दूसरा उसे यह भी पता था कि वह जिसे पाना चहता है वह कोई साधारण स्त्री नहीं बल्कि उसी राज्य की राजकुमारी है जहां उसे आश्रय मिला हुआ है। राजा को यदि उसके प्रयासों की भनक भी मिल गई तो उसके प्राण बचाने वाला कोई नहीं होगा। इस सबके बाद भी वह रानी को मन से नहीं निकाल पा रहा था। अंततः इस सेवड़ा तांत्रिक ने अपनी तांत्रिक विद्या के द्वारा ही राजकुमारी रत्नावती को वश में करने का फैसला किया।

राजमहल में पहुंचकर दासी ने तेल का कटोरा राजकुमारी के सामने रखा और जो भी घटित हुआ था। दासी ने रानी को बताया, साथ ही उस तांत्रिक बाबा का हुलिया भी बयान किया। राजकुमारी ने तेल को परखने के लिए उस पर अपना मंत्र डाला, तेल घूमने लगा, अपनी सिद्धि से रत्नावती ने जान लिया कि तेल में वशीकरण के साथ ही मारक मंत्र व तंत्र का प्रयोग किया गया है। राजकुमारी को समझ आ गया कि तांत्रिक ने उसे अपने मोहपाश में बांधने के लिए ही यह तेल दासी के हाथ भिजवाया है।

राजकुमारी के क्रोध की सीमा न रही और इसी गुस्से में उसने उसी समय अपने सामने रखी तेल की कटोरी पर सिद्ध मारक मंत्र पढ़कर वहीं से सामने वाली पहाड़ी पर फेंका, जहां बैठा वह तांत्रिक अनुष्ठान कर रहा था। तेल एक भयानक आवाज के साथ शिला के रूप में वहां से उड़ा और कहर बनकर तांत्रिक के ऊपर टूटा और सिंघा वहीं मृत्यु को प्राप्त हुआ। मरने से पूर्व तांत्रिक ने श्राप दिया था की इस किले मे रहने वाले सभी व्यक्ति जल्द ही मारे जाएँगे और उनकी रूहे इस किले मे भटकती रहेंगी, वे कभी भी दुबारा जन्म नही ले पाएँगे।

भानगढ़ के आसपास के गांवों के अनेक लोग मानते हैं कि तांत्रिक के श्राप के कारण ही किला सहित सभी इमारतें खंडहर हो गई, लेकिन मंदिरों का कुछ नहीं बिगड़ा। कुछ लोगों का विश्वास है कि इस श्राप से अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए लोगों की आत्माएं आज भी यहां भटकती हैं और इस जगह के भुतहा होने व फिर से न बस पाने का यही कारण माना जाता है।

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